राजस्थान पुलिस ने नवगछिया से 1.88 करोड़ के ‘इनामी ठग’ को किया गिरफ्तार; नौकरी के नाम पर बेरोजगारों को लगाता था चूना

HIGHLIGHTS: करोड़ों की ठगी और अंतर्राज्यीय नेटवर्क का खुलासा

  • बड़ी गिरफ्तारी: राजस्थान पुलिस ने तकनीकी सुरागों के आधार पर नवगछिया से इनामी ठग विजय कुमार सिंह को दबोचा।
  • ठगी का आंकड़ा: सरकारी और प्राइवेट नौकरी दिलाने के नाम पर करीब 1 करोड़ 88 लाख 500 रुपये की चपत।
  • फर्जीवाड़ा: ‘कुमार सानू’ उर्फ ‘दीपक’ बनकर फर्जी कंपनी के जरिए बेरोजगार युवाओं को बनाता था शिकार।
  • छापेमारी: गिरफ्तारी के बाद पुलिस उसे खगड़िया के गोगरी स्थित उसके पैतृक घर (बोरना गांव) ले गई, जहाँ सघन तलाशी ली गई।

भागलपुर/खगड़िया | 18 मार्च, 2026

​बिहार का नवगछिया इलाका आज उस वक्त चर्चा में आ गया जब राजस्थान पुलिस की एक विशेष टीम ने यहां ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ कर एक शातिर ठग को गिरफ्तार किया। गोगरी (खगड़िया) के बोरना गांव का रहने वाला विजय कुमार सिंह लंबे समय से राजस्थान पुलिस की ‘मोस्ट वांटेड’ लिस्ट में था। वह कोई मामूली अपराधी नहीं, बल्कि बेरोजगारों के सपनों को ‘नीलाम’ करने वाला करोड़ों का खिलाड़ी निकला।

📊 ठगी का ‘फाइल’ रिकॉर्ड: एक नजर में

विवरण

जानकारी

आरोपी का नाम

विजय कुमार सिंह (उर्फ कुमार सानू / दीपक)

कुल ठगी की राशि

₹1,88,00,500

ठगी का तरीका

फर्जी कंपनी खोलकर सरकारी/प्राइवेट नौकरी का झांसा।

बरामदगी

मोबाइल फोन, फर्जी दस्तावेज, नकद राशि।

नेटवर्क

कई राज्यों में फैला अंतर्राज्यीय गिरोह।

कैसे पकड़ा गया ‘कुमार सानू’ उर्फ दीपक?

​राजस्थान पुलिस ने इस ऑपरेशन को बेहद गुप्त रखा था:

  1. लोकेशन ट्रेसिंग: तकनीकी अनुसंधान (Technical Intelligence) के जरिए पुलिस को पता चला कि आरोपी नवगछिया में छिपा है।
  2. ज्वाइंट ऑपरेशन: मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे गोगरी थानाध्यक्ष परशुराम सिंह की मौजूदगी में राजस्थान पुलिस आरोपी को अपने साथ लेकर रवाना हुई।
  3. घर पर दबिश: गोगरी के बोरना गांव स्थित उसके घर की भी तलाशी ली गई ताकि ठगी के पैसों या अन्य दस्तावेजों का सुराग मिल सके।

VOB का नजरिया: क्या ‘शॉर्टकट’ की चाहत ठगों को पाल रही है?

​1.88 करोड़ की ठगी यह बताने के लिए काफी है कि बेरोजगारों की मजबूरी का फायदा उठाना कितना बड़ा ‘कारोबार’ बन चुका है। विजय कुमार सिंह जैसे ठग जानते हैं कि आज के दौर में ‘नौकरी’ सबसे बड़ी कमजोरी है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि केवल आरोपी की गिरफ्तारी काफी नहीं है, बल्कि उन फर्जी कंपनियों और बैंक खातों की भी जांच होनी चाहिए जिनके जरिए करोड़ों का लेनदेन हुआ। बेरोजगार युवाओं के लिए भी यह एक सबक है— सरकारी नौकरी कभी भी ‘नगद’ या ‘सांठगांठ’ से नहीं मिलती, विज्ञापन और आधिकारिक पोर्टल ही एकमात्र रास्ता हैं।

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