
ब्रेकिंग न्यूज़: बिहार बोर्ड 10वीं का परिणाम घोषित; शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने जारी किए नतीजे
- टॉपर्स की गूंज: सिमुलतला आवासीय विद्यालय की पुष्पांजलि कुमारी और वैशाली की सबरीन परवीन ने 98.4% अंकों के साथ पूरे राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त किया है।
- रिकॉर्ड तोड़ समय: मूल्यांकन कार्य समाप्त होने के मात्र 16वें दिन बोर्ड ने परिणाम जारी कर देश भर के अन्य शिक्षा बोर्डों के लिए मिसाल पेश की है।
- बेटियों का दबदबा: इस साल भी बिहार की बेटियों ने लड़कों को पीछे छोड़ दिया है। पास होने वाली छात्राओं की संख्या 6.34 लाख से अधिक है।
- वेबसाइट और लिंक: छात्र अपना रोल नंबर और रोल कोड लेकर result.biharboardonline.org और matricbiharboard.com पर परिणाम देख सकते हैं।
- कंपार्टमेंट और स्क्रूटनी: जो छात्र अपने अंकों से संतुष्ट नहीं हैं या किसी विषय में असफल हुए हैं, वे 01 अप्रैल से 07 अप्रैल 2026 के बीच आवेदन कर सकेंगे।
- VOB इनसाइट: बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने एक बार फिर समयबद्धता और पारदर्शिता का परिचय दिया है। लगातार सातवें साल मार्च महीने में रिजल्ट जारी करना बोर्ड की तकनीकी और प्रशासनिक मजबूती को दर्शाता है। सिमुलतला आवासीय विद्यालय का दबदबा बरकरार है, लेकिन वैशाली की छात्रा ने भी संयुक्त टॉपर बनकर यह साबित किया है कि जिला स्तर पर भी शिक्षा का स्तर ऊपर उठा है।
पटना | 29 मार्च, 2026
बिहार की मेधा ने एक बार फिर पूरे देश में अपनी चमक बिखेरी है। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) द्वारा आयोजित मैट्रिक वार्षिक परीक्षा 2026 का परिणाम रविवार दोपहर 1:15 बजे जारी कर दिया गया। बिहार के शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने बोर्ड कार्यालय में आयोजित एक भव्य प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आधिकारिक बटन दबाकर 15 लाख से अधिक परीक्षार्थियों के भविष्य का पिटारा खोला। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, इस साल राज्य का कुल पास प्रतिशत 81.79 फीसदी रहा है।
दो बेटियां बनीं बिहार की ‘आन-बान-शान’: पुष्पांजलि और सबरीन ने मारी बाजी
इस वर्ष मैट्रिक रिजल्ट की सबसे बड़ी और सुखद खबर यह है कि बिहार की दो बेटियों ने संयुक्त रूप से पहला स्थान प्राप्त कर राज्य का मान बढ़ाया है।
- पुष्पांजलि कुमारी: सिमुलतला आवासीय विद्यालय, जमुई की छात्रा।
- सबरीन परवीन: उच्च माध्यमिक विद्यालय, छौड़ाही, वैशाली की छात्रा।
दोनों ही छात्राओं ने 500 में से 492 अंक (98.4%) प्राप्त किए हैं। टॉपर सूची में पुष्पांजलि और सबरीन की सफलता ने यह साफ कर दिया है कि बिहार की लड़कियां अब किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने टॉपर्स को बधाई देते हुए कहा कि ग्रामीण और जिला स्तर के स्कूलों से निकलकर बच्चों का टॉप करना बिहार की शिक्षा व्यवस्था में हो रहे सकारात्मक बदलावों का प्रमाण है।
रिजल्ट का सांख्यिकीय विश्लेषण: आंकड़ों में बिहार की सफलता

बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा 2026 में शामिल होने वाले छात्रों की संख्या और उनके प्रदर्शन का विस्तृत विवरण निम्नलिखित है:
विवरण | संख्या / आंकड़े |
|---|---|
कुल नामांकित छात्र | 15,12,687 |
परीक्षा में शामिल छात्राएं | 7,85,722 |
परीक्षा में शामिल छात्र (लड़के) | 7,26,961 |
कुल सफल छात्र | 12,35,747 |
सफल छात्राओं की संख्या | 6,34,353 |
सफल छात्रों (लड़कों) की संख्या | 6,01,690 |
कुल पास प्रतिशत | 81.79% |
प्रथम श्रेणी (1st Division) | 4 लाख से अधिक |
द्वितीय श्रेणी (2nd Division) | 4 लाख से अधिक |
तृतीय श्रेणी (3rd Division) | 3 लाख से अधिक |
इस साल टॉप 10 की सूची में कुल 139 परीक्षार्थी शामिल हैं, जिनमें से प्रथम 5 रैंक पर 13 मेधावी छात्रों ने कब्जा किया है। वहीं, छठे से 10वें नंबर के बीच 126 परीक्षार्थी अपनी जगह बनाने में सफल रहे हैं।
रिकॉर्ड समय में मूल्यांकन: कैसे बोर्ड ने फिर मारी बाजी?
