बिहार में अब ‘मजदूरी’ नहीं, ‘खेती’ से करियर बनाएंगे युवा! पटना में बोले मंत्री रामकृपाल यादव— “कृषि को ग्लैमरस बनाना हमारा लक्ष्य”

HIGHLIGHTS

  • बड़ा आयोजन: पटना की एमिटी यूनिवर्सिटी में “बिहार–झारखंड रीजनल पॉलिसी डायलॉग एंड अवॉर्ड 2026” संपन्न।
  • विकसित भारत @2047: प्रधानमंत्री मोदी के 2047 के लक्ष्य में बिहार की अग्रणी भूमिका और कृषि के योगदान पर मंथन।
  • रिवर्स माइग्रेशन: युवाओं को दूसरे राज्यों में मजदूरी के बजाय घर में ही आधुनिक खेती (फूल, फल, सब्जी) से जोड़ने की अपील।
  • जल-जीवन-हरियाली: राज्यसभा सांसद संजय झा ने सतत कृषि और नीतीश मॉडल की सफलता का रखा पूरा खाका।

पटना | 14 मार्च, 2026

​बिहार और झारखंड के कृषि भविष्य को लेकर शनिवार को राजधानी पटना में एक महत्वपूर्ण वैचारिक महामंथन हुआ। एमिटी यूनिवर्सिटी में आयोजित “बिहार–झारखंड रीजनल पॉलिसी डायलॉग एंड अवॉर्ड 2026” में नीति निर्धारकों, विशेषज्ञों और राजनेताओं ने जलवायु परिवर्तन के दौर में खेती को एक लाभप्रद व्यवसाय बनाने की रणनीति पर चर्चा की। इस कार्यक्रम का आयोजन सस्टेनेबिलिटी मैटर्स, इंडीएग्री और एनजीओ एक्शन द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।

कृषि मंत्री का विजन: “मजदूरी छोड़ो, किसानी को बनाओ करियर”

​मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे बिहार के कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने साफ लहजे में कहा कि कृषि को अब केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि एक आकर्षक करियर बनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक विकसित भारत का सपना देखा है, जिसे बिहार अपनी कृषि शक्ति के दम पर समय से पहले हासिल कर सकता है।” मंत्री ने युवाओं से अपील की कि वे दूसरे राज्यों में जाकर मजदूरी करने के बजाय बिहार में फल, फूल और सब्जी के बढ़ते बाजार का लाभ उठाएं। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के चार कृषि रोडमैप की चर्चा करते हुए कहा कि बिहार अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर आधुनिक तकनीकों को अपना रहा है।

संजय झा का प्रहार: “जलवायु परिवर्तन बड़ी चुनौती, बिहार के पास है समाधान”

​राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा ने जलवायु परिवर्तन को वैश्विक समस्या बताते हुए बिहार के ‘नीतीश मॉडल’ की तारीफ की। उन्होंने कहा कि जब दुनिया सतत कृषि (Sustainable Agriculture) के बारे में सोच ही रही थी, तब साल 2019 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ‘जल-जीवन-हरियाली’ कार्यक्रम शुरू कर दिया था। झा ने उदाहरण दिया कि कैसे गंगा के पानी को गया और नवादा जैसे जल संकट वाले शहरों तक पहुँचाया गया। उन्होंने कहा कि बाढ़ और सुखाड़ के बीच संतुलन बनाना ही बिहार के कृषि विकास की चाबी है।

नाबार्ड और सिडबी का साथ, उत्कृष्ट किसानों का सम्मान

​कार्यक्रम में सस्टेनेबिलिटी मैटर्स के कार्यकारी निदेशक डॉ. नवनीत आनंद ने बढ़ते वैश्विक तापमान के कृषि पर पड़ने वाले असर की चेतावनी दी। वहीं, नाबार्ड, सिडबी और पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को दी जा रही वित्तीय मदद और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी। इस दौरान कृषि क्षेत्र में नया प्रयोग करने वाले किसानों और संस्थाओं को ‘रीजनल पॉलिसी अवार्ड’ से सम्मानित भी किया गया।

VOB का नजरिया

​मंत्री रामकृपाल यादव का यह कहना कि ‘खेती को आकर्षक’ बनाना होगा, आज की सबसे बड़ी जरूरत है। बिहार के युवा केवल इसलिए पलायन नहीं करते कि उनके पास जमीन नहीं है, बल्कि इसलिए करते हैं क्योंकि उन्हें खेती में ‘सम्मान’ और ‘निश्चित आय’ नहीं दिखती। जब तक हम खेती को ‘टेक्नोलॉजी’ और ‘मार्केट’ से नहीं जोड़ेंगे, तब तक नई पीढ़ी का रुझान नहीं बढ़ेगा। गंगा के जल का प्रबंधन और कृषि रोडमैप कागजों पर तो सफल हैं, लेकिन इनका लाभ छोटे और सीमांत किसानों तक पारदर्शी तरीके से पहुँचाना ही ‘विकसित बिहार’ का असली लिटमस टेस्ट होगा।

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