गया एयरपोर्ट पर विदेशी ‘नशे’ की बड़ी खेप बरामद! थाईलैंड से लाया गया 5 करोड़ का गांजा जब्त; गोरखपुर का 21 वर्षीय तस्कर गिरफ्तार

समाचार के मुख्य बिंदु: अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करी नेटवर्क पर कस्टम और सीआईएसएफ की चोट

  • बड़ी कामयाबी: गया इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सीमा शुल्क विभाग (Customs) और सीआईएसएफ (CISF) की संयुक्त टीम ने विदेशी गांजे की तस्करी के एक बड़े मामले का पर्दाफाश किया है।
  • करोड़ों की जब्ती: तस्करी कर लाए गए लगभग 5 किलोग्राम विदेशी गांजे की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत 5 करोड़ रुपये आंकी गई है।
  • गिरफ्तार तस्कर: पुलिस ने उत्तर प्रदेश के गोरखपुर निवासी 21 वर्षीय युवक विशाल ओझा को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।
  • रूट का खुलासा: आरोपी थाईलैंड के डॉन मुआंग एयरपोर्ट से थाई एयर एशिया की फ्लाइट लेकर गया पहुँचा था और यहाँ से सड़क मार्ग के जरिए गोरखपुर जाने की फिराक में था।
  • पकड़ने का तरीका: नियमित लगेज स्कैनिंग के दौरान बैग में संदिग्ध वस्तु दिखने पर कस्टम अधिकारियों ने गहन तलाशी ली, जिसमें नशीला पदार्थ बरामद हुआ।
  • VOB इनसाइट: गया एयरपोर्ट अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का मुख्य केंद्र होने के कारण अब ड्रग्स माफियाओं के रडार पर है। थाईलैंड जैसे देशों से महंगे ‘विदेशी गांजे’ की तस्करी के लिए युवा कैरियर का इस्तेमाल किया जाना एक खतरनाक ट्रेंड है।

बोधगया | 28 मार्च, 2026

​बिहार के गया अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सुरक्षा एजेंसियों ने मुस्तैदी दिखाते हुए मादक पदार्थों की तस्करी की एक बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया है। शुक्रवार को हुई इस कार्रवाई में करोड़ों रुपये के उच्च गुणवत्ता वाले विदेशी गांजे के साथ एक तस्कर को दबोचा गया है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, तस्कर ने सुरक्षा घेरे को चकमा देने के लिए नशीले पदार्थ को बेहद चालाकी से अपने लगेज में छिपा रखा था, लेकिन तकनीकी जांच ने उसकी पोल खोल दी।

थाईलैंड से बिहार और फिर यूपी: क्या था तस्करी का मास्टरप्लान?

​पकड़ा गया आरोपी विशाल ओझा (21 वर्ष) उत्तर प्रदेश के गोरखपुर का रहने वाला है। प्राथमिक पूछताछ में पता चला है कि वह एक बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सिंडिकेट के लिए ‘कैरियर’ के रूप में काम कर रहा था।

वारदात का विवरण:

  • फ्लाइट और रूट: विशाल थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक के डॉन मुआंग एयरपोर्ट से थाई एयर एशिया की फ्लाइट (Thai AirAsia) के जरिए गया पहुँचा। गया एयरपोर्ट पर उतरने के बाद उसका प्लान यहाँ से बस या निजी वाहन के जरिए सुरक्षित तरीके से गोरखपुर पहुँचना था।
  • तकनीकी पकड़: जब वह अपना सामान लेकर एयरपोर्ट से बाहर निकल रहा था, तभी सीआईएसएफ के सुरक्षाकर्मियों ने लगेज स्कैनिंग मशीन में कुछ असामान्य चीजें देखीं। बैग के भीतर नशीले पदार्थ को लेयरिंग कर छिपाया गया था ताकि सामान्य नजर से इसे न पहचाना जा सके।
  • कस्टम की कार्रवाई: संदेह होने पर कस्टम विभाग के अधिकारियों को बुलाया गया। अधिकारियों ने जब बैग को खोलकर उसकी बारीकी से जांच की, तो उसमें से लगभग 5 किलोग्राम विदेशी गांजा (Marijuana) बरामद हुआ।

तस्करी और जब्ती का सांख्यिकी विवरण

 

सुरक्षा एजेंसियों की सजगता: सीआईएसएफ और कस्टम का तालमेल

​बोधगया के गया एयरपोर्ट पर यह इस साल की सबसे बड़ी जब्ती मानी जा रही है। एयरपोर्ट अथॉरिटी के अनुसार, होली और पर्यटन सीजन के कारण इन दिनों यात्रियों की आवाजाही बढ़ी हुई है। इसी का फायदा उठाकर तस्कर तस्करी को अंजाम देने की कोशिश कर रहे थे।

​कस्टम विभाग अब इस बात की जांच कर रहा है कि विशाल ओझा को यह खेप थाईलैंड में किसने सौंपी थी और गोरखपुर में इसे किसे डिलीवर किया जाना था। जांच टीम उसके मोबाइल फोन के कॉल डिटेल्स और बैंक ट्रांजैक्शन को खंगाल रही है ताकि इस गिरोह के ‘किंगपिन’ तक पहुँचा जा सके।

VOB का नजरिया: गया एयरपोर्ट पर बढ़ती तस्करी की चुनौती

​’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बावजूद ड्रग्स तस्करी की कोशिशें गंभीर चिंता का विषय हैं।

  1. युवाओं का इस्तेमाल: 21 साल के युवक का इतनी बड़ी तस्करी में शामिल होना यह दर्शाता है कि माफिया पैसे का लालच देकर युवाओं को अपना शिकार बना रहे हैं।
  2. बिहार ‘ट्रांजिट हब’: बिहार का गया एयरपोर्ट अब केवल धार्मिक पर्यटन के लिए नहीं, बल्कि तस्करों द्वारा उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत में माल पहुँचाने के लिए एक ट्रांजिट हब के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
  3. स्कैनिंग की तकनीक: यह सफलता दर्शाती है कि एयरपोर्ट पर लगी नई पीढ़ी की स्कैनिंग मशीनें और प्रशिक्षित स्टाफ तस्करों के आधुनिक तरीकों को मात देने में सक्षम हैं।

सुशासन और नशा मुक्त बिहार का संकल्प

​विशाल ओझा को गिरफ्तार कर एनडीपीएस (NDPS) एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। उसे न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया जारी है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) इस अंतरराष्ट्रीय तस्करी गिरोह के स्थानीय संपर्कों और इस मामले में होने वाले नए खुलासों की हर ताज़ा अपडेट आप तक सबसे पहले पहुँचाता रहेगा।

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