पटना | 20 मार्च 2026: बिहार के हालिया राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। चनपटिया से कांग्रेस विधायक ने बड़ा आरोप लगाते हुए दावा किया है कि चुनाव के दौरान उन्हें भाजपा की ओर से संपर्क कर ऑफर दिया गया था, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया।
“हमें भी मिला था ऑफर”—अभिषेक रंजन
विधायक अभिषेक रंजन ने कहा कि राज्यसभा की पांचवीं सीट के लिए जैसे ही उम्मीदवार उतारे गए, उसी समय से जोड़-तोड़ की राजनीति शुरू हो गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी विधायकों को प्रभावित करने की कोशिशें की गईं।
उन्होंने कहा, “हमसे भी संपर्क किया गया था और ऑफर दिया गया, लेकिन हमने उसे साफ तौर पर मना कर दिया। यह सिर्फ सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि विचारधारा और संविधान बचाने की लड़ाई है।”
प्रलोभन ठुकराने का दावा
अभिषेक रंजन ने स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी भी तरह के दबाव या प्रलोभन को स्वीकार नहीं किया और महागठबंधन के उम्मीदवार के पक्ष में ही मतदान किया। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी नेतृत्व की ओर से विधायकों को लेकर कोई विशेष निर्देश नहीं था, फिर भी उन्होंने अपनी प्रतिबद्धता निभाई।
वोटिंग में अनुपस्थिति ने बढ़ाए सवाल
राज्यसभा चुनाव के दौरान महागठबंधन को उस समय झटका लगा, जब उसके कुछ विधायक मतदान में शामिल नहीं हुए। बताया जा रहा है कि तीन कांग्रेस और एक राजद विधायक वोटिंग के दिन अनुपस्थित रहे और उनके फोन भी बंद थे।
इस घटनाक्रम ने राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलों को जन्म दिया है। इसे महज संयोग नहीं, बल्कि रणनीति के तहत उठाया गया कदम भी माना जा रहा है।
NDA ने सभी सीटों पर दर्ज की जीत
इस चुनाव में के नेतृत्व वाले NDA गठबंधन ने सभी पांचों सीटों पर जीत हासिल की। इस जीत को विपक्ष के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
“ऑफर” बयान से बढ़ी सियासी गर्मी
अभिषेक रंजन के इस खुलासे के बाद बिहार की राजनीति में हलचल और तेज हो गई है। उनके बयान से हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका को भी बल मिला है, हालांकि उन्होंने किसी खास नेता या विधायक का नाम नहीं लिया।
महागठबंधन में मंथन शुरू
इस पूरे घटनाक्रम के बाद महागठबंधन के भीतर भी मंथन शुरू हो गया है। विधायकों की अनुपस्थिति और चुनावी नतीजों ने गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है और इसके दूरगामी असर भी देखने को मिल सकते हैं।
निष्कर्ष
राज्यसभा चुनाव के बाद सामने आए इस बयान ने बिहार की राजनीति में नए सवाल खड़े कर दिए हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि इन आरोपों पर भाजपा या NDA की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है और क्या यह मामला आगे किसी जांच तक पहुंचता है या नहीं।


