भागलपुर के सैंडिस कंपाउंड में ‘सनातन’ का शंखनाद! विक्रम संवत 2083 का भव्य स्वागत; RSS के 100 साल पर सांस्कृतिक संगम

HIGHLIGHTS: सिल्क सिटी में गूंजी ‘भारतीय नव वर्ष’ की गूंज; लोक कलाओं ने बांधा समां

  • भव्य आगाज: सैंडिस कंपाउंड में भारतीय नव वर्ष विक्रम संवत 2083 की पूर्व संध्या पर आयोजित हुआ सांस्कृतिक महाकुंभ।
  • कला और संस्कृति: कथक केंद्र, कृष्णा क्लब और हिंदी युवा शक्ति के कलाकारों ने भजनों और नृत्य से मोहा मन।
  • विशेष संयोग: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में कार्यक्रम का महत्व हुआ दोगुना।
  • सनातन संदेश: वक्ताओं ने कहा— “भारतीय नव वर्ष केवल तिथि नहीं, हमारी वैश्विक पहचान और सही दिशा है।”

भागलपुर | 19 मार्च, 2026

​भागलपुर का ऐतिहासिक सैंडिस कंपाउंड आज रात दीयों की रोशनी और घुंघरुओं की आवाज से सराबोर रहा। भारतीय नव वर्ष विक्रम संवत 2083 के स्वागत में आयोजित इस सांस्कृतिक संध्या ने शहरवासियों को अपनी जड़ों और गौरवशाली सनातन परंपरा से जोड़ने का काम किया। कार्यक्रम में शिक्षाविदों से लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं तक की मौजूदगी ने इसे एक सामाजिक उत्सव का रूप दे दिया।

“सनातन परंपरा अब वैश्विक स्वीकार्यता की ओर”

​दीप प्रज्वलन के बाद जब गणेश वंदना के साथ कार्यक्रम शुरू हुआ, तो पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। उपस्थित अतिथियों ने समाज को एक कड़ा संदेश दिया:

    1. वैश्विक पहचान: वक्ताओं ने रेखांकित किया कि किस तरह आज पूरी दुनिया भारतीय सनातन परंपराओं और जीवन दर्शन को स्वीकार कर रही है।
    2. RSS @ 100: यह आयोजन इसलिए भी खास रहा क्योंकि यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष (100 साल) के गौरवपूर्ण अवसर पर आयोजित किया गया।

​”भारतीय नव वर्ष केवल कैलेंडर बदलने की प्रक्रिया नहीं है, यह हमारी प्रकृति, हमारे खगोल विज्ञान और हमारी संस्कृति के पुनरुत्थान का उत्सव है।”

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता

 

VOB का नजरिया: क्या ‘आधुनिक’ भागलपुर अपनी ‘जड़ों’ की ओर लौट रहा है?

​सैंडिस कंपाउंड में उमड़ी भारी भीड़ और युवाओं का शास्त्रीय नृत्य (कथक) व भजनों के प्रति उत्साह यह बताता है कि भागलपुर की नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक पहचान को लेकर सजग है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि विक्रम संवत जैसे आयोजनों को केवल ‘धार्मिक’ चश्मे से नहीं, बल्कि एक ‘वैज्ञानिक’ नव वर्ष के रूप में देखा जाना चाहिए जो ऋतु परिवर्तन और प्रकृति के चक्र पर आधारित है। RSS के 100 वर्ष होने के उपलक्ष्य में ऐसे आयोजनों का विस्तार समाज में ‘एकता और समरसता’ का संचार करेगा।

 

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