बिहार दिवस पर सड़क सुरक्षा पेंटिंग प्रतियोगिता, विजेताओं को हेलमेट देकर किया सम्मानित

पटना, 23 मार्च 2026: राजधानी पटना के गांधी मैदान में बिहार दिवस समारोह के दौरान परिवहन विभाग द्वारा सड़क सुरक्षा को लेकर एक सराहनीय पहल की गई। विभाग के पवेलियन में आयोजित पेंटिंग प्रतियोगिता के जरिए बच्चों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया, जिसमें पहले ही दिन 250 से अधिक बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

यह प्रतियोगिता विशेष रूप से 10 वर्ष तक के बच्चों के लिए आयोजित की गई थी, जिसमें नन्हे प्रतिभागियों ने अपनी रचनात्मकता के माध्यम से सड़क सुरक्षा के महत्वपूर्ण संदेशों को चित्रों में उतारा।

हेलमेट देकर किया गया सम्मानित
प्रतियोगिता के विजेताओं को परिवहन विभाग के अपर सचिव द्वारा हेलमेट प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह पहल न केवल पुरस्कार देने तक सीमित रही, बल्कि बच्चों और उनके अभिभावकों को सड़क सुरक्षा का व्यावहारिक संदेश भी दिया गया।

पेंटिंग्स में दिखी जागरूकता की झलक
बच्चों द्वारा बनाई गई पेंटिंग्स कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहीं। इन चित्रों में हेलमेट पहनने की अनिवार्यता, सीट बेल्ट का उपयोग, ट्रैफिक सिग्नल का पालन, ओवरस्पीडिंग से बचाव और ज़ेब्रा क्रॉसिंग पर पैदल यात्रियों को प्राथमिकता देने जैसे विषयों को प्रभावशाली तरीके से दर्शाया गया।

कई पेंटिंग्स में “हेलमेट है जरूरी”, “धीमी गति, सुरक्षित जीवन” और “नियमों का पालन, जीवन का संरक्षण” जैसे संदेश प्रमुख रूप से उभरकर सामने आए, जिसने लोगों को गहराई से प्रभावित किया।

बच्चों को बनाया जा रहा ‘सुरक्षा दूत’
अपर सचिव कृत्यानंद रंजन ने इस अवसर पर कहा कि बच्चों की ये पेंटिंग्स केवल कला नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने का एक सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि हेलमेट पहनना जीवन की सुरक्षा का सबसे सरल उपाय है और इसे हर व्यक्ति को अपनी आदत में शामिल करना चाहिए।

उन्होंने विजेता बच्चों को हेलमेट प्रदान करते हुए उन्हें “सड़क सुरक्षा दूत” बनने के लिए प्रेरित किया, ताकि वे अपने परिवार और समाज को भी इस दिशा में जागरूक कर सकें।

अभिभावकों ने की पहल की सराहना
कार्यक्रम में उपस्थित अभिभावकों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की प्रतियोगिताएं बच्चों में न केवल जागरूकता बढ़ाती हैं, बल्कि उनमें जिम्मेदारी की भावना भी विकसित करती हैं।

निष्कर्ष
बिहार दिवस के मौके पर आयोजित यह कार्यक्रम यह साबित करता है कि यदि बच्चों को सही दिशा में प्रेरित किया जाए, तो वे समाज में सकारात्मक बदलाव के वाहक बन सकते हैं।

परिवहन विभाग की यह पहल सड़क सुरक्षा के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है, जिसे भविष्य में भी जारी रखने की योजना है।

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