बिहार बोर्ड ने पिछले कुछ वर्षों से समय पर परीक्षा आयोजित करने और रिकॉर्ड समय में रिजल्ट देने की जो परंपरा शुरू की है, वह इस बार भी कायम रही। उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन कार्य 2 मार्च 2026 से शुरू होकर 13 मार्च तक चला था। मूल्यांकन समाप्त होने के ठीक 16वें दिन बोर्ड ने पूरे प्रदेश का परिणाम घोषित कर दिया। पटना जिले में 70 परीक्षा केंद्रों पर करीब 71,022 उम्मीदवारों ने परीक्षा दी थी, जहाँ दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए राइटर और अतिरिक्त समय की विशेष व्यवस्था की गई थी।
मार्कशीट डाउनलोड करने की आसान प्रक्रिया: स्टेप-बाय-स्टेप गाइड
रिजल्ट जारी होने के बाद भारी ट्रैफिक के कारण वेबसाइट्स धीमी हो सकती हैं। छात्र धैर्य रखें और नीचे दिए गए चरणों का पालन करें:
- स्टेप 1: आधिकारिक वेबसाइट biharboardonline.bihar.gov.in या matricbiharboard.com पर जाएं।
- स्टेप 2: होमपेज पर “BSEB Matric Result 2026” लिंक पर क्लिक करें।
- स्टेप 3: अपना रोल कोड (Roll Code) और रोल नंबर (Roll Number) सावधानीपूर्वक दर्ज करें।
- स्टेप 4: कैप्चा कोड भरें और ‘Submit’ बटन पर क्लिक करें।
- स्टेप 5: आपकी मार्कशीट स्क्रीन पर दिखाई देगी। इसे तुरंत डाउनलोड करें और भविष्य के लिए प्रिंटआउट लेकर सुरक्षित रख लें।
डिजिलॉकर (DigiLocker) की सुविधा: छात्र digilocker.gov.in पर जाकर भी अपना डिजिटल अंकपत्र प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए ‘Education’ टैब में बिहार बोर्ड को चुनकर जरूरी क्रेडेंशियल्स दर्ज करने होंगे।
SMS के जरिए रिजल्ट: बिना इंटरनेट के रिजल्ट देखने के लिए मोबाइल के मैसेजिंग ऐप में BIHAR10 ROLLNUMBER टाइप करें और उसे 56263 पर भेज दें।
अगला कदम: स्क्रूटनी और कंपार्टमेंट परीक्षा की जानकारी
यदि कोई छात्र अपने परिणाम से असंतुष्ट है या उसे लगता है कि किसी विषय में उसे कम अंक मिले हैं, तो उसे परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। बिहार बोर्ड ऐसे छात्रों को स्क्रूटनी (पुनर्मूल्यांकन) का अवसर प्रदान करता है।
- स्क्रूटनी आवेदन: 01 अप्रैल से 07 अप्रैल 2026 के बीच।
- कंपार्टमेंट परीक्षा: जो छात्र एक या दो विषयों में अनुत्तीर्ण हुए हैं, वे भी इसी अवधि (1-7 अप्रैल) में कंपार्टमेंट परीक्षा का फॉर्म भर सकेंगे ताकि उनका एक साल बर्बाद न हो।
VOB का नजरिया: बिहार बोर्ड का ‘ग्लोबल’ बेंचमार्क
’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि बिहार बोर्ड ने जिस कुशलता से 1,699 केंद्रों पर कदाचार मुक्त परीक्षा संपन्न कराई और फिर आधुनिक तकनीक का उपयोग कर समय से पहले रिजल्ट दिया, वह प्रशंसनीय है।
- सिमुलतला का वर्चस्व: जमुई के सिमुलतला आवासीय विद्यालय ने एक बार फिर सिद्ध किया है कि सरकारी स्कूलों में भी उच्च स्तर की शिक्षा संभव है।
- बेटियों की जीत: छात्राओं के पास होने की संख्या (6.34 लाख) छात्रों (6.01 लाख) से अधिक होना बिहार में महिला सशक्तिकरण की एक नई तस्वीर पेश करता है।
- पारदर्शिता: ऑनलाइन रिजल्ट और स्क्रूटनी की सरल प्रक्रिया ने बोर्ड के प्रति छात्रों और अभिभावकों का विश्वास बहाल किया है।
निष्कर्ष: सफलता के नए आसमान की ओर
मैट्रिक का रिजल्ट छात्रों के जीवन का पहला बड़ा पड़ाव होता है। पुष्पांजलि और सबरीन जैसे टॉपर्स आज लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा बन गए हैं। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) सभी सफल छात्रों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देता है। जो छात्र सफल नहीं हो पाए, उन्हें निराश होने के बजाय कंपार्टमेंट परीक्षा की तैयारी में जुट जाना चाहिए क्योंकि ‘एक परीक्षा परिणाम जीवन का अंतिम फैसला नहीं होता’।


