16 लाख की शादी, 7 कट्ठा जमीन और फिर ‘मौत’: पटना DM के ड्राइवर की बेटी अर्पणा की भागलपुर में संदिग्ध मौत;पति और सास जेल भेजे गए, पर कई सवाल अब भी अनसुलझे

HIGHLIGHTS: बहादुरपुर दहेज हत्याकांड; बेगूसराय की बेटी ने भागलपुर में तोड़ा दम, ‘जीएन’ नामक शख्स पर भी साजिश का शक

  • दुखद अंत: बेगूसराय की 20 वर्षीय अर्पणा कुमारी की भागलपुर के बहादुरपुर में संदिग्ध मौत।
  • पिता का संघर्ष: पटना डीएम के प्राइवेट ड्राइवर अनिल यादव ने 7 कट्ठा जमीन बेचकर की थी बेटी की शादी।
  • दहेज की मांग: शादी के बाद सोने की चेन, अंगूठी और ‘चार चक्का’ गाड़ी के लिए किया जा रहा था प्रताड़ित।
  • बड़ा विरोधाभास: ससुराल वाले बोले—दुपट्टे से लटकी, पिता बोले—गले पर रस्सी का निशान तक नहीं।
  • एक्शन: जीरोमाइल (औद्योगिक प्रक्षेत्र) पुलिस ने पति सोनू और सास को गिरफ्तार कर भेजा जेल।

भागलपुर | 22 मार्च, 2026

​रिश्तों की कत्लगाह बनते जा रहे समाज में एक और बेटी ‘दहेज की बलि’ चढ़ गई। भागलपुर जिले के औद्योगिक प्रक्षेत्र (जीरोमाइल) थाना अंतर्गत बहादुरपुर में हुई अर्पणा कुमारी (20) की संदिग्ध मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। अर्पणा, जो बेगूसराय के साहेबपुर कमाल की रहने वाली थी और बीए फाइनल की परीक्षा की तैयारी कर रही थी, उसकी लाश उसके ससुराल में संदिग्ध हालत में मिली। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की पड़ताल में इस मौत के पीछे की जो कहानी सामने आई है, वह किसी भी पिता का कलेजा चीर देने वाली है।

7 कट्ठा जमीन और 16 लाख: एक पिता की खून-पसीने की कमाई

​अर्पणा के पिता अनिल यादव पटना में जिलाधिकारी (DM) के प्राइवेट ड्राइवर के रूप में कार्यरत हैं। एक साधारण ड्राइवर होते हुए भी उन्होंने अपनी बेटी के अरमानों को कभी कम नहीं होने दिया। अनिल यादव ने बताया कि 22 नवंबर 2024 को उन्होंने बड़े ही धूमधाम से अर्पणा की शादी सोनू कुमार से की थी। इस शादी के लिए उन्होंने अपने हिस्से की 7 कट्ठा जमीन बेच दी थी और कुल मिलाकर करीब 16 लाख रुपये खर्च किए थे। लेकिन उन्हें क्या पता था कि जिस दामाद को वे अपना सब कुछ सौंप रहे हैं, उसकी नजर उनकी जमीन से मिलने वाले पैसों और ‘चार चक्का’ गाड़ी पर है।

“लाश लेकर भागो यहाँ से”: वो काली रात और ससुराल का खौफनाक चेहरा

​घटना की शुरुआत गुरुवार रात को हुई। अनिल यादव के अनुसार, ससुराल वालों ने उन्हें सीधे फोन करने की जहमत तक नहीं उठाई। उन्होंने पड़ोसी को फोन कर बताया कि ‘लड़की मर गई है’। जब रात 1 बजे अनिल यादव को खबर मिली, तो उन्होंने घबराकर दामाद सोनू को कॉल किया, लेकिन उसने फोन रिसीव नहीं किया।

