
RTE एडमिशन अपडेट: निजी स्कूलों में नामांकन की अंतिम तिथि बढ़ी, 10 अप्रैल तक मिलेगा मौका
पटना, 27 मार्च 2026। बिहार में शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून के तहत निजी विद्यालयों में दाखिले को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। शिक्षा विभाग ने चयनित बच्चों के नामांकन की अंतिम तिथि को बढ़ाकर अब 10 अप्रैल 2026 कर दिया है। इस फैसले का उद्देश्य अधिक से अधिक पात्र बच्चों का स्कूलों में दाखिला सुनिश्चित करना है।
शिक्षा विभाग की ओर से जारी निर्देश में राज्य के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) और जिला कार्यक्रम अधिकारियों (DPO) को स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि वे तय समय सीमा के भीतर सभी चयनित छात्रों का नामांकन सुनिश्चित कराएं। साथ ही, जिन निजी विद्यालयों द्वारा नामांकन प्रक्रिया में लापरवाही बरती जा रही है, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया गया है।
पहले चरण में कम हुआ नामांकन, इसलिए बढ़ी तिथि
दरअसल, RTE के तहत निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और वंचित समूहों के बच्चों के लिए आरक्षित होती हैं। इसके लिए 23 फरवरी को राज्यभर में ऑनलाइन प्रक्रिया के जरिए पहले चरण का रेंडमाइजेशन किया गया था।
इस प्रक्रिया में कुल 70,155 बच्चों का चयन हुआ था, लेकिन निर्धारित अंतिम तिथि 20 मार्च तक केवल 53,479 बच्चों का ही नामांकन हो सका। बड़ी संख्या में बच्चों के दाखिले अधूरे रहने के कारण शिक्षा विभाग ने यह समय सीमा बढ़ाने का निर्णय लिया।
अधिकारियों को सख्त निर्देश, स्कूलों पर रहेगी नजर
प्राथमिक शिक्षा निदेशक विक्रम विरकर ने सभी जिलों को भेजे पत्र में कहा है कि शेष बचे बच्चों का नामांकन हर हाल में 10 अप्रैल तक पूरा कराया जाए। इसके लिए जिला स्तर पर मॉनिटरिंग बढ़ाने और अभिभावकों को जागरूक करने पर भी जोर दिया गया है।
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई विद्यालय जानबूझकर नामांकन में देरी करता है या नियमों का पालन नहीं करता, तो उसके खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। संबंधित अधिकारियों को ऐसे विद्यालयों की सूची तैयार कर कार्रवाई का प्रस्ताव भेजने को कहा गया है।
RTE का उद्देश्य: सबको समान शिक्षा का अवसर
शिक्षा का अधिकार कानून का मुख्य उद्देश्य समाज के कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटों पर मुफ्त शिक्षा की व्यवस्था इसी दिशा में एक अहम कदम माना जाता है।
अब नजर इस बात पर टिकी है कि बढ़ी हुई समय सीमा के भीतर कितने और बच्चों का नामांकन सुनिश्चित हो पाता है और क्या शिक्षा विभाग अपने लक्ष्य को पूरी तरह हासिल कर पाता है।


