HIGHLIGHTS: आरपीएफ की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’, प्लेटफॉर्म पर मची खलबली
- बड़ी कामयाबी: सीवान रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ (RPF) टास्क टीम ने नाकाम की तस्करी की बड़ी कोशिश।
- बरामदगी: 3.5 किलो हाई-क्वालिटी चरस (7 पैकेट), 4 मोबाइल फोन और ₹10,770 नकद जब्त।
- गिरफ्तारी: अरविंद मिश्रा, अंसार अली और मनोज मुसहर को पुलिस ने घेराबंदी कर पकड़ा।
- सिंडिकेट का भंडाफोड़: बिहार से ट्रेन के जरिए उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद भेजी जा रही थी खेप।
सीवान | 19 मार्च, 2026
सीवान रेलवे स्टेशन पर आज उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब आरपीएफ की विशेष टीम ने प्लेटफॉर्म संख्या 2/3 पर बैठे तीन संदिग्धों को दबोच लिया। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर चल रहे ‘रूटीन चेकिंग’ अभियान के दौरान पुलिस को यह बड़ी सफलता मिली है। नशे के कारोबारियों ने चरस को जूट के थैले और कार्टून बॉक्स में छिपा रखा था, ताकि किसी को शक न हो।
प्लेटफॉर्म पर ‘फिल्मी’ स्टाइल में भागम-भाग
गिरफ्तारी का मंजर किसी फिल्मी सीन से कम नहीं था:
- घेराबंदी: जैसे ही आरपीएफ की टीम निर्माणाधीन ओवरब्रिज के पास पहुंची, तीनों संदिग्ध भागने लगे। लेकिन सतर्क जवानों ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया।
- दंडाधिकारी की मौजूदगी: पूरी कानूनी प्रक्रिया को पुख्ता बनाने के लिए कार्यपालक दंडाधिकारी (Executive Magistrate) को मौके पर बुलाया गया, जिनकी मौजूदगी में तलाशी और जब्ती की गई।
- मुरादाबाद कनेक्शन: पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह खेप मुरादाबाद के नशा बाजार में खपाई जानी थी। गिरफ्तार अरविंद मिश्रा उर्फ छोटे मिश्रा को इस गिरोह का अहम मोहरा माना जा रहा है।
VOB का नजरिया: क्या ‘रेलवे’ बन गया है तस्करों का सेफ रूट?
सीवान स्टेशन पर हुई यह कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन यह इस कड़वी हकीकत को भी उजागर करती है कि तस्कर अब ट्रेनों को ‘ड्रग्स कैरियर’ की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। 3.5 किलो चरस का स्टेशन के प्लेटफॉर्म तक पहुंच जाना सुरक्षा व्यवस्था में एक बड़ा छेद भी है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि GRP और RPF को केवल ‘संदिग्धों’ के भरोसे नहीं, बल्कि ‘इंटेलिजेंस’ और ‘डॉग स्क्वायड’ के जरिए इन सिंडिकेट्स की जड़ तक पहुंचना होगा। मुरादाबाद तक फैला यह जाल बताता है कि बिहार अब केवल खपत का नहीं, बल्कि ‘ट्रांजिट हब’ भी बनता जा रहा है।


