
HIGHLIGHTS: सिल्क सिटी के विकास में रोड़ा बनने वालों पर ‘जीरो टॉलरेंस’
- बड़ी कार्रवाई: भागलपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के मुख्य महाप्रबंधक (CGM) संदीप कुमार को पद से हटाया गया।
- वजह: भैरवा तालाब, सैंडिस कंपाउंड और रिवर फ्रंट जैसे करोड़ों के प्रोजेक्ट्स में सुस्ती और ढुलमुल रवैया।
- तत्काल प्रभाव: 16 मार्च 2026 से सेवा समाप्त; एमडी सह नगर आयुक्त किसलय कुशवाहा ने जारी किया आदेश।
- हाई-प्रोफाइल जांच: वार्ड पार्षद ने सीजीएम के कार्यकाल की योजनाओं और उनकी व्यक्तिगत संपत्ति की जांच की मांग उठाई।
बर्खास्तगी का ‘फाइल’ रिकॉर्ड: एक नजर में
विवरण | जानकारी |
|---|---|
नाम | संदीप कुमार (पूर्व CGM, भागलपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड) |
आदेश जारीकर्ता | किसलय कुशवाहा (MD सह नगर आयुक्त) |
प्रभावी तिथि | 16 मार्च, 2026 |
मुख्य कारण | कर्तव्यों के प्रति लापरवाही, मेंटेनेंस में विफलता और प्रोजेक्ट्स में देरी। |
ट्रिगर पॉइंट | प्रधान सचिव के साथ हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC)। |
भागलपुर | 19 मार्च, 2026
स्मार्ट सिटी भागलपुर के विकास कार्यों में ‘स्पीड ब्रेकर’ बने अधिकारियों पर अब गाज गिरनी शुरू हो गई है। प्रशासन ने एक कड़ा संदेश देते हुए स्मार्ट सिटी कंपनी के सीजीएम संदीप कुमार को उनके पद से बर्खास्त कर दिया है। शहर के सौंदर्यीकरण और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी महत्वपूर्ण योजनाओं में लगातार मिल रही शिकायतों के बाद यह ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की गई है।
इन 4 वजहों ने छीनी CGM की कुर्सी
विभागीय सूत्रों के अनुसार, संदीप कुमार के खिलाफ शिकायतों का पुलिंदा काफी लंबा था, लेकिन इन मुख्य कारणों ने उनकी विदाई तय कर दी:
- भैरवा तालाब (पहला प्रोजेक्ट): सौंदर्यीकरण का यह पहला प्रोजेक्ट था, लेकिन लंबे समय से इसका काम ठप पड़ा है।
- सैंडिस कंपाउंड & स्मार्ट रोड: विकसित संसाधनों के ऑपरेशन और मेंटेनेंस (O&M) में भारी लापरवाही बरती गई। कमांड सेंटर के कैमरों में भी कमियां पाई गईं।
- करोड़ों का रिवर फ्रंट (एक ‘मजाक’): बरारी और बूढ़ानाथ में बने रिवर फ्रंट साल में 8 महीने पानी से दूर रहते हैं। लोग कीचड़ में नहाने को मजबूर हैं, जो गलत प्लानिंग की पोल खोलता है।
- कारण बताओ नोटिस: प्रशासन ने पहले भी कई बार सुधार का मौका दिया, लेकिन सीजीएम का जवाब कभी संतोषजनक नहीं रहा।
वीसी (VC) खत्म होते ही थमा दिया ‘टर्मिनेशन लेटर’
बुधवार को स्मार्ट सिटी के कार्यों की समीक्षा के लिए प्रधान सचिव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की थी। इस दौरान जब सीजीएम की लापरवाही के मुद्दे उठे, तो प्रधान सचिव ने ऑन-द-स्पॉट उन्हें टर्मिनेट करने का निर्देश दे दिया। वीसी खत्म होने के चंद मिनटों के भीतर ही एमडी ने बर्खास्तगी का पत्र जारी कर दिया।
VOB का नजरिया: क्या केवल ‘बर्खास्तगी’ काफी है?
भागलपुर को ‘स्मार्ट’ बनाने के नाम पर जनता के खून-पसीने की कमाई जिस तरह पानी (और कीचड़) में बहाई गई, उसके लिए केवल एक पद से हटाना पर्याप्त नहीं है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि वार्ड पार्षद संजय कुमार सिन्हा की ‘उच्च स्तरीय जांच’ वाली मांग जायज है। जब रिवर फ्रंट जैसी योजनाएं बिना जमीनी आकलन के बनाई जाती हैं, तो उसमें ‘कमीशन’ की गंध आती है। क्या यह जांच उन इंजीनियरों और ठेकेदारों तक भी पहुंचेगी जिन्होंने रिवर फ्रंट को पानी से 8 महीने दूर रखा? सुशासन का असली अनुभव तभी होगा जब जिम्मेदारी तय हो और वसूली भी की जाए।


