बिहार में पोस्टमॉर्टम घोटाले के आरोप: तीन डॉक्टरों को स्वास्थ्य विभाग ने निलंबित किया

बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने जमुई में एक संवेदनशील मामले में तीन चिकित्सा अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई उस घटना के बाद की गई है जिसमें 22 फरवरी 2020 को चकाई थाना क्षेत्र के निवासी सिद्ध कोड़ा (मुंशी दा) पुलिस हिरासत में मृत पाए गए थे।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में गंभीर अनियमितताएं

न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी, जमुई की जांच में पाया गया कि पोस्टमॉर्टम के दौरान डॉक्टरों ने वास्तविक तथ्यों को छुपाया। रिपोर्ट में मृतक के नाक, कान और मुँह से खून निकलने तथा शरीर पर कटे के निशानों का जिक्र नहीं किया गया। इसके अलावा, स्वतंत्र गवाहों के नाम और मृत्यु के कारण स्पष्ट करने वाली जानकारी शामिल नहीं की गई थी।

NHRC के आदेश पर कार्रवाई

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), नई दिल्ली ने 29 अक्टूबर 2025 को स्पष्ट निर्देश दिया था कि दोषपूर्ण पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तैयार करने वाले चिकित्सकों के खिलाफ कड़ी अनुशासनिक कार्रवाई की जाए। स्वास्थ्य विभाग ने इस आदेश के अनुपालन में डॉ. नागेन्द्र कुमार, डॉ. देवेन्द्र कुमार और डॉ. सैयद नौशाद अहमद को निलंबित किया है।

निलंबन के दौरान मुख्यालय पटना

निलंबन की अवधि में इन डॉक्टरों का मुख्यालय स्वास्थ्य विभाग, पटना रहेगा। उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा, लेकिन बिना अनुमति मुख्यालय नहीं छोड़ सकते। साथ ही, आरोपों की विस्तृत जांच के लिए अलग से विभागीय कार्रवाई भी संचालित की जाएगी।

प्रशासनिक अमले में हड़कंप

निलंबन की प्रतियां महालेखाकार, जिला पदाधिकारी जमुई और मुंगेर प्रमंडल के स्वास्थ्य अधिकारियों को भेज दी गई हैं। सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि संवेदनशील मामलों में पारदर्शिता और कर्तव्यपालन की कमी को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


 

  • Related Posts

    गोरखपुर हत्याकांड का खुलासा: भतीजे से रंजिश में पूर्व पार्षद की हत्या, दो आरोपी गिरफ्तार

    Share Add as a preferred…

    Continue reading