HIGHLIGHTS: गायघाट का असिया गांव बना ‘रणक्षेत्र’
- बड़ी वारदात: आधी रात को छापेमारी के दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच भीषण झड़प।
- मौत का मातम: 60 वर्षीय जगतवीर राय की मौत; ग्रामीणों का आरोप— पुलिस की गोली से गई जान।
- वर्दी पर हमला: थानाध्यक्ष राजा सिंह समेत 4 पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल; SKMCH में भर्ती।
- वजह: POCSO कोर्ट के आदेश पर आरोपी भीखारी राय की गिरफ्तारी करने पहुंची थी टीम।
मुजफ्फरपुर | 18 मार्च, 2026
मुजफ्फरपुर जिले के गायघाट थाना क्षेत्र का असिया गांव मंगलवार की देर रात ‘युद्ध के मैदान’ में तब्दील हो गया। जिसे पुलिस एक रुटीन छापेमारी और गिरफ्तारी समझकर गई थी, वह कुछ ही घंटों में एक ऐसी हिंसक झड़प में बदल गई जिसने एक बुजुर्ग की जान ले ली और कई पुलिसकर्मियों को अस्पताल पहुंचा दिया। ग्रामीण एसपी राजेश सिंह प्रभाकर मामले की कमान संभाले हुए हैं और पूरे इलाके में भारी तनाव व्याप्त है।
दो पक्ष: दो अलग कहानियां
1. ग्रामीणों का आरोप: “बिना बताए घर में घुसी पुलिस”
परिजनों का कहना है कि देर रात जब सब सो रहे थे, तभी गायघाट थानाध्यक्ष पुलिसकर्मियों के साथ जबरन घरों में घुस गए।
- बदसलूकी: बिना तलाशी का कारण बताए घर की महिलाओं से गाली-गलौज और धक्का-मुक्की की गई।
- विरोध पर गोली: मृतक जगतवीर राय (60 वर्ष) ने जब आधी रात को बिना वारंट घर में प्रवेश का विरोध किया, तो आरोप है कि पुलिस ने फायरिंग कर दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
2. पुलिस का दावा: “भीड़ ने घेरकर किया जानलेवा हमला”
डीएसपी अलय वत्स ने पुलिस का पक्ष रखते हुए बताया कि टीम केवल कानून का पालन करने गई थी।
- सुनियोजित हमला: जैसे ही पुलिस ने आरोपी भीखारी राय को पकड़ा, अभियुक्त पक्ष ने ग्रामीणों को उकसा दिया।
- पत्थर और लाठी: भीड़ ने पुलिस टीम को घेरकर पत्थरबाजी की और लाठी-डंडों से हमला किया। अपराधियों की ओर से फायरिंग भी की गई।
- आत्मरक्षा: भीड़ में फंसने के बाद अपनी और टीम की जान बचाने के लिए थानाध्यक्ष राजा सिंह ने ‘हवाई फायरिंग’ की।
वारदात का ‘फाइल’ रिकॉर्ड: एक नजर में
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- मृतक का नाम: जगतवीर राय (उम्र 60 वर्ष)।
- मुख्य अभियुक्त (फरार): भीखारी राय (POCSO एक्ट का आरोपी)।
- घायल पुलिसकर्मी: थानाध्यक्ष राजा सिंह और 3 अन्य सिपाही (उपचाररत: SKMCH)।
- जब्ती व कार्रवाई: गांव में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती; उपद्रवियों की पहचान जारी।
- कानूनी आधार: POCSO कोर्ट द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट का अनुपालन।
”पुलिस टीम कोर्ट के आदेश का पालन करने गई थी। वहां पुलिस पर हमला हुआ और फायरिंग भी की गई। आत्मरक्षा में हवाई फायरिंग करनी पड़ी। थानाध्यक्ष समेत हमारे चार जवान घायल हैं। मृतक के मामले में जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि गोली किसकी तरफ से चली।”
— अलय वत्स, डीएसपी, मुजफ्फरपुर
VOB का नजरिया: क्या ‘नाइट रेड’ की रणनीति फेल रही?
मुजफ्फरपुर की यह घटना पुलिस प्रशासन के लिए एक बड़ा सबक है। POCSO जैसे गंभीर मामले में आरोपी की गिरफ्तारी अनिवार्य है, लेकिन ‘आधी रात’ को छापेमारी करने के दौरान ग्रामीणों के आक्रोश का अंदाजा न लगा पाना इंटेलिजेंस की विफलता को दर्शाता है। अगर पुलिस के पास बॉडी वॉर्न कैमरा (BWC) होते, तो आज यह साफ होता कि गोली किसने चलाई। एक बुजुर्ग की मौत ने गांव के गुस्से को भड़का दिया है, जो आने वाले दिनों में पुलिस के लिए कानून-व्यवस्था की बड़ी चुनौती बन सकता है।


