बिहार में खाद की कोई कमी नहीं, कालाबाजारी पर सरकार का बड़ा प्रहार; 208 लाइसेंस रद्द, 29 एफआईआर दर्ज

पटना। बिहार में खरीफ सीजन की तैयारियों के बीच राज्य सरकार ने किसानों को आश्वस्त किया है कि उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर किसी प्रकार की चिंता की आवश्यकता नहीं है। कृषि विभाग का दावा है कि राज्य के सभी जिलों में पर्याप्त मात्रा में खाद का भंडारण किया गया है और किसानों की जरूरतों को पूरा करने के लिए आवश्यक इंतजाम पहले से किए जा चुके हैं। इसके साथ ही सरकार ने उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी और निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर बिक्री करने वालों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाते हुए कड़ी कार्रवाई की है।

कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने गुरुवार को पटना स्थित कृषि विभाग के कार्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान कहा कि सरकार की प्राथमिकता किसानों को समय पर और उचित दर पर उर्वरक उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि राज्य में खाद की आपूर्ति सामान्य है और वर्तमान भंडार किसानों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। साथ ही विभाग लगातार बाजार की निगरानी कर रहा है ताकि किसी भी स्तर पर कृत्रिम संकट पैदा न होने पाए।

जरूरत से अधिक उपलब्ध है उर्वरकों का भंडार

कृषि विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार जून महीने के अंत तक बिहार में यूरिया, डीएपी, एनपीके और एसएसपी उर्वरकों की बड़ी मात्रा की आवश्यकता होगी। विभाग का कहना है कि अनुमानित मांग के मुकाबले वर्तमान में उपलब्ध स्टॉक संतोषजनक स्थिति में है।

जानकारी के मुताबिक 30 जून 2026 तक राज्य को लगभग 2.40 लाख मीट्रिक टन यूरिया, एक लाख मीट्रिक टन डीएपी, 1.25 लाख मीट्रिक टन एनपीके तथा 0.55 लाख मीट्रिक टन एसएसपी की आवश्यकता है। वहीं 3 जून तक उपलब्ध भंडार में 3.76 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 1.54 लाख मीट्रिक टन डीएपी, 2.38 लाख मीट्रिक टन एनपीके और 1.17 लाख मीट्रिक टन एसएसपी शामिल है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि मांग के मुकाबले पर्याप्त मात्रा में खाद राज्य के गोदामों और वितरण केंद्रों में मौजूद है।

अधिकारियों का मानना है कि समय रहते पर्याप्त भंडारण होने से किसानों को खरीफ फसलों की बुआई के दौरान किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। विभाग लगातार विभिन्न कंपनियों और एजेंसियों के माध्यम से आपूर्ति की निगरानी भी कर रहा है।

संतुलित उर्वरक उपयोग पर दिया जा रहा जोर

कृषि विभाग केवल उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के लिए भी प्रेरित कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि कई बार किसान अधिक उत्पादन की उम्मीद में एक ही प्रकार के उर्वरक का अत्यधिक प्रयोग कर देते हैं, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होती है।

इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग द्वारा विभिन्न माध्यमों से जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। किसानों को बताया जा रहा है कि फसल और मिट्टी की जरूरत के अनुसार उर्वरकों का संतुलित उपयोग ही बेहतर उत्पादन और भूमि की उर्वरता बनाए रखने का सबसे प्रभावी तरीका है। कृषि वैज्ञानिकों और विस्तार कर्मियों के माध्यम से गांव स्तर तक जानकारी पहुंचाने की व्यवस्था की गई है।

कालाबाजारी और जमाखोरी के खिलाफ सख्त अभियान

राज्य सरकार ने साफ कर दिया है कि उर्वरकों की कालाबाजारी और जमाखोरी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कृषि विभाग की टीमों द्वारा लगातार उर्वरक दुकानों और गोदामों का निरीक्षण किया जा रहा है। जहां भी अनियमितता की शिकायत मिल रही है, वहां तत्काल जांच और कार्रवाई की जा रही है।

विभागीय आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष 3 जून 2026 तक कुल 29 उर्वरक प्रतिष्ठानों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है। इसके अलावा नियमों का उल्लंघन करने वाले 208 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस भी रद्द कर दिए गए हैं। यह कार्रवाई राज्यभर में चलाए जा रहे विशेष निगरानी अभियान का हिस्सा है।

