बिहार में ‘मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना’ का बड़ा असर: 3 वर्षों में 10 लाख से ज्यादा बालिकाओं को मिला लाभ

पटना, 28 मार्च: बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना’ (एमकेयूवाई) राज्य में बेटियों के सशक्तिकरण की दिशा में लगातार सकारात्मक परिणाम दे रही है। पिछले तीन वर्षों में इस योजना के तहत 10 लाख से अधिक बालिकाओं को आर्थिक सहायता प्रदान की गई है, जिससे उनके जन्म से लेकर शुरुआती विकास तक मजबूत आधार तैयार हो रहा है।

समाज कल्याण विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2024-25 के बीच कुल 12 लाख 53 हजार 831 बालिकाओं का पंजीकरण हुआ। इनमें से 10 लाख 35 हजार 770 लाभार्थियों को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए सीधे उनके अभिभावकों के बैंक खाते में राशि भेजी जा चुकी है।

हर साल लाखों बेटियों को मिल रहा लाभ

वर्षवार आंकड़ों पर नजर डालें तो इस योजना का दायरा लगातार बढ़ता दिख रहा है।

  • 2022-23 में 3 लाख 46 हजार 658 बालिकाओं को लाभ मिला
  • 2023-24 में 3 लाख 52 हजार 413 लाभार्थियों को राशि दी गई
  • 2024-25 में 3 लाख 36 हजार 699 बालिकाओं को योजना से जोड़ा गया

यह आंकड़े बताते हैं कि योजना का लाभ राज्य के हर हिस्से तक तेजी से पहुंच रहा है।

2025-26 में भी तेज रफ्तार से पंजीकरण

वित्तीय वर्ष 2025-26 में तकनीकी कारणों से पंजीकरण प्रक्रिया थोड़ी देरी से, जनवरी के अंतिम सप्ताह में शुरू की गई थी। इसके बावजूद अब तक 1 लाख 10 हजार 367 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। अधिकारियों का कहना है कि प्रक्रिया अब तेज हो गई है और आने वाले समय में अधिक से अधिक लाभार्थियों को योजना का लाभ मिलेगा।

जन्म से ही मिल रहा आर्थिक सहारा

इस योजना के तहत नवजात कन्या के जन्म के पहले वर्ष में 2,000 रुपये की राशि दी जाती है। इसके बाद जब बच्ची एक वर्ष की हो जाती है और उसका जन्म पंजीकरण तथा आधार पंजीकरण पूरा हो जाता है, तो अतिरिक्त 1,000 रुपये की सहायता दी जाती है।

यह पूरी राशि DBT के माध्यम से सीधे अभिभावकों के बैंक खाते में भेजी जाती है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है और लाभ सीधे जरूरतमंदों तक पहुंचता है।

2018 में हुई शुरुआत, कई सामाजिक लक्ष्यों पर फोकस

मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना की शुरुआत 3 अगस्त 2018 को की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाना, जन्म पंजीकरण को बढ़ावा देना और बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करना है।

इसके साथ ही योजना का लक्ष्य बालिकाओं की शिक्षा और आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करना भी है, ताकि वे समाज में सशक्त भूमिका निभा सकें।

बेटियों के लिए बदल रही सोच

यह योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में बेटियों को लेकर सकारात्मक सोच विकसित करने में भी अहम भूमिका निभा रही है। सरकार का संदेश साफ है कि बेटियां परिवार और समाज की ताकत हैं, न कि बोझ।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की योजनाएं राज्य में लिंग अनुपात सुधारने, शिक्षा दर बढ़ाने और बाल विवाह जैसी समस्याओं को जड़ से खत्म करने में मददगार साबित हो रही हैं।

भविष्य के लिए मजबूत पहल

बिहार सरकार की यह पहल आने वाले वर्षों में और अधिक प्रभावी साबित हो सकती है। जिस तरह से लगातार बड़ी संख्या में बालिकाएं इस योजना से जुड़ रही हैं, उससे यह स्पष्ट है कि यह योजना बेटियों के उज्जवल भविष्य की मजबूत नींव तैयार कर रही है।

अगर इसी गति से कार्य जारी रहा, तो बिहार में सामाजिक बदलाव की एक नई तस्वीर देखने को मिल सकती है, जहां बेटियों को बराबरी का अवसर और सम्मान मिल सकेगा।

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