सुल्तानगंज के अजगैवीनाथ मंदिर का बदलेगा स्वरूप! एरियल सर्वे से बनी ‘ग्रैंड’ सौंदर्यीकरण की रूपरेखा; सुपर मार्केट और धर्मशाला का भी प्लान

HIGHLIGHTS: सुल्तानगंज को ‘मॉडल टाउन’ बनाने की तैयारी; आसमान से मापी गई विकास की जमीन

  • बड़ा सर्वे: अजगैवीनाथ मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण और विस्तार के लिए गुरुवार को ड्रोन (एरियल) सर्वे पूरा किया गया।
  • तीर्थयात्रियों को तोहफा: नयीसीढ़ी घाट के पास भव्य धर्मशाला बनाने की योजना, ताकि कांवरियों को ठहरने में आसानी हो।
  • स्मार्ट मार्केट: स्थानीय सब्जी बाजार का कायाकल्प कर उसे ‘सुपर मार्केट’ का आधुनिक रूप दिया जाएगा।
  • पानी की किल्लत खत्म: कृष्णानंद स्टेडियम के पास नई जलमीनार के निर्माण के लिए जगह चिह्नित।

सुल्तानगंज | 20 मार्च, 2026

​उत्तर वाहिनी गंगा के तट पर स्थित विश्व प्रसिद्ध अजगैवीनाथ मंदिर अब एक नए और भव्य स्वरूप में नजर आने वाला है। मंदिर के सौंदर्यीकरण, विस्तारीकरण और अत्याधुनिकीकरण को लेकर प्रशासन ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। गुरुवार को सर्वे टीम ने आसमान से (Aerial Survey) पूरे मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों का बारीकी से मुआयना किया, ताकि मास्टर प्लान को अंतिम रूप दिया जा सके।

ड्रोन की नजर से ‘प्रोजेक्ट सुल्तानगंज’ का खाका

​नगर परिषद के सभापति राजकुमार गुड्डू और ईओ कृष्ण भूषण कुमार की मौजूदगी में सर्वे टीम के संजीव कुमार ने एरियल सर्वे की कमान संभाली। इस प्रोजेक्ट के तहत तीन बड़े बदलाव होने जा रहे हैं:

  1. नयीसीढ़ी घाट: यहाँ एक बड़ी धर्मशाला का निर्माण होगा, जिससे श्रावणी मेले के दौरान आने वाले लाखों शिवभक्तों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
  2. सब्जी मंडी का कायाकल्प: शहर के पुराने सब्जी मार्केट को अब ‘सुपर मार्केट’ में तब्दील किया जाएगा, जिससे व्यापारियों और ग्राहकों दोनों को आधुनिक माहौल मिलेगा।
  3. स्टेडियम एरिया: कृष्णानंद स्टेडियम के समीप जलमीनार का निर्माण किया जाएगा, जो क्षेत्र में जलापूर्ति की समस्या का समाधान करेगी।

VOB का नजरिया: क्या ‘आध्यात्मिक पर्यटन’ का नया हब बनेगा सुल्तानगंज?

​सुल्तानगंज केवल एक छोटा शहर नहीं, बल्कि देवघर जाने वाले कांवरियों के लिए ‘प्रवेश द्वार’ है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि अजगैवीनाथ मंदिर का सौंदर्यीकरण दशकों से लंबित मांग थी। एरियल सर्वे के जरिए जो ‘मैपिंग’ की गई है, उससे स्पष्ट है कि प्रशासन अब पैचवर्क (टुकड़ों में काम) के बजाय एक ‘होलिस्टिक’ (समग्र) बदलाव की सोच रहा है।

​सब्जी मंडी को सुपर मार्केट में बदलना शहर की भीड़भाड़ कम करने में मददगार साबित होगा। हालांकि, सबसे बड़ी चुनौती निर्माण की गुणवत्ता और समय सीमा है। अक्सर सरकारी प्रोजेक्ट्स सर्वे के बाद फाइलों में दब जाते हैं, लेकिन जिस तरह से सभापति और ईओ खुद फील्ड में डटे हैं, उससे उम्मीद जगी है कि अगली ‘श्रावणी’ तक सुल्तानगंज का चेहरा बदला-ब बदला नजर आएगा।

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