अब्दुल्ला शहर, यूएई: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने ईद-उल-फितर 2026 के मौके पर बड़ा और चौंकाने वाला फैसला लिया है। बढ़ते क्षेत्रीय तनाव और मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच संभावित युद्ध की स्थिति को देखते हुए, यूएई प्रशासन ने खुले मैदानों और ईदगाहों में नमाज अदा करने पर रोक लगा दी है।
यूएई की ‘इस्लामी मामलों, बंदोबस्ती और जकात की जनरल अथॉरिटी’ ने आधिकारिक घोषणा की है कि इस साल ईद की नमाज केवल मस्जिदों के भीतर ही पढ़ी जाएगी। आमतौर पर हजारों लोग खुले मैदानों में एक साथ नमाज अदा करते थे, लेकिन सुरक्षा कारणों से इस परंपरा में बदलाव किया गया है।
मस्जिदों के लिए नई गाइडलाइंस
- प्रशासन ने नमाजियों से अपील की है कि वे समय से पहले मस्जिदों में पहुंचें।
- भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त इंतजाम किए गए हैं।
- अधिकारियों का कहना है कि अनुशासन बनाए रखना इस बार सबसे बड़ी चुनौती होगी।
- यह फैसला केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखने का प्रयास है।
क्या बदलेगा और क्या नहीं?
- नमाज की जगह बदल दी गई है, लेकिन समय और धार्मिक प्रक्रियाओं में कोई बदलाव नहीं।
- ईद की नमाज सूर्योदय के बाद 5:45 से 6:30 बजे के बीच होगी।
- नमाज के बाद उपदेश (खुत्बा) और सामूहिक दुआएं मस्जिद के भीतर ही संपन्न होंगी।
- परिवारों के लिए यह बदलाव भावुक कर देने वाला हो सकता है, क्योंकि पीढ़ियों से लोग खुले मैदानों में एक साथ नमाज पढ़ने के आदी रहे हैं।
सुरक्षा का कड़ा पहरा
- मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी तनावपूर्ण स्थिति ने दुनिया को चिंता में डाल दिया है।
- यूएई प्रशासन ने ईद समारोह के सुरक्षित और सुचारू आयोजन को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाया है।
- मस्जिदों में नमाज का यह फैसला ‘सेफ्टी प्रोटोकॉल’ का हिस्सा है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
- सरकार का संदेश स्पष्ट है: धार्मिक उत्सव की खुशी के साथ-साथ नागरिकों की सुरक्षा सबसे जरूरी है।


