भागलपुर | 18 मार्च 2026
पूर्वी बिहार में न्यायिक सुविधाओं के विस्तार को लेकर भागलपुर में लंबे समय से उठ रही मांग एक बार फिर तेज हो गई है। बुधवार को अधिवक्ताओं के धरना प्रदर्शन के 100 दिन पूरे होने पर आंदोलन को नया बल मिला। कलेक्ट्रेट कार्यालय के पीछे आयोजित इस धरने में बड़ी संख्या में वकील और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
दशकों पुरानी मांग को मिला नया जोर
भागलपुर में उच्च न्यायालय की खंडपीठ (हाईकोर्ट बेंच) या पटना हाईकोर्ट के सर्किट बेंच की स्थापना की मांग कोई नई नहीं है। यह मुद्दा वर्ष 1967 से लगातार उठाया जा रहा है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका है।
धरने के 100 दिन पूरे होने के मौके पर अधिवक्ताओं ने एकजुट होकर सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग दोहराई।
“पूर्वी बिहार के लिए जरूरी है हाईकोर्ट बेंच”
वरिष्ठ अधिवक्ता ओमप्रकाश तिवारी ने कहा कि भागलपुर पूर्वी बिहार का एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक और आर्थिक केंद्र है। यहां हाईकोर्ट बेंच की स्थापना होने से:
- करीब 15 जिलों के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा
- न्यायिक प्रक्रिया अधिक सुलभ और तेज होगी
- लोगों को पटना जाने की मजबूरी खत्म होगी
उन्होंने कहा कि अभी इन जिलों के लोगों को हर छोटे-बड़े मामले के लिए पटना जाना पड़ता है, जिससे समय और पैसे दोनों की भारी बर्बादी होती है।
आंदोलन को मिलेगा व्यापक स्वरूप
अधिवक्ताओं ने संकेत दिया कि अब इस आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। इसके तहत:
- आसपास के जिलों के संगठनों को जोड़ा जाएगा
- जनसमर्थन बढ़ाने के लिए अभियान चलाया जाएगा
- जरूरत पड़ने पर सड़क पर उतरकर आंदोलन तेज किया जाएगा
अधिवक्ताओं का कहना है कि यह सिर्फ वकीलों का नहीं, बल्कि आम जनता के हित से जुड़ा मुद्दा है।
सरकार पर बढ़ा दबाव
ओमप्रकाश तिवारी ने बताया कि यह मामला पहले संसद में भी उठ चुका है, लेकिन उस समय यह कहकर टाल दिया गया कि बिहार सरकार की ओर से प्रस्ताव नहीं आया है।
ऐसे में अब राज्य सरकार से अपेक्षा की जा रही है कि वह इस दिशा में पहल करे और केंद्र के समक्ष प्रस्ताव भेजे।
जनप्रतिनिधियों से भी अपील
धरने के दौरान अधिवक्ताओं ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे इस मुद्दे को विधानसभा और संसद में मजबूती से उठाएं, ताकि भागलपुर में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना का रास्ता साफ हो सके।
लोगों में बढ़ी उम्मीद
लगातार जारी इस आंदोलन और बढ़ते जनसमर्थन को देखते हुए स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि इस बार सरकार इस मांग पर गंभीरता से विचार करेगी और पूर्वी बिहार के लाखों लोगों को न्यायिक सुविधा का लाभ मिल सकेगा।
अगर यह मांग पूरी होती है, तो भागलपुर न केवल न्यायिक दृष्टि से सशक्त होगा, बल्कि पूरे पूर्वी बिहार के विकास को भी नई दिशा मिलेगी।


