गांधी मैदान में ‘इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर’ का जलवा; कृषि निदेशक सौरभ सुमन बोले— “अब मशीनों से बदलेगी किसान की तकदीर”, 25 हजार से ज्यादा लोग पहुंचे

HIGHLIGHTS

  • एग्रो बिहार मेला 2026: 12 से 15 मार्च तक पटना के गांधी मैदान में कृषि क्रांति का संगम; प्रवेश पूरी तरह निःशुल्क।
  • ई-ट्रैक्टर संवाद: डीजल की छुट्टी, अब बिजली से दौड़ेगा खेती का पहिया; लागत कम करने और आय बढ़ाने का मास्टरप्लान।
  • बंपर भीड़: 13 जिलों के किसानों का रेला, 3 दिनों में 25 हजार से अधिक लोगों ने किया भ्रमण।
  • प्रतिभा का सम्मान: हाई-टेक खेती और जल संरक्षण पर पेंटिंग प्रतियोगिता; विजेता छात्रों को मिले नकद पुरस्कार।

पटना | 14 मार्च, 2026

​पटना का ऐतिहासिक गांधी मैदान इन दिनों आधुनिक खेती की प्रयोगशाला बना हुआ है। कृषि विभाग और सीआईआई (CII) के सहयोग से आयोजित ‘एग्रो बिहार मेला’ के तीसरे दिन शनिवार को “इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर संवाद” ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा। खेती में बढ़ती मशीनों की भूमिका और बढ़ती लागत के बीच इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर को भविष्य के ‘गेम-चेंजर’ के रूप में पेश किया गया है।

कृषि निदेशक का विजन: श्रम से मशीन की ओर बढ़ता बिहार

​कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कृषि निदेशक सौरभ सुमन यादव ने कहा कि भारतीय कृषि एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उत्पादकता बढ़ाने और श्रम पर निर्भरता कम करने के लिए मशीनीकरण अनिवार्य है। यादव ने इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर की प्रशंसा करते हुए कहा, “यह न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि डीजल की बढ़ती कीमतों से परेशान किसानों के लिए एक बड़ी राहत है। इससे खेती की लागत घटेगी और सीधे तौर पर किसानों की बचत बढ़ेगी।”

सिर्फ प्रदर्शनी नहीं, पाठशाला भी: सब्सिडी और ट्रेनिंग का मिला लाभ

​मेले में पटना, भागलपुर, बांका और किशनगंज समेत 13 जिलों के 2,395 किसानों ने शनिवार को विशेष रूप से भाग लिया।

  • सब्सिडी की बौछार: किसानों ने बड़े और छोटे कृषि यंत्रों की जमकर खरीदारी की, जिस पर सरकार द्वारा मौके पर ही अनुदान (Subsidy) का लाभ दिया जा रहा है।
  • किसान पाठशाला: कृषि वैज्ञानिकों और विभागीय पदाधिकारियों ने किसानों को आधुनिक तकनीक और विभागीय योजनाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।
  • नुक्कड़ नाटक: मनोरंजन के साथ-साथ सरकारी योजनाओं के प्रचार के लिए नुक्कड़ नाटकों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जा रहा है।

नन्हीं प्रतिभाओं ने कैनवास पर उकेरी ‘हाई-टेक खेती’ की तस्वीर

​मेले के दौरान छात्रों के लिए चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की गई। सीनियर बैच में ‘हाई-टेक एग्रीकल्चर’ विषय पर आर्मी पब्लिक स्कूल की रिया ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। वहीं जूनियर बैच में ‘मृदा एवं जल संरक्षण’ विषय पर डीएवी खगौल की श्रीजा शरण अव्वल रहीं। विजेताओं को नकद राशि (₹2500 तक), मोमेंटो और प्रमाण-पत्र देकर प्रोत्साहित किया गया।

VOB का नजरिया: क्या ‘ई-ट्रैक्टर’ बिहार के खेतों में सफल होगा?

​गांधी मैदान में इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर को लेकर जो उत्साह दिख रहा है, वह शुभ संकेत है। लेकिन सवाल वही है—क्या ग्रामीण बिहार में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर उतना मजबूत है? कृषि निदेशक का यह कहना सही है कि मशीनीकरण से आय बढ़ेगी, लेकिन छोटे किसानों के लिए इन महंगे यंत्रों को खरीदना अब भी एक चुनौती है। सरकार को सब्सिडी के साथ-साथ ‘रेंटल मॉडल’ (किराये पर मशीनरी) को और मजबूत करना होगा। पेंटिंग प्रतियोगिता के जरिए बच्चों को जोड़ना एक स्मार्ट मूव है, क्योंकि कल की ‘स्मार्ट खेती’ इन्हीं के कंधों पर होगी।

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