आदिवासियों के लिए ‘स्मार्ट’ गांव का सपना सच! बिहार के 4 जिलों में बन रहे ‘हाईटेक’ केंद्र; बदल जाएगी जनजातीय समाज की तस्वीर

HIGHLIGHTS:

  • न्याय महा-अभियान: ‘PM जनमन’ योजना के तहत बिहार में 7 बहुउद्देशीय केंद्रों का निर्माण युद्ध स्तर पर।
  • फोकस जिले: गया, पूर्णिया, मधेपुरा और किशनगंज में जनजातीय समाज के लिए खड़ी हो रही नई बुनियादी संरचना।
  • बड़ा मकसद: शिक्षा, समाज और सामुदायिक विकास के लिए एक ही छत के नीचे मिलेंगी तमाम सुविधाएं।
  • ग्राउंड रिपोर्ट: गया और पूर्णिया में काम अंतिम चरण में; जल्द होगा उद्घाटन।

पिछड़ों को ‘मुख्यधारा’ से जोड़ने का मास्टर प्लान: कलेक्ट्रेट से लेकर बस्तियों तक हलचल!

पटना: हाशिए पर खड़े जनजातीय समाज को उनका हक और सम्मान दिलाने के लिए बिहार में ‘प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान’ (PM JANMAN) की लहर तेज हो गई है। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग ने राज्य के चार प्रमुख जिलों में 7 बहुउद्देशीय केंद्रों (Multipurpose Centers) के निर्माण की कमान संभाल ली है। ये केंद्र केवल ईंट-पत्थर की इमारतें नहीं, बल्कि आदिवासियों के शैक्षणिक और सामाजिक सशक्तिकरण के ‘पावर हाउस’ बनेंगे।

[VOB प्रोग्रेस कार्ड: कहाँ तक पहुँचा काम?]

​प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत को इस टेबल के जरिए आसानी से समझा जा सकता है:

जिला

स्थान

वर्तमान स्थिति (Status)

गया

डुमरी और नागोवर

छत (Roof Slab) की ढलाई का काम पूरा।

गया

मोरनिया

फाउंडेशन से ऊपर का निर्माण शुरू।

पूर्णिया

मखनाहा

लिंटर स्तर से ऊपर का काम संपन्न।

पूर्णिया

हरिपुर मादी

लिंटर स्तर तक का निर्माण पूर्ण।

किशनगंज

ढेकीपारा

दीवारें तैयार, अब छत की बारी।

मधेपुरा

टिकुलिया-बिशनपुर

भूमि का सीमांकन (Demarcation) पूरा।

क्यों खास हैं ये बहुउद्देशीय केंद्र?

​ये केंद्र जनजातीय समुदायों के लिए किसी ‘वरदान’ से कम नहीं होंगे। यहाँ मुख्य रूप से तीन स्तरों पर काम होगा:

  1. शैक्षणिक विकास: बच्चों के लिए कोचिंग और ट्रेनिंग प्रोग्राम।
  2. सामुदायिक गतिविधियाँ: गांव की बैठकें और सांस्कृतिक आयोजन।
  3. स्किल ट्रेनिंग: स्थानीय युवाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण देने के लिए बुनियादी ढांचा।

“जल्द सौंपेंगे जनता को”: विभाग का संकल्प

​विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, गया और पूर्णिया में निर्माण की गति सबसे तेज है। सरकार का लक्ष्य है कि मानसून से पहले इन ढांचों को पूरी तरह तैयार कर लिया जाए ताकि जनजातीय समुदायों को लंबी दूरी तय न करनी पड़े और उनके अपने इलाके में ही सरकारी योजनाओं का लाभ और बैठने की जगह मिल सके।

VOB का नजरिया: क्या ईंट-पत्थर बदलेंगे तकदीर?

‘PM जनमन’ योजना के तहत बन रहे ये केंद्र निस्संदेह सराहनीय कदम हैं। गया से लेकर किशनगंज तक निर्माण की रफ्तार बताती है कि प्रशासन इस बार गंभीर है। लेकिन असली चुनौती इन इमारतों को खड़ा करने के बाद शुरू होगी—क्या इनमें समय पर ट्रेनर पहुँचेंगे? क्या यहाँ वाकई शैक्षणिक गतिविधियां होंगी? बुनियादी ढांचा तो बन रहा है, अब जरूरत है इसमें ‘सजीव’ बदलाव की, ताकि समाज के आखिरी पायदान पर खड़ा व्यक्ति भी महसूस करे कि ‘न्याय’ उसके दरवाजे तक आया है।

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