
HIGHLIGHTS: 4.82 लाख घरों को रौशन करने का लक्ष्य; कुटीर ज्योति उपभोक्ताओं के लिए जीविका दीदियां बनेंगी सारथी, हर जिले में बनेगा ‘मॉडल सोलर विलेज’
- बड़ा फैसला: मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में ‘पीएम सूर्य घर योजना’ की हाई-लेवल समीक्षा बैठक संपन्न; जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को दिए गए सख्त निर्देश।
- बैंकों पर नकेल: 3 किलोवाट से कम के सोलर प्लांट के लिए पैन कार्ड या आय प्रमाण पत्र मांगना बंद करें बैंक; अनावश्यक दस्तावेजों पर लगी रोक।
- सब्सिडी का गणित: 1 किलोवाट पर 30 हजार से लेकर 3 किलोवाट पर अधिकतम 78 हजार रुपये तक की मिलेगी केंद्रीय सहायता।
- ब्याज दर में राहत: उपभोक्ताओं को केवल 6.0% की किफायती ब्याज दर पर उपलब्ध होगा बैंक ऋण।
- कुटीर ज्योति योजना: अगले 4 वर्षों में 58 लाख गरीब परिवारों को सोलर से जोड़ने का लक्ष्य; अक्टूबर 2026 तक 2.5 लाख घरों का आच्छादन तय।
- VOB इनसाइट: बिहार अब ‘मॉडल सोलर विलेज’ के जरिए गांवों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बढ़ा रहा है कदम; हर चयनित गांव को मिलेंगे 1 करोड़ रुपये।
पटना | 25 मार्च, 2026
बिहार की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा दांव खेला है। मंगलवार को मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग में मुख्य सचिव श्री प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में ‘पीएम सूर्य घर योजना’ की गहन समीक्षा की गई। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई इस बैठक में राज्य के सभी डीएम और एसपी को स्पष्ट कर दिया गया है कि योजना के क्रियान्वयन में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार का लक्ष्य वित्तीय वर्ष 2026-27 तक राज्य के 4.82 लाख घरों की छतों पर सोलर पैनल लगा देना है।
बैंकों को ‘अल्टीमेटम’: सरल होगी ऋण प्रक्रिया
बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने बैंक प्रतिनिधियों को आड़े हाथों लेते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि लोन देने की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए। अक्सर देखा जाता है कि छोटे सोलर प्लांट (3 किलोवाट से कम) के लिए भी बैंक पैन कार्ड या आय प्रमाण पत्र जैसे जटिल दस्तावेजों की मांग करते हैं, जिससे उपभोक्ता हतोत्साहित होते हैं।
मुख्य सचिव के प्रमुख निर्देश:
- इंडियन बैंक एसोसिएशन (IBA) द्वारा तय मानकों का ही पालन करें बैंक।
- जिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे ऋण आवेदनों के त्वरित निष्पादन के लिए विशेष कैंप आयोजित करें।
- बैंकों में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी ताकि उपभोक्ताओं की शिकायतों का तुरंत निपटारा हो सके।
सब्सिडी और वित्तीय सहायता का पूरा विवरण
सरकार ने उपभोक्ताओं के लिए सब्सिडी के ढांचे को बेहद आकर्षक रखा है ताकि अधिक से अधिक लोग इस योजना से जुड़ सकें:
- 1 किलोवाट प्लांट: 30,000 रुपये की सब्सिडी।
- 2 किलोवाट प्लांट: 60,000 रुपये की सब्सिडी।
- 3 किलोवाट या अधिक: अधिकतम 78,000 रुपये की सब्सिडी।
इसके अलावा, शेष राशि के लिए बैंकों को केवल 6.0% ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है, जो बाज़ार की अन्य ऋण दरों की तुलना में काफी कम है।
‘जीविका’ और ‘कुटीर ज्योति’: 58 लाख घरों का महा-लक्ष्य
योजना के सामाजिक विस्तार के लिए बिहार सरकार ने ULA (Utility Led Aggregator) मॉडल को अपनाया है। इसके तहत राज्य के 58 लाख कुटीर ज्योति (KJ) उपभोक्ताओं को अगले 4 वर्षों में सोलर सिस्टम से जोड़ा जाएगा।
- जीविका दीदियों की भूमिका: इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए जीविका दीदियों की मदद ली जाएगी, जो घर-घर जाकर आवेदन प्रक्रिया को सुगम बनाएंगी।
- ब्लॉक वार चयन: पहले चरण में प्रत्येक ब्लॉक की 5 पंचायतों का चयन किया गया है, जहाँ शत-प्रतिशत आच्छादन का लक्ष्य रखा गया है।
- समय सीमा: अक्टूबर 2026 तक कम से कम 2.5 लाख रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने की स्वीकृति दी जा चुकी है।
मॉडल सोलर विलेज: एक गांव, एक करोड़ की सहायता
बिहार के हर जिले में एक ‘मॉडल सोलर विलेज’ विकसित किया जाएगा। इसके लिए चयन की प्रक्रिया को मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। चयनित गांव को 1 करोड़ रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता (CFA) प्रदान की जाएगी, जिससे वहां के बुनियादी ढांचे को सौर ऊर्जा आधारित बनाया जा सके। मुख्य सचिव ने शेष 28 जिलों के जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे योग्य गांवों का चयन जल्द से जल्द पूरा कर प्रतियोगिता अवधि शुरू कराएं।
VOB का नजरिया: क्या बिहार बनेगा ‘सौर प्रदेश’?
’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि मुख्य सचिव का बैंकों को दिया गया निर्देश इस योजना की सफलता की असली चाबी है।
- प्रशासनिक सख्ती: प्रत्यय अमृत जैसे कड़क अधिकारी के नेतृत्व में अगर बैंकों और जिला प्रशासन के बीच समन्वय बैठता है, तो बिहार सोलर रूफटॉप के मामले में गुजरात और राजस्थान जैसे राज्यों को पीछे छोड़ सकता है।
- गरीबों को सीधा लाभ: कुटीर ज्योति उपभोक्ताओं को सोलर से जोड़ने का मतलब है कि समाज के अंतिम व्यक्ति का बिजली बिल शून्य के करीब लाना।
- रोजगार की संभावना: 4.82 लाख घरों में इंस्टॉलेशन से राज्य में हजारों ‘सोलर टेक्नीशियन’ और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खुलेंगे।
बिहार सरकार ने मार्च 2027 तक इस योजना को पूर्ण रूप से जमीन पर उतारने का जो संकल्प लिया है, वह राज्य के बिजली संकट और बढ़ते टैरिफ से जनता को बड़ी राहत दे सकता है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ इस योजना की प्रगति और आपके जिले में लगने वाले ‘लोन कैंप’ की हर जानकारी आप तक पहुँचाता रहेगा।


