‘सिल्क सिटी’ के टैक्स राजस्व में गिरावट पर GST विभाग चिंतित! संयुक्त आयुक्त मिनी की व्यापारियों से अपील— “केवल ITC के भरोसे न रहें, नकद टैक्स भी भरें”

HIGHLIGHTS: जिला परिषद सभागार में जीएसटी विभाग और दिग्गज व्यापारियों का महा-मंथन; मार्च 2026 के क्लोजिंग पर विशेष नजर

  • बड़ी बैठक: भागलपुर अंचल-1 के संयुक्त आयुक्त के नेतृत्व में जीएसटी (GST) राजस्व और अनुपालन को लेकर महत्वपूर्ण सेमिनार संपन्न।
  • चिंता का विषय: ऐतिहासिक ‘सिल्क सिटी’ भागलपुर का राज्य के कर राजस्व में योगदान घटा; विभाग ने जताई गहरी चिंता।
  • नकद भुगतान पर जोर: संयुक्त आयुक्त सुश्री मिनी ने करदाताओं से अपील की— मार्च 2026 की देनदारी का कुछ हिस्सा केवल ITC के बजाय नकद (Cash) रूप में जमा करें।
  • पंजीकरण बहाली: रिटर्न न भरने के कारण रद्द हुए जीएसटी नंबरों को फिर से सक्रिय कराने के लिए विभाग ने बढ़ाया सहयोग का हाथ।
  • व्यापारिक एकजुटता: टेक्सटाइल, सिल्क, बुनकर और होजरी एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने राजस्व वृद्धि में पूर्ण सहयोग का दिया आश्वासन।

भागलपुर | 24 मार्च, 2026

​बिहार के आर्थिक स्तंभ और ‘सिल्क सिटी’ के नाम से मशहूर भागलपुर के व्यापारिक भविष्य और सरकारी खजाने को लेकर आज जिला परिषद सभागार में एक बड़ी बैठक हुई। जीएसटी विभाग के अंचल-1 के संयुक्त आयुक्त के तत्वावधान में आयोजित इस सेमिनार में शहर के तमाम बड़े व्यापारिक संगठनों और कर विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की रिपोर्ट के अनुसार, इस बैठक का मुख्य केंद्र भागलपुर के टेक्सटाइल सेक्टर से होने वाली कर आय (Tax Revenue) में आई हालिया गिरावट रही।

राजस्व में गिरावट: सिल्क सिटी की चमक को फिर से जगाने की कवायद

​संयुक्त आयुक्त (राज्य कर) सुश्री मिनी ने अपने संबोधन में एक महत्वपूर्ण डेटा साझा किया। उन्होंने बताया कि भागलपुर ने ऐतिहासिक रूप से बिहार के राजस्व में बड़ी भूमिका निभाई है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यहाँ से आने वाले कर में कमी दर्ज की गई है। उन्होंने टेक्सटाइल और सिल्क सेक्टर के व्यापारियों को याद दिलाया कि इस क्षेत्र में विकास की अपार संभावनाएँ हैं, बशर्ते कर अनुपालन (Compliance) सही ढंग से किया जाए।

​विशेष रूप से उन करदाताओं को सलाह दी गई जो अपनी पूरी टैक्स लायबिलिटी केवल इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के माध्यम से चुकता करते हैं। सुश्री मिनी ने आग्रह किया कि मार्च 2026 की क्लोजिंग को देखते हुए व्यापारी अपने देय कर का कुछ हिस्सा नकद में भी जमा करें, जिससे विभाग और राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले।

VOB डेटा चार्ट: जीएसटी सेमिनार के मुख्य बिंदु और सहभागी

  • आयोजक: संयुक्त आयुक्त, राज्य कर, भागलपुर अंचल–1 (सुश्री मिनी)।
  • मुख्य फोकस: मार्च 2026 के लिए राजस्व वृद्धि और लंबित रिटर्न का निष्पादन।
  • विभाग के अन्य अधिकारी: उप आयुक्त अजय पंडित, सहायक आयुक्त अमित कुमार एवं मयंक प्रकाश।
  • व्यापारिक नेतृत्व: शरद कुमार सालारपुरिया, सुनील बुढ़िया, रामगोपाल पोद्दार, गोविंद अग्रवाल, संजय अग्रवाल, अरुण अग्रवाल (ईस्टर्न चैंबर और टेक्सटाइल मर्चेंट चैंबर)।
  • बुनकर और होजरी प्रतिनिधि: इब्रार अंसारी, जिया-उर-रहमान, मेराजुद्दीन।
  • कर विशेषज्ञ: सीए पुनीत चौधरी, वेदांत एवं अन्य चार्टर्ड अकाउंटेंट व अधिवक्ता।
  • बड़ा फैसला: सकल लाभ (Gross Profit) के अनुपात में नकद टैक्स जमा करने पर व्यापारियों की सहमति।

निलंबित पंजीकरण और रिटर्न: व्यापारियों के लिए राहत का रास्ता

​सेमीनार के दौरान यह बात सामने आई कि भागलपुर के कई व्यापारियों का जीएसटी पंजीकरण केवल समय पर रिटर्न दाखिल न करने के कारण रद्द या निलंबित कर दिया गया है। विभाग ने इस दिशा में नरम रुख अपनाते हुए अपील की है कि ऐसे करदाता अपने लंबित रिटर्न शीघ्र भरें। इससे न केवल उनका व्यापार फिर से कानूनी रूप से सुचारू होगा, बल्कि विभाग को भी राजस्व प्राप्त होगा। चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और वकीलों ने भी विभाग को आश्वस्त किया कि वे व्यापारियों को सही मार्गदर्शन देकर राजस्व बढ़ाने में मदद करेंगे।

VOB का नजरिया: क्या ‘नकद भुगतान’ से सुलझेगी राजस्व की गुत्थी?

​’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि सिल्क सिटी के व्यापारियों और विभाग के बीच यह संवाद भागलपुर की आर्थिक सेहत के लिए बहुत जरूरी है।

  1. ITC बनाम नकद: विभाग का जोर नकद भुगतान पर इसलिए है क्योंकि अत्यधिक ITC का उपयोग कभी-कभी जांच का विषय बन जाता है। नकद भुगतान से करदाता की प्रोफाइल में ‘क्रेडिबिलिटी’ बढ़ती है।
  2. सिल्क सेक्टर की चुनौतियां: राजस्व में गिरावट का एक कारण कच्चा माल और वैश्विक प्रतिस्पर्धा भी है। अगर विभाग व्यापारियों को सुविधाएं देता है, तो निश्चित ही कर की चोरी कम होगी और राजस्व बढ़ेगा।
  3. पारदर्शिता: चैंबर ऑफ कॉमर्स और बुनकर संघों का सहयोग यह दर्शाता है कि व्यापारी वर्ग भी विकास में साझीदार बनना चाहता है।

निष्कर्ष: सुशासन और आर्थिक प्रगति का साझा संकल्प

​सेमिनार का समापन एक सामूहिक प्रतिबद्धता के साथ हुआ, जहाँ व्यापारियों और विभाग ने मिलकर काम करने का संकल्प लिया। मार्च की क्लोजिंग भागलपुर के भविष्य के कर योगदान को तय करेगी। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ उम्मीद करता है कि इस बैठक के बाद भागलपुर फिर से राजस्व के मामले में प्रदेश का सिरमौर बनेगा।

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