भागलपुर के ‘लाल’ शहीद नीरज कुमार पंचतत्व में विलीन! सबौर की धरती पर उमड़ा जनसैलाब; तिरंगे में लिपटे वीर सपूत को ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ के साथ अंतिम विदाई

HIGHLIGHTS: मिर्जापुर गांव में ‘अमर जवान’ की अंतिम यात्रा; आंसुओं के समंदर में डूबी सिल्क सिटी

  • शहादत को नमन: देश की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वाले भागलपुर के वीर सपूत नीरज कुमार का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुँचा।
  • भावुक विदाई: सबौर थाना और औद्योगिक प्रक्षेत्र (जीरो माइल) पुलिस की मौजूदगी में सेना के जवानों ने दिया ‘गार्ड ऑफ ऑनर’।
  • परिजनों का बुरा हाल: मां गीता देवी बार-बार हुई बेसुध, पत्नी निशा भारती के नहीं थम रहे आंसू; बड़े भाई अंकित यादव ने संभाली जिम्मेदारी।
  • मासूमों का इंतजार: शहीद के दो छोटे बच्चे पिता की शहादत से अनजान, गमगीन माहौल को देख रह गए स्तब्ध।
  • अंतिम गूंज: “भारत माता की जय” और “नीरज कुमार अमर रहें” के नारों से आसमान गुंजायमान; हजारों की भीड़ ने नम आंखों से दी विदाई।

भागलपुर / सबौर | 22 मार्च, 2026

​बिहार की धरती ने एक बार फिर मां भारती की रक्षा के लिए अपना एक और जांबाज बेटा कुर्बान कर दिया है। भागलपुर जिले के सबौर थाना अंतर्गत मिर्जापुर गांव के वीर जवान नीरज कुमार शहीद हो गए। रविवार को जब शहीद का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटकर उनके गांव पहुँचा, तो पूरा इलाका गम और गर्व के एक साथ उमड़ते ज्वार में डूब गया। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, शहीद नीरज की अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब यह बताने के लिए काफी था कि भागलपुर अपने इस सपूत के बलिदान को कभी नहीं भूलेगा।

मिर्जापुर की गलियों में ‘शहादत’ का सन्नाटा और नारों की गूँज

​जैसे ही सेना की फूलों से सजी गाड़ी शहीद नीरज कुमार का पार्थिव शरीर लेकर गांव की सीमा में दाखिल हुई, वहां मौजूद हजारों लोगों का सब्र टूट गया। सड़कों के दोनों ओर खड़े लोग अपने वीर नायक की एक झलक पाने को आतुर थे। “जब तक सूरज चांद रहेगा, नीरज तेरा नाम रहेगा” और “वीर जवान अमर रहे” के नारों से पूरा सबौर इलाका गूँज उठा।

​अंतिम यात्रा के दौरान सबौर थाना और औद्योगिक प्रक्षेत्र (जीरो माइल) पुलिस के जवान सुरक्षा और सम्मान की कमान संभाले हुए साथ चल रहे थे। गांव की हर छत और हर मोड़ पर लोग हाथ जोड़कर अपने शहीद को नमन कर रहे थे।

मां, पत्नी और मासूम बच्चों का करुण क्रंदन

​शहीद के घर का दृश्य इतना हृदयविदारक था कि वहां मौजूद पत्थर दिल इंसान की भी आंखें छलक आईं।

  • मां गीता देवी: अपने लाल के पार्थिव शरीर को देखते ही वे बार-बार बेहोश हो जा रही थीं। जिस बेटे को उन्होंने देश सेवा के लिए भेजा था, उसका तिरंगे में लिपटकर लौटना उनके लिए असहनीय पीड़ा लेकर आया।
  • पत्नी निशा भारती: फौजी की पत्नी होने का गर्व तो चेहरे पर था, लेकिन पति को खोने का दुख आंखों से आंसुओं के रूप में बह रहा था। उनकी चीखों ने पूरे माहौल को और भी गमगीन कर दिया।
  • भाई अंकित यादव: बड़े भाई अंकित यादव ने मुश्किल घड़ी में पूरे परिवार को ढांढस बंधाया, हालांकि उनके खुद के चेहरे पर अपने छोटे भाई को खोने का गम साफ झलक रहा था।
  • मासूम बच्चे: शहीद नीरज के दो छोटे-छोटे बच्चे उस भीड़ और सन्नाटे को देख हैरान थे। उन्हें शायद अभी यह अहसास भी नहीं है कि जो पिता उन्हें खिलौने लाकर देने का वादा कर गए थे, वे अब देश के इतिहास का हिस्सा बन चुके हैं।

बचपन का सपना और ‘गार्ड ऑफ ऑनर’

​गांव के बुजुर्गों ने नम आंखों से याद किया कि नीरज बचपन से ही सेना की वर्दी के प्रति आकर्षित थे। उनका एक ही सपना था—”देश की सेवा करना”। उन्होंने अपनी मेहनत और जज्बे से उस सपने को पूरा किया और अंततः देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दे दिया।

​अंतिम संस्कार के समय सेना के जवानों और बिहार पुलिस ने पूरे राजकीय सम्मान के साथ शहीद को ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया। जवानों ने अपने हथियार झुकाकर शहीद साथी को अंतिम सलामी दी। यह वह पल था जब हर बिहारी का सीना गर्व से चौड़ा हो गया, भले ही आंखें गीली थीं।

VOB का नजरिया: शहादत को सलाम, पर परिवार का क्या?

​’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि शहीद नीरज कुमार जैसे जवान हमारे असली ‘सुपरहीरो’ हैं। आज जब हम बिहार दिवस 2026 मना रहे हैं, तो हमें यह याद रखना चाहिए कि हमारी खुशियां सरहद पर तैनात इन जवानों के बलिदान की बदौलत ही सुरक्षित हैं।

  1. प्रशासनिक जिम्मेदारी: भागलपुर जिला प्रशासन और राज्य सरकार को चाहिए कि शहीद के परिवार को अविलंब घोषित मुआवजा राशि और बच्चों की शिक्षा के लिए विशेष प्रबंध सुनिश्चित करे।
  2. सम्मान की रक्षा: केवल अंतिम विदाई के वक्त भीड़ जुटाना काफी नहीं है, बल्कि शहीद के परिवार के साथ खड़ा रहना ही समाज की असली परीक्षा है।
  3. प्रेरणा: नीरज कुमार की शहादत भागलपुर के युवाओं के लिए देशभक्ति की एक नई मिसाल पेश करती है।

पंचतत्व में विलीन हुए ‘अमर’ नीरज

​नम आंखों और भारी मन के साथ शहीद नीरज कुमार का अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। वे पंचतत्व में विलीन हो गए, लेकिन उनकी बहादुरी की गाथा भागलपुर की हवाओं में हमेशा गूँजती रहेगी। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ इस वीर सपूत की शहादत को कोटि-कोटि नमन करता है और शोकाकुल परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करता है।

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