
पटना, 28 मार्च 2026। बिहार की राजनीति में इन दिनों सबसे बड़ा सवाल यही है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बाद राज्य की कमान किसके हाथ में होगी। इस मुद्दे ने अब सियासी तापमान को और बढ़ा दिया है। एक तरफ जहां बीजेपी बिहार में अपना मुख्यमंत्री बनाने की रणनीति पर काम कर रही है, वहीं जनता दल (यू) के भीतर से निशांत कुमार के नाम को लेकर खुलकर आवाज उठने लगी है।
जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार के ताजा बयान ने इस चर्चा को और तेज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री का फैसला अंततः राष्ट्रीय नेतृत्व या एनडीए के घटक दल मिलकर करेंगे, लेकिन पार्टी के अंदर निशांत कुमार को भविष्य के नेतृत्व के तौर पर देखा जा रहा है।
नीरज कुमार ने कहा कि “भविष्य की उड़ान निशांत कुमार हैं। यह जरूरी नहीं कि उन्हें कौन-सा पद मिलेगा, लेकिन नेतृत्वकर्ता के रूप में उनकी स्वीकार्यता बढ़ रही है।” उन्होंने ‘तीर निशान – तय निशांत’ का नारा दोहराते हुए संकेत दिया कि पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच निशांत कुमार को लेकर सकारात्मक माहौल बन रहा है।
उन्होंने हाल ही में नालंदा दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि जब उन्होंने वहां के लोगों से निशांत कुमार के समर्थन में आशीर्वाद मांगा, तो लोगों ने हाथ उठाकर समर्थन दिया। उनके मुताबिक यह इस बात का संकेत है कि जमीनी स्तर पर भी निशांत कुमार की स्वीकार्यता बन रही है।
हालांकि, नीरज कुमार ने यह भी साफ किया कि अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व का होगा और नीतीश कुमार ही इस पर अंतिम मुहर लगाएंगे। उन्होंने कहा कि “नीतीश कुमार हमारे नेता हैं और उनका हर फैसला पार्टी और गठबंधन के हित में होगा।”
इस बीच, बीजेपी की रणनीति भी चर्चा में है। माना जा रहा है कि पार्टी अब बिहार में अपने नेतृत्व को स्थापित करने के लिए अधिक सक्रिय हो गई है। ऐसे में जेडीयू द्वारा निशांत कुमार के नाम को आगे बढ़ाना एनडीए के भीतर शक्ति संतुलन की नई बहस को जन्म दे सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर जेडीयू इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाती है, तो आने वाले दिनों में एनडीए के अंदर समन्वय की चुनौती बढ़ सकती है। वहीं, यह भी कहा जा रहा है कि 2025 के चुनाव में मिले जनादेश और नीतीश कुमार की छवि अब भी जेडीयू की सबसे बड़ी ताकत है।
फिलहाल, बिहार की राजनीति में ‘उत्तराधिकारी’ को लेकर तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है, लेकिन इतना तय है कि ‘निशांत’ नाम ने सियासी गलियारों में हलचल जरूर पैदा कर दी है। आने वाले समय में यह मुद्दा और गरमाएगा और एनडीए के भीतर समीकरण किस दिशा में जाते हैं, इस पर सबकी नजर टिकी हुई है।


