‘मॉडल’ पर NDA में तकरार: ‘सम्राट मॉडल’ बयान से बढ़ा विवाद, JDU के तीखे जवाब के बाद BJP प्रवक्ता ने पोस्ट हटाया

पटना, 21 मार्च 2026: बिहार की राजनीति में इन दिनों “मॉडल” को लेकर सियासी घमासान छिड़ गया है। एनडीए के भीतर ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल (यू) (JDU) आमने-सामने आ गए हैं। विवाद की शुरुआत भाजपा के एक प्रवक्ता द्वारा दिए गए ‘सम्राट मॉडल’ वाले बयान से हुई, जिस पर जेडीयू ने कड़ी आपत्ति जताई। बढ़ते दबाव के बीच भाजपा प्रवक्ता को अपना सोशल मीडिया पोस्ट हटाना पड़ा।

कैसे शुरू हुआ विवाद

दरअसल, भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट करते हुए दावा किया कि बिहार में गृह मंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में “सम्राट मॉडल” लागू हो रहा है, जिससे अपराध पर तेजी से नियंत्रण पाया जा रहा है।

उन्होंने इस मॉडल की तुलना उत्तर प्रदेश के “योगी मॉडल” से करते हुए कहा कि बिहार में भी अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, एनकाउंटर और बुलडोजर जैसी कार्रवाई देखने को मिल रही है।

JDU ने जताई सख्त नाराजगी

भाजपा के इस बयान पर जेडीयू ने तीखी प्रतिक्रिया दी। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता ने साफ शब्दों में कहा कि बिहार में केवल एक ही मॉडल है और वह है “नीतीश मॉडल”

जेडीयू की ओर से कहा गया कि राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हैं और सरकार उनके नेतृत्व में चल रही है। ऐसे में किसी अन्य “मॉडल” की बात करना न केवल भ्रामक है, बल्कि गठबंधन की मर्यादा के खिलाफ भी है।

उन्होंने यह भी तंज कसा कि अगर हर मंत्री अपना-अपना मॉडल बताने लगे, तो सरकार चलाना मुश्किल हो जाएगा।

NDA में बढ़ी अंदरूनी खटपट

इस बयान के बाद एनडीए के भीतर असहज स्थिति पैदा हो गई। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई कि क्या गठबंधन के भीतर नेतृत्व और नीति को लेकर मतभेद उभर रहे हैं।

जेडीयू के कड़े रुख के बाद भाजपा नेतृत्व भी सतर्क हो गया और मामले को शांत करने की कोशिश शुरू हुई।

दबाव में हटाना पड़ा पोस्ट

सूत्रों के मुताबिक, विवाद बढ़ने के बाद भाजपा नेतृत्व ने संबंधित प्रवक्ता को संयम बरतने और बयान वापस लेने का निर्देश दिया।

इसके बाद प्रवक्ता ने सोशल मीडिया पर किया गया अपना पोस्ट हटा लिया और इस मुद्दे पर आगे टिप्पणी करने से परहेज किया। इसे पार्टी के “डैमेज कंट्रोल” के रूप में देखा जा रहा है।

राजनीतिक मायने

इस पूरे विवाद को आगामी राजनीतिक समीकरणों और नेतृत्व को लेकर चल रही चर्चाओं से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान गठबंधन के भीतर असंतुलन पैदा कर सकते हैं और विपक्ष को भी हमला करने का मौका दे सकते हैं।

निष्कर्ष

‘सम्राट मॉडल’ बनाम ‘नीतीश मॉडल’ की बहस ने यह साफ कर दिया है कि बिहार एनडीए के भीतर सब कुछ सहज नहीं है। हालांकि, फिलहाल भाजपा द्वारा पोस्ट हटाने के बाद विवाद शांत होता नजर आ रहा है, लेकिन इस घटनाक्रम ने गठबंधन की अंदरूनी राजनीति को जरूर उजागर कर दिया है।

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