सरकार का मानना है कि ऐसी कठोर कार्रवाई से न केवल अवैध कारोबार पर अंकुश लगेगा बल्कि किसानों के बीच भी विश्वास बढ़ेगा कि उन्हें उचित मूल्य पर खाद उपलब्ध कराई जा रही है।

उड़नदस्ता दल कर रहा लगातार निगरानी

कृषि विभाग ने मुख्यालय स्तर पर विशेष उड़नदस्ता दल का गठन किया है, जो राज्य के विभिन्न हिस्सों से मिलने वाली शिकायतों की जांच कर रहा है। यह दल अचानक निरीक्षण कर स्टॉक, बिक्री रिकॉर्ड और वितरण व्यवस्था की जांच करता है।

मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि यदि किसी प्रतिष्ठान में स्टॉक छिपाने, अधिक कीमत वसूलने या रिकॉर्ड में गड़बड़ी जैसी शिकायत सामने आती है तो उसके खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि किसानों के हितों से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

पीओएस मशीन और भौतिक स्टॉक का होगा मिलान

समीक्षा बैठक में अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया कि उर्वरक दुकानों पर उपलब्ध स्टॉक का नियमित सत्यापन किया जाए। इसके लिए पीओएस मशीन में दर्ज स्टॉक और वास्तविक भौतिक स्टॉक का मिलान अनिवार्य रूप से किया जाएगा।

सरकार का मानना है कि तकनीकी निगरानी से कालाबाजारी और स्टॉक में हेरफेर जैसी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकता है। यदि किसी दुकान में रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के बीच अंतर पाया जाता है तो संबंधित दुकानदार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

सीमावर्ती जिलों में विशेष चौकसी

नेपाल सीमा से सटे जिलों में उर्वरकों की अवैध तस्करी रोकना भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए कृषि विभाग और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के बीच समन्वय स्थापित किया गया है। सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष निगरानी अभियान चलाया जा रहा है ताकि खाद की अवैध निकासी को रोका जा सके।

अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट स्थित क्षेत्रों में समय-समय पर संयुक्त अभियान चलाए जा रहे हैं और संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

कई जिलों में मिली अनियमितताएं

निरीक्षण अभियान के दौरान कई जिलों में उर्वरक दुकानों में अनियमितताएं सामने आई हैं। पूर्वी चंपारण में 323 दुकानों की जांच की गई, जिनमें 18 दुकानों में गड़बड़ी पाई गई। इस मामले में 8 दुकानदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई, जबकि 5 लाइसेंस रद्द कर दिए गए।

पश्चिम चंपारण में 343 दुकानों के निरीक्षण में 25 दुकानों में अनियमितता मिली। यहां एक प्राथमिकी दर्ज की गई और तीन दुकानों के लाइसेंस रद्द किए गए। वहीं सीतामढ़ी में 590 दुकानों की जांच के दौरान 46 दुकानों में नियमों के उल्लंघन के मामले सामने आए। यहां दो प्राथमिकी दर्ज की गईं और सात लाइसेंस रद्द किए गए।

2,573 दुकानों की जांच में 275 मामलों का खुलासा

सरकार द्वारा सीमावर्ती सात जिलों में चलाए गए विशेष अभियान के दौरान कुल 2,573 उर्वरक दुकानों का निरीक्षण किया गया। जांच के दौरान 275 दुकानों में विभिन्न प्रकार की अनियमितताएं पाई गईं।

इन मामलों में 19 एफआईआर दर्ज की गईं, 123 दुकानों की अनुज्ञप्ति रद्द कर दी गई और 85 दुकानदारों से स्पष्टीकरण मांगा गया। विभाग का कहना है कि जिन मामलों में जवाब संतोषजनक नहीं मिलेगा, वहां आगे भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

किसानों के हित सर्वोच्च प्राथमिकता

कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराना और उन्हें किसी भी प्रकार की परेशानी से बचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ अवैध कारोबार पर भी लगातार नजर रखी जा रही है।

सरकार का संदेश साफ है कि किसानों के अधिकारों से समझौता नहीं किया जाएगा और उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी या अनियमित बिक्री में शामिल किसी भी व्यक्ति या प्रतिष्ठान के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। खरीफ सीजन के दौरान किसानों को निर्बाध रूप से खाद उपलब्ध कराने के लिए विभाग पूरी तरह सक्रिय और सतर्क बना हुआ है।

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