
सबौर के मिर्जापुर गांव में पसरा सन्नाटा: देश के रक्षक की असमय विदाई
बिहार की माटी ने हमेशा से सरहद पर सीना तानकर खड़े होने वाले जांबाज दिए हैं, लेकिन आज भागलपुर जिले का सबौर प्रखंड एक गहरे मातम में डूबा हुआ है। चंदेरी पंचायत के मिर्जापुर गांव के रहने वाले 34 वर्षीय फौजी नीरज कुमार अब हमारे बीच नहीं रहे। शुक्रवार को मध्य प्रदेश के भोपाल में इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।
नीरज कुमार केवल एक सैनिक नहीं थे, बल्कि वे उस गांव की उम्मीद थे, उस परिवार का चिराग थे और दो मासूम बच्चों के सुपरहीरो थे। उनकी मृत्यु की खबर जैसे ही शनिवार को गांव पहुँची, मानो पूरे इलाके की धड़कनें रुक गईं। हर जुबान पर बस एक ही बात थी— “अभी तो उम्र ही क्या थी, देश की सेवा का जज्बा तो अभी परवान चढ़ना बाकी था।”
ऑपरेशन के बाद बिगड़ी स्थिति: क्या थी पूरी घटना?
मिली जानकारी के अनुसार, फौजी नीरज कुमार पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। वे सेना की अपनी यूनिट या अवकाश के दौरान इलाज के लिए भोपाल में भर्ती थे। डॉक्टरों ने उनकी स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एक महत्वपूर्ण सर्जरी (ऑपरेशन) की सलाह दी थी।
परिजनों और ग्रामीणों ने बताया कि शुक्रवार को उनका ऑपरेशन किया गया। शुरुआत में सब कुछ ठीक लग रहा था, लेकिन ऑपरेशन के कुछ ही समय बाद उनकी स्थिति अचानक बिगड़ने लगी। शरीर के अंगों ने साथ देना कम कर दिया और ‘पोस्ट-ऑपरेटिव’ जटिलताओं के कारण उनकी मृत्यु हो गई। 34 साल की उम्र, जो किसी भी इंसान के जीवन का सबसे ऊर्जावान समय होता है, उस उम्र में नीरज का जाना चिकित्सा विज्ञान और नियति के क्रूर खेल जैसा है।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़: पिता की विरासत और बच्चों का भविष्य
नीरज कुमार के परिवार का इतिहास सेवा और सादगी से जुड़ा रहा है। उनके पिता स्व. नागेंद्र यादव भागलपुर कृषि कॉलेज में कार्यरत थे। पिता के निधन के बाद नीरज ने बड़ी मजबूती से परिवार की कमान संभाली थी। आज उनके पीछे उनकी पत्नी और दो छोटे-छोटे बच्चे रह गए हैं।
मिर्जापुर गांव की गलियों में आज रोने की आवाजें गूँज रही हैं। नीरज की पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है, वे बार-बार बेसुध हो रही हैं। सबसे हृदयविदारक दृश्य उन दो मासूम बच्चों का है, जिन्हें शायद यह भी पता नहीं कि जिस पिता के आने पर वे पूरे गांव में खुशियाँ मनाते थे, वे अब कभी लौटकर नहीं आएंगे। गांव के बुजुर्ग कहते हैं कि नीरज जब भी छुट्टी पर आता था, तो घर के काम के साथ-साथ मोहल्ले के युवाओं को सेना में जाने के लिए प्रेरित करता था।
प्रशासनिक मुस्तैदी: तिरंगे में लिपटकर आएगा गांव का लाल
सबौर थानाध्यक्ष सूबेदार पासवान ने इस दुखद घटना की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि पुलिस प्रशासन और स्थानीय अधिकारी परिजनों के निरंतर संपर्क में हैं। थानाध्यक्ष के अनुसार, “फौजी नीरज कुमार की मौत की खबर मिली है, लेकिन अभी तक उनका पार्थिव शरीर गांव नहीं पहुँचा है।”
सैन्य प्रोटोकॉल और कानूनी औपचारिकताओं के कारण पार्थिव शरीर को भोपाल से भागलपुर लाने में समय लग रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि कल यानी रविवार तक नीरज का पार्थिव शरीर मिर्जापुर गांव पहुँचेगा। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि गांव के लाल को पूरे राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी। गांव के युवाओं ने अभी से ही अंतिम शवयात्रा की तैयारियां शुरू कर दी हैं ताकि अपने हीरो को एक यादगार विदाई दे सकें।
VOB नजरिया: एक फौजी की शहादत और समाज का दायित्व
’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि सरहद पर गोली खाकर शहीद होना ही एकमात्र बलिदान नहीं है। एक सैनिक जो अपनी ड्यूटी के दौरान या इलाज के समय अपनी जान गंवाता है, उसका बलिदान भी उतना ही बड़ा है। नीरज कुमार ने अपनी पूरी जवानी देश के नाम कर दी थी।
सबौर का मिर्जापुर गांव आज केवल एक व्यक्ति को नहीं खोया है, बल्कि उसने एक ऐसे प्रेरणास्रोत को खोया है जो आने वाली पीढ़ी को अनुशासन सिखाता था। अब जिम्मेदारी समाज और सरकार की है। स्व. नागेंद्र यादव के इस बेटे ने अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई, अब सरकार को उनके छोटे बच्चों की शिक्षा और पत्नी के सम्मानजनक जीवन के लिए आगे आना होगा। भागलपुर की धरती अपने इस बेटे को हमेशा याद रखेगी।


