बालू माफियाओं ने सोन नदी को बनाया अपना शिकार, पुलिस और प्रशासन रहे निष्क्रिय

पटना: सोन नदी, जो पटना जिले की जीवनरेखा मानी जाती है, इन दिनों बालू माफियाओं के खतरे से जूझ रही है। हाल ही में वायरल हुए एक वीडियो ने सरकार के नदी संरक्षण के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अवैध खनन से नदी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित

वीडियो में देखा जा सकता है कि जीतन छपरा और मसौढा बालू घाट के पास आधा दर्जन से अधिक पॉकलेन मशीनें नदी की मुख्य धारा में बांध बना रही हैं।

  • खनन अधिनियम 2019 और एनजीटी गाइडलाइन्स के अनुसार, पानी के भीतर बालू निकालना या धारा को रोकना प्रतिबंधित है।
  • बावजूद इसके, मशीनों से बालू का अवैध उत्खनन जारी है।
  • वीडियो में GPS डेटा भी अवैध गतिविधियों की पुष्टि करता है।

[वीडियो देखें: नदी के स्वरूप के साथ खिलवाड़ (Environmental Violation)]

प्रशासन की चुप्पी और माफियाओं की दुस्साहस

  • बालू माफियाओं ने रानीतलाब, धनराज छपरा और शारदा छपरा जैसे क्षेत्रों में रात भर अवैध खनन शुरू कर दिया है।
  • बिना चालान के ट्रक और ट्रैक्टर नेशनल हाईवे से बेखौफ गुजर रहे हैं।
  • तीन खनन निरीक्षक और गठित टास्क फोर्स के बावजूद मशीनें जब्त नहीं की जा रही हैं।

विशेषज्ञ कहते हैं कि यदि पुलिस मुख्य मार्गों पर सघन चेकिंग करे, तो अवैध बालू का बाजार तक पहुंचना लगभग असंभव हो जाएगा।

पुलिस पर फायरिंग और प्रशासन की निष्क्रियता

  • रानीतलाब के शारदा छपरा और धनराज छपरा में पुलिस पर माफियाओं द्वारा फायरिंग की घटनाएं हुईं।
  • प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई।
  • इस अवैध कारोबार ने सरकार के “जीरो टॉलरेंस” के दावों को पूरी तरह खोखला साबित कर दिया है।

सोन नदी के संरक्षण के नाम पर जारी यह लड़ाई सिर्फ पर्यावरण की नहीं, बल्कि प्रशासनिक जिम्मेदारी और कानून के पालन की चुनौती भी है।


 

  • ये भी पढ़े..

    भरत तिवारी एनकाउंटर पर अब आर-पार की लड़ाई! 24 जून को बिलौटी में होगी सर्व समाज महापंचायत, 10 हजार लोगों के जुटने का दावा

    Share Add as a preferred…

    पुलिस एनकाउंटर में मारे गए भरत भूषण तिवारी के परिजनों ने प्रशांत किशोर से लगाई न्याय की गुहार

    Share Add as a preferred…