ईरान-इजरायल तनाव: ट्रंप ने खींची ‘रेड लाइन’, गैस प्लांट हमलों से बढ़ी वैश्विक चिंता

 

मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध के दायरे को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब असहज नजर आ रहे हैं। इसी के चलते उन्होंने पहली बार इजरायल के हमलों पर सीमारेखा तय करने का संकेत दिया है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि इजरायल अब ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड को निशाना नहीं बनाएगा।

साथ ही उन्होंने ईरान को सलाह दी है कि वह युद्ध विराम के लिए अमेरिका की शर्तों पर विचार करे। कतर के रास लाफान गैस प्लांट पर ईरान के जवाबी हमले ने अमेरिका और उसके सहयोगियों की चिंता बढ़ा दी है।

ईरान का बड़ा जवाब: 9 देशों को बनाया निशाना

इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने आक्रामक रुख अपनाते हुए एक साथ 9 देशों को निशाना बनाया। इन हमलों के जरिए ईरान ने युद्ध को एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंचा दिया है।

बताया जा रहा है कि ईरान ने कतर, यूएई, सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन, ओमान, जॉर्डन और इराक पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इनमें से अधिकांश देश वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और मजबूत अर्थव्यवस्थाओं के लिए जाने जाते हैं।

‘ऑपरेशन Madman’ से बढ़ा तनाव

इजरायल के हमलों के जवाब में ईरान ने ‘ऑपरेशन Madman’ शुरू किया। इस ऑपरेशन के तहत खाड़ी क्षेत्र के कई अहम देशों को निशाना बनाया गया।

इन हमलों का असर वैश्विक बाजारों पर भी पड़ा है। भारतीय शेयर बाजार सहित दुनिया के कई प्रमुख बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे निवेशकों में चिंता बढ़ गई है।

गैस और तेल प्लांट बने टकराव का केंद्र

इस संघर्ष की जड़ में ऊर्जा संसाधनों पर हमले हैं। पहले खर्ग द्वीप के तेल प्लांट को निशाना बनाया गया, और अब साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला हुआ।

ईरान ने पहले ही चेतावनी दी थी कि उसके तेल और गैस ठिकानों को निशाना न बनाया जाए। इसके बावजूद हमले होने से ईरान ने कड़ा जवाब दिया।

क्या है ईरान की रणनीति?

विशेषज्ञों के मुताबिक, अरब देशों के तेल और गैस प्लांट्स पर हमला करने के पीछे ईरान की रणनीति अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाना है। ईरान चाहता है कि वैश्विक शक्तियां इजरायल और अमेरिका पर युद्धविराम के लिए दबाव डालें।

 

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