नवादा विधायक विभा देवी के छोटे बेटे की सड़क हादसे में मौत! पेड़ से टकराई बेकाबू कार; राजवल्लभ यादव के घर पसरा मातम

HIGHLIGHTS: राजनीति से दूर ‘पेट्रोल पंप’ के काम में जुटे थे अखिलेश; पटना में इलाज के दौरान तोड़ा दम

  • बड़ा हादसा: जेडीयू विधायक विभा देवी और पूर्व मंत्री राजवल्लभ यादव के छोटे बेटे अखिलेश यादव की कार अनियंत्रित होकर पेड़ से टकराई।
  • इलाज के दौरान मौत: पटना के एक निजी अस्पताल में अखिलेश ने आखिरी सांस ली; परिवार में कोहराम।
  • पैतृक आवास: पार्थिव शरीर को नवादा स्थित उनके पैतृक गांव ‘पथर इंग्लिश’ ले जाया गया, जहाँ समर्थकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है।
  • निजी जीवन: अखिलेश राजनीति से दूर रहकर पेट्रोल पंप का संचालन करते थे; उनके तीन बेटे पटना में ही रहकर पढ़ाई करते हैं।

पटना/नवादा | 20 मार्च, 2026

​बिहार की राजनीति के कद्दावर चेहरे राजवल्लभ यादव और नवादा की जेडीयू विधायक विभा देवी के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उनके छोटे बेटे अखिलेश यादव की एक भीषण सड़क दुर्घटना में मौत हो गई है। यह हादसा तब हुआ जब अखिलेश अपनी कार से कहीं जा रहे थे और अचानक वाहन से नियंत्रण खो देने के कारण गाड़ी पेड़ से जा टकराई। इस खबर ने न केवल नवादा बल्कि पूरे बिहार के राजनीतिक गलियारों को स्तब्ध कर दिया है।

हादसे का मंजर: अस्पताल में भी नहीं बच सकी जान

​घटना के संबंध में मिली जानकारी के अनुसार, अखिलेश यादव खुद अपनी गाड़ी ड्राइव कर रहे थे।

  • टक्कर की तीव्रता: भिड़ंत इतनी जबरदस्त थी कि अखिलेश गंभीर रूप से घायल हो गए।
  • अंतिम क्षण: स्थानीय लोगों और परिजनों की मदद से उन्हें तुरंत पटना के अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।

सादगी भरा जीवन: राजनीति से बनाई थी दूरी

​जहाँ माता-पिता बिहार की सियासत के बड़े केंद्र रहे, वहीं अखिलेश यादव ने खुद को ‘लाइमलाइट’ से दूर रखा था:

  • पेशेवर जीवन: वे एक सफल पेट्रोल पंप संचालक थे और अपना पूरा ध्यान कारोबार और बच्चों की शिक्षा पर केंद्रित रखते थे।
  • मिलनसार स्वभाव: हालांकि वे सक्रिय राजनीति में नहीं थे, लेकिन आम लोगों के बीच अपनी सहजता और शालीनता के लिए जाने जाते थे।

नवादा में शोक: पथर इंग्लिश की ओर उमड़ा जनसैलाब

​अखिलेश के निधन की खबर जैसे ही नवादा पहुंची, पथर इंग्लिश स्थित उनके घर पर समर्थकों और शुभचिंतकों का जुटना शुरू हो गया। पिछले साल ही राजवल्लभ यादव कानूनी मामलों से बरी होकर वापस लौटे थे और 2025 के चुनाव में विभा देवी ने जेडीयू के टिकट पर बड़ी जीत दर्ज की थी। ऐसे समय में जवान बेटे का जाना परिवार के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

VOB का नजरिया: क्या नियति ने छीना परिवार की खुशियों का चिराग?

​किसी भी मां-बाप के लिए जवान बेटे का कंधा देना दुनिया का सबसे भारी बोझ होता है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि विभा देवी और राजवल्लभ यादव के लिए यह समय बहुत कठिन है। एक तरफ सियासी जमीन पर उनकी पकड़ फिर से मजबूत हुई थी, वहीं दूसरी तरफ घर के चिराग का इस तरह बुझ जाना नियति का क्रूर प्रहार है।

​अखिलेश यादव की मौत एक बार फिर सड़क सुरक्षा और ड्राइविंग के दौरान ‘अचानक अनियंत्रित’ होने वाले वाहनों के तकनीकी पहलुओं पर सवाल उठाती है। वह एक शांत व्यक्तित्व थे जिन्होंने कभी सत्ता का अहंकार नहीं दिखाया। उनकी कमी नवादा के स्थानीय सामाजिक ताने-बाने में हमेशा महसूस की जाएगी।

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