​आधी रात को ही बदहवास पिता पटना से भागलपुर के लिए निकले और शुक्रवार सुबह 9 बजे बहादुरपुर पहुँचे। अनिल यादव ने बताया, “जब मैं बेटी के ससुराल पहुँचा, तो अर्पणा की लाश बिस्तर पर पड़ी थी। ससुराल वाले कह रहे थे कि उसने पंखे से दुपट्टा बांधकर खुदकुशी की है, लेकिन जब मैंने अपनी बेटी का चेहरा देखा तो उसके गले पर रस्सी या दुपट्टे का कोई निशान ही नहीं था।” सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि दुख जताने के बजाय दामाद और उसके परिजन अनिल यादव पर चिल्ला रहे थे। उनका कहना था, “जो होना था हो गया, अब लाश लेकर यहाँ से भागिए।” ससुराल वालों की यह बेरुखी चीख-चीख कर कह रही थी कि मामला आत्महत्या का नहीं, बल्कि कुछ और है।

दहेज की मांग: “मेरे पास खुद गाड़ी नहीं, तुम्हें कहाँ से दूँ?”

​अनिल यादव ने रोते हुए बताया कि शादी के कुछ समय बाद ही प्रताड़ना का दौर शुरू हो गया था। सोनू और उसके घरवाले सोने की चेन, अंगूठी और एक चार चक्का गाड़ी की मांग कर रहे थे। एक बार जब अर्पणा मायके आई थी, तब अनिल ने दामाद को समझाने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा था, “मेरे पास खुद की गाड़ी नहीं है, मैं तुम्हें कहाँ से दूँ? मेरे पास जो था, मैंने शादी में लगा दिया।” लेकिन लालच की आग शांत नहीं हुई। अर्पणा बीए फाइनल की छात्रा थी और पढ़ना चाहती थी, लेकिन उसका पति उसके साथ अक्सर मारपीट करता था। 12 मार्च को वह हरिद्वार से लौटी थी और 14 मार्च को ससुराल गई थी, जिसके कुछ ही दिनों बाद उसकी मौत की खबर आ गई।

‘जीएन’ का रहस्यमयी किरदार और साजिश की बू

​इस पूरे मामले में अनिल यादव ने एक तीसरे व्यक्ति का नाम लिया है—जीएन। अनिल के मुताबिक, जीएन नाम का एक व्यक्ति इस पूरी घटना का मुख्य सूत्रधार है। सोनू उसी जीएन की गाड़ी चलाता है। पिता का आरोप है कि इस हत्या और साजिश में जीएन का बड़ा हाथ है और पुलिस को इस एंगल से भी जांच करनी चाहिए।

पुलिसिया कार्रवाई: पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

​औद्योगिक प्रक्षेत्र (जीरोमाइल) थाना पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कार्रवाई की है। थानाध्यक्ष ने बताया कि अनिल यादव के लिखित बयान के आधार पर पति, सास और अन्य ससुराल वालों के खिलाफ दहेज हत्या (304B/302 IPC) और साजिश का मामला दर्ज किया गया है।

​पति सोनू और उसकी मां (सास) को गिरफ्तार कर लिया गया है और रविवार को उन्हें कोर्ट में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत (जेल) भेज दिया गया। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही साफ होगा कि अर्पणा की मौत दम घुटने से हुई है या उसे जहर दिया गया है। फॉरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल से कुछ साक्ष्य जुटाए हैं।

VOB का नजरिया: क्या बेटियों की अर्थी पर ही रुकेगा यह लालच?

​’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि अर्पणा की मौत एक बार फिर समाज के उस कुरूप चेहरे को बेनकाब करती है, जहाँ ‘बेटी’ से ज्यादा ‘दहेज’ की कीमत है। एक पिता जो खुद दूसरों की गाड़ियां चलाता है, उसने अपनी पूरी उम्र की कमाई अपनी बेटी के घर को बसाने में लगा दी, लेकिन उसे क्या मिला? अपनी बेटी की लाश और ससुराल वालों की दुत्कार।

​पुलिस ने गिरफ्तारी तो कर ली है, लेकिन क्या अर्पणा को इंसाफ मिलेगा? ‘जीएन’ जैसे पात्रों की जांच होना भी जरूरी है, जो पर्दे के पीछे रहकर ऐसी घटनाओं को हवा देते हैं। भागलपुर की इस बहादुर बेटी के लिए ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ न्याय की मांग करता है।

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