पटना, 21 मार्च 2026: बिहार सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को बड़ी राहत देने वाला फैसला लिया है। अब किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद परिजनों को मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए 21 दिन तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा, बल्कि इसे 24 घंटे के भीतर जारी करने की तैयारी की जा रही है। पंचायती राज विभाग इस नई व्यवस्था को जल्द लागू करने की दिशा में काम कर रहा है
क्यों जरूरी था यह बदलाव
अब तक ग्रामीण इलाकों में मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने में औसतन 2 से 3 सप्ताह (करीब 21 दिन) का समय लग जाता था।
इस दौरान लोगों को:
- सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे
- कई बार बिचौलियों का सहारा लेना पड़ता था
- जरूरी काम (जैसे बीमा, बैंक, पेंशन) अटक जाते थे
नई व्यवस्था का उद्देश्य इन सभी समस्याओं को खत्म करना है।
कैसे काम करेगी नई प्रणाली
पंचायती राज विभाग ने पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाने की योजना तैयार की है।
- एक विशेष मोबाइल ऐप विकसित किया जाएगा
- पंचायत स्तर पर ही डेटा अपलोड किया जाएगा
- सत्यापन के बाद 24 घंटे के भीतर प्रमाणपत्र जारी होगा
इससे पूरी प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और आसान हो जाएगी।
वार्ड सदस्यों को मिलेगी अहम भूमिका
नई व्यवस्था में वार्ड सदस्यों की जिम्मेदारी भी तय की गई है।
- वे मृतक की पहचान और सूचना की पुष्टि करेंगे
- इसके लिए उन्हें 2000 रुपये मासिक मानदेय देने का प्रस्ताव है
- प्रत्येक केस पर 100 रुपये अतिरिक्त प्रोत्साहन भी दिया जा सकता है
यदि वार्ड सदस्य उपलब्ध नहीं होंगे, तो अन्य कर्मियों को यह जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
गलत जानकारी रोकने के लिए क्या इंतजाम
सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि प्रक्रिया में किसी तरह की गड़बड़ी न हो।
- मृतक की पहचान के लिए परिवार, पड़ोसी और स्थानीय लोगों से पुष्टि होगी
- सभी डेटा डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेगा
- भविष्य में जरूरत पड़ने पर रिकॉर्ड आसानी से उपलब्ध होगा
‘मोक्षधाम’ योजना से सुधरेंगे श्मशान घाट
पंचायती राज विभाग सिर्फ प्रमाणपत्र प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि बुनियादी ढांचे पर भी काम कर रहा है।
- राज्य के श्मशान घाटों को “मोक्षधाम” के रूप में विकसित किया जाएगा
- प्रत्येक स्थल पर लगभग 19 लाख रुपये खर्च होंगे
- यहां शेड, पेयजल और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी
इससे अंतिम संस्कार के दौरान लोगों को बेहतर सुविधा मिलेगी।
पंचायत भवन होंगे हाईटेक
नई व्यवस्था के तहत पंचायत सरकार भवनों को भी तकनीकी रूप से सशक्त बनाया जाएगा।
- कंप्यूटर आधारित प्रमाणपत्र जारी होंगे
- सभी रिकॉर्ड ऑनलाइन सुरक्षित रहेंगे
- जरूरत पड़ने पर तुरंत डाउनलोड किया जा सकेगा
क्या होगा फायदा
इस फैसले से:
- ग्रामीणों को समय पर सेवा मिलेगी
- भ्रष्टाचार और बिचौलियों पर रोक लगेगी
- सरकारी कामकाज में पारदर्शिता बढ़ेगी
- डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा मिलेगा
निष्कर्ष
बिहार सरकार की यह पहल ग्रामीण प्रशासन को आधुनिक और जन-हितैषी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
यदि यह योजना सफलतापूर्वक लागू होती है, तो न सिर्फ लोगों को बड़ी राहत मिलेगी, बल्कि सरकारी सेवाओं में विश्वास और पारदर्शिता भी बढ़ेगी।


