खगड़िया के ‘पचास हजारी’ ईनामी अपराधी संजय पासवान का खेल खत्म! बिहार STF और जिला पुलिस की बेगूसराय में बड़ी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’; 9 साल पुराने डकैती कांड में मिली कामयाबी

समाचार के मुख्य बिंदु: खगड़िया का ‘वांटेड’ अब सलाखों के पीछे

  • बड़ी गिरफ्तारी: खगड़िया जिला पुलिस और बिहार STF की विशेष टीम ने एक संयुक्त ऑपरेशन में 50,000 रुपये के ईनामी अपराधी संजय पासवान को धर दबोचा है.

  • छापेमारी का स्थान: शातिर अपराधी की गिरफ्तारी बेगूसराय जिले के तेघड़ा थाना क्षेत्र से की गई है.

  • पुराना हिसाब: संजय पासवान 2017 के मानसी थाना कांड संख्या 268/17 (डकैती और लूट) मामले में लंबे समय से वांछित था.

  • आपराधिक इतिहास: आरोपी के खिलाफ लूट, डकैती और आर्म्स एक्ट सहित कुल 6 गंभीर मामले दर्ज हैं.

  • VOB इनसाइट: यह गिरफ्तारी बिहार पुलिस और STF के बीच बेहतर तालमेल का नतीजा है। 2017 से फरार चल रहे एक डकैत का 2026 में पकड़ा जाना यह संदेश देता है कि कानून की फाइलें भले ही धूल फांक रही हों, लेकिन अपराधियों का ‘बैकलॉग’ कभी खत्म नहीं होता। 50 हजार का ईनाम यह साबित करता है कि यह अपराधी पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ था। बेगूसराय में छिपकर रहना इसके ‘सेफ हाउस’ नेटवर्क की ओर इशारा करता है, जिसकी अब गहराई से जांच होनी चाहिए।

खगड़िया/बेगूसराय | 29 मार्च, 2026

​बिहार में अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन प्रहार’ को एक और बड़ी सफलता मिली है। खगड़िया जिले का कुख्यात और पुलिस की ‘मोस्ट वांटेड’ सूची में शामिल 50 हजार का ईनामी डकैत संजय पासवान अब पुलिस की गिरफ्त में है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, 28 मार्च 2026 को बिहार एसटीएफ (STF) और खगड़िया पुलिस ने एक खुफिया सूचना के आधार पर बेगूसराय में दबिश दी और इस शातिर अपराधी के भागने के सभी रास्ते बंद कर दिए।

2017 से चल रहा था ‘चूहे-बिल्ली’ का खेल

​संजय पासवान, पिता चूल्हों पासवान, जो मूल रूप से खगड़िया जिले के मानसी थाना अंतर्गत एकनीय गांव का निवासी है, पुलिस के लिए पिछले 9 सालों से एक बड़ी चुनौती बना हुआ था। साल 2017 में मानसी थाना में दर्ज कांड संख्या 268/17, जो डकैती (धारा 395) और लूटे गए माल को रखने (धारा 412) से संबंधित था, उसके बाद से ही वह लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा था।

​पुलिस की लगातार नाकामियों के बाद उस पर 50,000 रुपये का ईनाम घोषित किया गया था। शनिवार को जब STF की विशेष टीम को उसके बेगूसराय के तेघड़ा इलाके में होने की पुख्ता जानकारी मिली, तो बिना समय गंवाए एक संयुक्त टीम ने घेराबंदी की और उसे गिरफ्तार कर लिया।

अपराध का ‘ब्लैक बुक’: 6 संगीन मामलों का लेखा-जोखा

​संजय पासवान कोई मामूली अपराधी नहीं, बल्कि एक पेशेवर डकैत और लुटेरा है। खगड़िया जिला पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार, उसके खिलाफ विभिन्न थानों में आतंक का लंबा इतिहास दर्ज है:

अपराध की प्रकृति

थानों का विवरण

कुल मामले

डकैती और लूट

मानसी एवं अन्य थाना क्षेत्र

03

आर्म्स एक्ट (अवैध हथियार)

जिला खगड़िया

02

अन्य गंभीर अपराध

01

कुल मामले

खगड़िया के विभिन्न थाने

06

VOB का नजरिया: क्या है इस गिरफ्तारी के मायने?

​’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि संजय पासवान की गिरफ्तारी से खगड़िया और आसपास के जिलों में सक्रिय डकैतों के गिरोह को एक बड़ा झटका लगा है।

  1. STF की तकनीकी बढ़त: ईनामी अपराधियों को दूसरे जिलों (जैसे बेगूसराय) में ट्रैक करना यह दर्शाता है कि बिहार STF का सर्विलांस और मुखबिर तंत्र अब और अधिक सटीक हो गया ह
  2. सीमावर्ती जिलों में खौफ: बेगूसराय और खगड़िया की सीमा पर सक्रिय अपराधियों के लिए यह एक चेतावनी है कि वे अब सुरक्षित नहीं हैं।
  3. 9 साल का अंतराल: 2017 के मामले में 2026 में गिरफ्तारी होना न्याय प्रक्रिया की धीमी गति और पुलिस की निरंतरता दोनों को उजागर करता है। अब जरूरत इस बात की है कि इसके खिलाफ स्पीडी ट्रायल चलाकर जल्द से जल्द सजा दिलाई जाए।

निष्कर्ष: सुशासन और सुरक्षा का संदेश

​संजय पासवान की गिरफ्तारी खगड़िया पुलिस के लिए एक बड़ी प्रशासनिक उपलब्धि है। आरोपी को फिलहाल न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फरारी के दौरान उसे किन ‘सफेदपोश’ लोगों या अन्य अपराधियों ने शरण दी थी।

​’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) इस अपराधी के खिलाफ होने वाली कानूनी कार्यवाही, उसके गिरोह के अन्य सदस्यों की धरपकड़ और खगड़िया क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी हर ताज़ा अपडेट आप तक सबसे पहले पहुँचाता रहेगा।

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