HIGHLIGHTS
- हृदयविदारक हादसा: बरौनी-कटिहार रेलखंड के बनिया गांव के पास ट्रेन की चपेट में आने से मां-बेटे के चिथड़े उड़े।
- मृतक: कोमल कुमारी (मुकेश पंडित की पत्नी) और उनका एक वर्षीय बेटा मनप्रीत कुमार।
- मजबूरी की राह: घर से ‘बासा’ (खेत) जाने के दौरान रेलवे ट्रैक पार करते समय हुआ हादसा।
- परिवार बिखरा: पति परदेश में मजदूरी करता है; घर में बची 6 महीने की बेटी, जिसके सिर से उठा मां का साया।
नवगछिया/रंगरा | 16 मार्च, 2026
नवगछिया के रंगरा थाना क्षेत्र से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरे इलाके के कलेजे को छलनी कर दिया है। रविवार की शाम, जब सूरज ढल रहा था, तब बनिया गांव के पास रेलवे ट्रैक पर एक हंसता-खेलता परिवार उजड़ गया। एक मां अपने कलेजे के टुकड़े को गोद में लेकर पटरी पार कर रही थी, लेकिन रफ्तार से आती ट्रेन ने उन्हें संभलने का मौका तक नहीं दिया।
एक पल की चूक और सब खत्म: पिलर संख्या 52/22 पर मची चीख-पुकार
रंगरा के बनिया गांव निवासी मुकेश पंडित की पत्नी कोमल कुमारी अपने एक वर्षीय बेटे मनप्रीत को गोद में लेकर रेलवे ट्रैक पार कर रही थी। वे अपने घर से खेत (बासा) की ओर जा रही थीं। इसी दौरान कटिहार की ओर से आ रही एक तेज रफ्तार एक्सप्रेस ट्रेन काल बनकर आई। रेलवे पिलर संख्या 52/22 के पास हुए इस भीषण टक्कर में मां और बेटे, दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।
परदेश में पति, घर में मासूम बेटी: गम में डूबा गांव
यह हादसा केवल दो मौतों की कहानी नहीं है, बल्कि एक बिखरते परिवार की दास्तान है।
- प्रवासी मजबूरी: कोमल का पति मुकेश पंडित दूसरे राज्य में मजदूरी कर परिवार का पेट पालता है। उसे क्या पता था कि घर के पीछे बिछी पटरियां उसकी दुनिया उजाड़ देंगी।
- अनाथ मासूम: मृतका की एक 6 महीने की बेटी भी है, जो उस वक्त घर पर थी। अब उस मासूम के सिर पर न मां का आंचल बचा है और न साथ खेलने वाला भाई। गांव के लोग यह सोचकर फफक रहे हैं कि उस अबोध बच्ची की देखभाल अब कौन करेगा।
पुलिस की कार्रवाई: पोस्टमार्टम के बाद गमगीन माहौल में अंतिम विदाई
घटना की सूचना मिलते ही रंगरा थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर विश्वबंधु पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने क्षत-विक्षत शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद सोमवार को शव परिजनों को सौंप दिए गए। पुलिस अधिकारी ने बताया कि मामला पूरी तरह से दुर्घटना का है, जिसमें ट्रेन की चपेट में आने से मौत हुई है।
VOB का नजरिया: पटरियों पर बिछती ‘लापरवाही’ की लाशें!
नवगछिया की यह घटना हमें फिर से सोचने पर मजबूर करती है कि रेलवे ट्रैक पार करना कितना आत्मघाती हो सकता है। ग्रामीण इलाकों में अक्सर लोग शॉर्टकट के चक्कर में या मजबूरीवश ट्रैक पार करते हैं। लेकिन एक हाथ में मासूम और दूसरे हाथ में घर की जिम्मेदारी लेकर पटरी पार करना ‘मौत को दावत’ देने जैसा है। रेलवे को उन संवेदनशील पॉइंट्स पर फेंसिंग या अंडरपास की व्यवस्था देखनी चाहिए जहाँ घनी आबादी पटरियों के आसपास रहती है। मुकेश जैसे हजारों प्रवासी मजदूर जो बाहर रहकर खून-पसीना एक करते हैं, उनके परिवारों की सुरक्षा के लिए सामाजिक जागरूकता भी जरूरी है।


