पटना में PNG कनेक्शन पर ब्रेक: पाइपलाइन बिछी, लेकिन NOC अटका तो घरों तक नहीं पहुंची गैस

पटना | 20 मार्च 2026: राजधानी पटना में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) परियोजना का विस्तार कागजी अड़चनों में फंसता नजर आ रहा है। शहर के कई इलाकों में मुख्य गैस पाइपलाइन बिछ चुकी है, लेकिन इसके बावजूद हजारों घरों तक कनेक्शन नहीं पहुंच पा रहा। इसकी सबसे बड़ी वजह नगर निगम से मिलने वाला अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) बताया जा रहा है।

पाइपलाइन पास, फिर भी कनेक्शन नहीं

पटना के कई प्रमुख इलाकों—जैसे रूपसपुर, इंद्रपुरी, राजाबाजार, बेली रोड, पाटलिपुत्रा, खाजपुरा, सगुना मोड़ और शास्त्रीनगर—में मुख्य PNG लाइन पहले ही बिछाई जा चुकी है। इसके बावजूद इन इलाकों की गलियों और मोहल्लों तक पाइपलाइन नहीं पहुंच पाई है, जिससे लोग कनेक्शन के लिए इंतजार कर रहे हैं।

स्थिति यह है कि घरों के पास से पाइपलाइन गुजर रही है, लेकिन अंतिम कनेक्टिविटी नहीं होने के कारण लोग अब भी सिलेंडर पर निर्भर हैं।

NOC बनी सबसे बड़ी बाधा

गैस आपूर्ति करने वाली एजेंसी का कहना है कि उन्होंने कई बार पटना नगर निगम से NOC के लिए आवेदन किया, लेकिन अनुमति नहीं मिलने के कारण आगे का काम अटक गया है।

गलियों में पाइपलाइन बिछाने के लिए सड़कों की खुदाई, ट्रैफिक व्यवस्था और अन्य विभागों की अनुमति जरूरी होती है, जिससे प्रक्रिया जटिल हो जाती है। यही वजह है कि अंतिम चरण का काम शुरू नहीं हो पा रहा।

कुछ इलाकों में ज्यादा परेशानी

नेहरू नगर और पाटलिपुत्रा जैसे इलाकों में यह समस्या ज्यादा गंभीर बताई जा रही है। यहां बड़ी संख्या में लोगों ने PNG कनेक्शन के लिए आवेदन किया है, लेकिन नेटवर्क विस्तार अधूरा होने के कारण उन्हें अभी तक लाभ नहीं मिल सका।

बढ़ती मांग, धीमी आपूर्ति

पटना में रसोई गैस सिलेंडर की अनियमित आपूर्ति के चलते PNG की मांग तेजी से बढ़ रही है। गैस कंपनी के मुताबिक, रोजाना 100 से 150 नए कनेक्शन दिए जा रहे हैं, जबकि आवेदन इससे कई गुना ज्यादा हैं।

फिलहाल शहर में करीब 30 हजार घरेलू उपभोक्ता PNG का उपयोग कर रहे हैं, वहीं लगभग 90 व्यावसायिक संस्थानों तक भी गैस की आपूर्ति हो रही है।

लोगों में नाराजगी

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब मुख्य पाइपलाइन पहले से मौजूद है, तो घरों तक कनेक्शन देने में इतनी देरी समझ से परे है। लोगों का मानना है कि यदि नगर निगम समय पर अनुमति दे, तो हजारों घरों को जल्द राहत मिल सकती है।

पर्यावरण और सुविधा दोनों का सवाल

विशेषज्ञों के अनुसार PNG न सिर्फ सस्ती और सुरक्षित है, बल्कि पर्यावरण के लिहाज से भी बेहतर विकल्प है। ऐसे में इसका विस्तार तेजी से होना जरूरी है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसका लाभ उठा सकें।

निष्कर्ष

पटना में PNG नेटवर्क का ढांचा तैयार होने के बावजूद अंतिम कनेक्टिविटी की कमी योजना की रफ्तार को रोक रही है। अब सबकी नजर नगर निगम और संबंधित विभागों पर है कि वे कब तक NOC जारी कर इस परियोजना को आगे बढ़ाते हैं।

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