
बिहार में अंचल अधिकारियों (CO) और राजस्व अधिकारियों की चल रही हड़ताल के बीच राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपना लिया है। उप मुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री Vijay Kumar Sinha ने गुरुवार को साफ कहा कि जनहित के काम में बाधा डालने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने यह भी घोषणा की कि हड़ताल के कारण खाली पड़े अंचलों में अब सेवानिवृत्त अधिकारियों को अनुबंध पर नियुक्त किया जाएगा, ताकि काम प्रभावित न हो।
सभी अंचलों में वैकल्पिक व्यवस्था
सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी अंचल में काम ठप नहीं होने दिया गया है। वर्तमान में 273 अंचल अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार देकर राजस्व कार्यों को संचालित किया जा रहा है।
जो अधिकारी 25 मार्च तक ड्यूटी पर लौट आए हैं, उन्हें प्रोत्साहन के तौर पर सदर अनुमंडलों का प्रभार दिया जा रहा है।
46 लाख लंबित मामलों के निपटारे का लक्ष्य
राजस्व महाअभियान को गति देने के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए सेवानिवृत्त अंचल अधिकारियों को अनुबंध पर नियुक्त करने की योजना बनाई है। इन अधिकारियों को मानदेय दिया जाएगा और उनका मुख्य लक्ष्य 46 लाख लंबित आवेदनों का जल्द निपटारा करना होगा।
सरकार ने यह भी साफ किया कि जो अधिकारी अब तक हड़ताल से वापस नहीं लौटे हैं, उनके खिलाफ प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
हड़ताल के बीच भी जारी है काम
राजस्व विभाग के अनुसार, हड़ताल के बावजूद काम जारी है और अब तक कई मामलों का निपटारा किया जा चुका है:
- 12,163 दाखिल-खारिज (Mutation) मामलों का निपटारा
- 38,672 जमाबंदियों में ‘परिमार्जन प्लस’ के तहत सुधार
- 16,777 छूटी जमाबंदियों को ऑनलाइन जोड़ा गया
- 4,431 ई-मापी मामलों का निष्पादन
अनुशासनहीनता पर जीरो टॉलरेंस
उप मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राज्य सरकार अनुशासनहीनता पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाएगी। कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों को सम्मान दिया जाएगा, जबकि लापरवाही और आदेशों की अनदेखी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी।
सरकार का उद्देश्य पारदर्शी, तेज और जवाबदेह राजस्व प्रशासन सुनिश्चित करना है।


