HIGHLIGHTS: वर्दी की हैवानियत या गलतफहमी का ‘खूनी’ शिकार? फिल्म की मस्ती के बाद अस्पताल का बिस्तर
- बड़ी वारदात: सीतामढ़ी के सुप्पी थाना में हिरासत में लिए गए दो सगे चचेरे भाइयों को पुलिस द्वारा बेरहमी से पीटने का सनसनीखेज मामला।
- फिल्म का ‘खौफनाक’ अंत: ‘धुरंधर 2’ देखकर लौट रहे जयप्रकाश और गोपाल को पुलिस ने रास्ते में ही दबोचा; थाने में पूरी रात दी गई ‘थर्ड डिग्री’।
- गंभीर हालत: पुलिस की पिटाई से दोनों युवक लहूलुहान; फिलहाल सीतामढ़ी सदर अस्पताल में चल रहा है इलाज।
- मुखिया का दावा: ससौला गांव के मुखिया हेमंत मिश्रा ने पुलिस पर लगाया निर्दोषों को प्रताड़ित करने का गंभीर आरोप।
- एक्शन में कप्तान: एसपी अमित रंजन ने मामले को संज्ञान में लेकर सदर एसडीपीओ राजीव कुमार को सौंपी जांच; दोषियों पर लटकी कार्रवाई की तलवार।
सीतामढ़ी / सुप्पी | 22 मार्च, 2026
बिहार के सीतामढ़ी जिले से खाकी वर्दी को शर्मसार करने वाली एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने सुशासन के दावों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सुप्पी थाना क्षेत्र के ससौला गांव के दो भाई, जो शहर में फिल्म ‘धुरंधर 2’ देखकर खुशी-खुशी अपने घर लौट रहे थे, उन्हें क्या पता था कि रास्ते में ‘असली विलेन’ उनका इंतजार कर रहे हैं। पुलिस ने महज एक ‘गलतफहमी’ के आधार पर दोनों को हिरासत में लिया और आरोप है कि पूरी रात थाने के हाजत में उन्हें जानवरों की तरह पीटा गया। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की इस विशेष रिपोर्ट में जानिए कैसे एक फिल्मी शाम ‘थर्ड डिग्री’ के सदमे में बदल गई।
फिल्म ‘धुरंधर 2’ और सुप्पी पुलिस की ‘रफ’ स्क्रिप्ट
जानकारी के अनुसार, ससौला गांव निवासी जयप्रकाश सिंह और उनके चचेरे भाई गोपाल कुमार शनिवार को सीतामढ़ी शहर गए थे। वहां उन्होंने हालिया रिलीज फिल्म ‘धुरंधर 2’ देखी। फिल्म खत्म होने के बाद दोनों बाइक से अपने गांव लौट रहे थे। इसी बीच ससौला चौक के पास पुलिस ने उन्हें रोक लिया।
परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने बिना कुछ पूछे दोनों को गाड़ी में बिठाया और सुप्पी थाने ले गई। वहां रातभर उनके साथ जो हुआ, उसकी निशानियां आज उनके शरीर पर साफ देखी जा सकती हैं। दोनों युवकों की हालत इतनी बिगड़ गई कि उन्हें आनन-फानन में सीतामढ़ी सदर अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
मुखिया की हुंकार: “निर्दोषों का खून बहा रही है पुलिस”
ससौला गांव के मुखिया हेमंत मिश्रा इस घटना के बाद आगबबूला हैं। उन्होंने पुलिसिया कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि दोनों युवक पूरी तरह निर्दोष हैं और उनका किसी भी अपराध से कोई लेना-देना नहीं है। मुखिया ने आरोप लगाया कि पुलिस ने अपनी नाकामी छुपाने के लिए और केवल शक के आधार पर इन मासूमों को हाजत में बंद कर ‘थर्ड डिग्री’ दी। गांव में इस घटना के बाद से पुलिस के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त है और ग्रामीण दोषी पुलिसकर्मियों को सस्पेंड करने की मांग कर रहे हैं।
पुलिस का बचाव: “गलतफहमी में हुई पूछताछ”
मामले के तूल पकड़ने के बाद पुलिस के आला अधिकारी बचाव की मुद्रा में नजर आ रहे हैं। सदर डीएसपी-1 राजीव कुमार ने बताया कि ससौला चौक पर हाल ही में चोरी की एक वारदात हुई थी। पुलिस इसी सिलसिले में एक संदिग्ध की तलाश कर रही थी। उन्होंने स्वीकार किया कि ‘गलतफहमी’ के कारण इन दोनों युवकों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया था। हालांकि, उन्होंने मारपीट के आरोपों पर कहा कि मामले की गहराई से जांच की जा रही है और यदि कोई पुलिसकर्मी दोषी पाया गया, तो उस पर गाज गिरना तय है।
VOB का नजरिया: क्या ‘गलतफहमी’ में हड्डियां तोड़ना जायज है?
’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि पुलिस का यह तर्क कि “गलतफहमी में हिरासत में लिया” गया, किसी भी तरह से मारपीट को सही नहीं ठहराता।
- मानवाधिकार का हनन: पूछताछ के नाम पर किसी को अस्पताल पहुँचा देना सीधे तौर पर मानवाधिकारों का उल्लंघन है। क्या सीतामढ़ी पुलिस के पास ‘सॉफ्ट पुलिसिंग’ का कोई प्रशिक्षण नहीं है?
- फिल्म से डर? युवक फिल्म देखकर लौट रहे थे, यह कोई अपराध नहीं है। लेकिन पुलिस ने जिस तरह से उन्हें ‘सॉफ्ट टारगेट’ बनाया, वह वर्दी के नशे को दर्शाता है।
- SP की जिम्मेदारी: एसपी अमित रंजन ने जांच के आदेश तो दे दिए हैं, लेकिन क्या यह जांच केवल कागजी खानापूर्ति बनकर रह जाएगी? सीतामढ़ी की जनता को जवाब चाहिए कि जयप्रकाश और गोपाल के साथ हुई इस बर्बरता का हिसाब कौन देगा।
निष्कर्ष: इंसाफ की गुहार लगा रहा पीड़ित परिवार
फिलहाल दोनों भाई अस्पताल में जिंदगी और दर्द से जूझ रहे हैं। एसपी ने जांच का जिम्मा सदर एसडीपीओ को सौंपा है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि जब तक मारपीट करने वाले पुलिसकर्मियों पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं होती, उनका आंदोलन थमेगा नहीं। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ इस खबर पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा कि क्या सुशासन की पुलिस अपने ही ‘दाग’ धो पाती है या नहीं।


