HIGHLIGHTS: रसोई से लेकर बेडरूम तक बिजली पर बढ़ा बोझ; इंडक्शन और AC ने बिगाड़ा खेल
- रिकॉर्ड तोड़ डिमांड: मार्च के महीने में ही बिहार की कुल बिजली खपत 4900 मेगावाट तक जा पहुँची है।
- पटना नंबर-1: राजधानी पटना अकेले 600 से 650 मेगावाट बिजली डकार रहा है; जल्द ही 1000 MW पार होने का अनुमान।
- गैस का ‘शॉर्ट सर्किट’: एलपीजी सिलेंडर की किल्लत ने लोगों को इंडक्शन चूल्हों की ओर मोड़ा, जिससे घरेलू लोड में भारी उछाल आया।
- डेडलाइन 31 मार्च: ऊर्जा सचिव का सख्त आदेश— “महीने के अंत तक मेंटेनेंस पूरा करें, गर्मियों में जीरो ट्रिपिंग चाहिए।”
पटना | 20 मार्च, 2026
बिहार में इस बार मार्च का महीना ‘मई’ जैसी तपिश लेकर आया है। लेकिन इस गर्मी ने केवल पसीना ही नहीं निकाला, बल्कि राज्य के बिजली ग्रिडों की भी ‘सांसें’ फुला दी हैं। राज्य में बिजली की मांग ने सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। विडंबना देखिए, एक तरफ आसमान से आग बरस रही है और दूसरी तरफ रसोई गैस (LPG) की कतारों ने लोगों को बिजली के इंडक्शन पर खाना बनाने को मजबूर कर दिया है। परिणाम? बिजली के ट्रांसफार्मर अब ‘ओवरलोड’ होकर कराह रहे हैं।
शहरवार खपत: कहाँ कितनी ‘बिजली’ जल रही?
बिहार के प्रमुख शहरों में बिजली की औसत खपत के ताजा आंकड़े चौंकाने वाले हैं:
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शहर |
वर्तमान खपत (MW) |
पिछले साल (मार्च) |
|---|---|---|
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पटना |
600 – 650 MW |
~500 MW |
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गया |
243 MW |
औसत से अधिक |
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मुजफ्फरपुर |
210 MW |
बढ़त पर |
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पूर्णिया |
128 MW |
सामान्य से ज्यादा |
रसोई गैस संकट: इंडक्शन बना ‘मजबूरी का साथी’
पटना और आसपास के इलाकों में रसोई गैस सिलेंडरों की अनिश्चित आपूर्ति और बढ़ती कीमतों ने एक नया ट्रेंड पैदा कर दिया है। हजारों घरों में अब दाल-चावल ‘इलेक्ट्रिक ओवन’ और ‘इंडक्शन चूल्हों’ पर पक रहे हैं। बिजली कंपनी के विशेषज्ञों का मानना है कि यह ‘अतिरिक्त लोड’ ग्रिड के लिए सबसे बड़ी चुनौती है, क्योंकि यह सीधे तौर पर पीक आवर्स (शाम के समय) में दबाव बढ़ाता है।
मिशन ‘जीरो ट्रिपिंग’: 31 मार्च तक का अल्टीमेटम
ऊर्जा सचिव मनोज कुमार सिंह ने साफ कर दिया है कि अगर गर्मी में बिजली कटी, तो इंजीनियरों की खैर नहीं।
- मेंटेनेंस मोड: पेसू (PESU) की टीमें इस समय ट्रांसमिशन लाइनों और पुराने ट्रांसफार्मरों को बदलने में जुटी हैं।
- वोल्टेज प्रोफाइल: लो-वोल्टेज की समस्या से निपटने के लिए वोल्टेज प्रोफाइल में सुधार के निर्देश दिए गए हैं।
VOB का नजरिया: क्या ‘तारों का जाल’ झेल पाएगा 1000 मेगावाट का वार?
बिहार का बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर सुधरा जरूर है, लेकिन ‘गैस संकट + भीषण गर्मी’ का यह ‘डबल अटैक’ अभूतपूर्व है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि पटना में 1000 मेगावाट की खपत का अनुमान बिजली विभाग के लिए किसी ‘अग्निपरीक्षा’ से कम नहीं होगा।
समस्या केवल बिजली की उपलब्धता की नहीं, बल्कि ‘डिस्ट्रीब्यूशन’ (वितरण) की है। हमारे मोहल्लों के पुराने ट्रांसफार्मर और ढीले तार इतने भारी लोड के लिए शायद ही तैयार हों। अगर 31 मार्च तक मेंटेनेंस में कोताही बरती गई, तो अप्रैल-मई की दोपहर में ‘जीरो ट्रिपिंग’ का दावा सिर्फ कागजी बनकर रह जाएगा। उपभोक्ताओं को भी समझना होगा कि ‘इंडक्शन’ और ‘एसी’ का साथ में इस्तेमाल ‘फ्यूज’ उड़ा सकता है।


