
पटना | 20 मार्च 2026: बिहार में हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के अंदर सियासी हलचल तेज हो गई है। पार्टी के विधायक फैजल रहमान द्वारा मतदान से दूरी बनाए रखने के फैसले ने न सिर्फ राजनीतिक समीकरण बिगाड़े हैं, बल्कि पार्टी नेतृत्व को भी असमंजस की स्थिति में डाल दिया है।
सूत्रों के अनुसार, यह मामला केवल पार्टी अनुशासन का नहीं है, बल्कि इससे जुड़ा संवैधानिक गणित भी RJD के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
वोटिंग से दूरी ने बढ़ाई मुश्किल
ढाका से RJD विधायक फैजल रहमान ने राज्यसभा चुनाव में पार्टी उम्मीदवार के पक्ष में मतदान नहीं किया। इसका सीधा असर चुनाव परिणाम पर पड़ा, जहां RJD प्रत्याशी एडी सिंह को अपेक्षित समर्थन नहीं मिल सका।
बताया जा रहा है कि पार्टी के कुछ अन्य विधायकों के साथ-साथ कांग्रेस के भी कुछ विधायक मतदान से अनुपस्थित रहे, जिससे पूरे समीकरण पर असर पड़ा और RJD की रणनीति कमजोर पड़ गई।
कार्रवाई करें तो कुर्सी पर खतरा
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या RJD फैजल रहमान के खिलाफ कार्रवाई करेगा? राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर पार्टी सख्त कदम उठाती है, तो इसका असर सीधे विधानसभा में उसकी संख्या पर पड़ेगा।
243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बने रहने के लिए कम से कम 25 विधायकों का समर्थन जरूरी होता है। ऐसे में यदि किसी विधायक की सदस्यता पर असर पड़ता है या संख्या घटती है, तो तेजस्वी यादव की नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी खतरे में आ सकती है।
यही वजह है कि RJD नेतृत्व फिलहाल बेहद सतर्क रुख अपनाए हुए है।
अंदरखाने बढ़ी चिंता, बाहर NDA पर आरोप
हालांकि, सार्वजनिक तौर पर RJD इस पूरे मामले के लिए NDA को जिम्मेदार ठहरा रहा है और आरोप लगा रहा है कि विपक्ष को कमजोर करने की साजिश रची गई है। लेकिन पार्टी के अंदर स्थिति काफी जटिल बताई जा रही है।
नेतृत्व के सामने दोहरी चुनौती है—एक तरफ पार्टी अनुशासन बनाए रखना, तो दूसरी ओर अपनी राजनीतिक स्थिति को सुरक्षित रखना।
एकजुटता पर उठे सवाल
इस घटनाक्रम के बाद RJD की आंतरिक एकजुटता पर भी सवाल उठने लगे हैं। यदि पार्टी ऐसे मामलों में नरमी बरतती है, तो भविष्य में अन्य विधायक भी इसी तरह के कदम उठा सकते हैं।
वहीं, सख्त कार्रवाई करने से तत्काल राजनीतिक नुकसान होने का खतरा बना हुआ है।
“करें तो मुश्किल, न करें तो भी संकट”
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, तेजस्वी यादव इस समय बेहद नाजुक स्थिति में हैं। अगर वे कार्रवाई करते हैं, तो अपनी कुर्सी खतरे में डाल सकते हैं। और अगर कार्रवाई नहीं करते, तो पार्टी अनुशासन कमजोर पड़ सकता है।
निष्कर्ष
राज्यसभा चुनाव के बाद पैदा हुआ यह विवाद RJD के लिए बड़ी परीक्षा बन गया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि पार्टी नेतृत्व किस तरह इस संतुलन को साधता है—अनुशासन बनाए रखते हुए अपनी राजनीतिक स्थिति को भी सुरक्षित रख पाता है या नहीं।


