HIGHLIGHTS:
- बड़ी राहत: तकनीकी दिक्कतों के बाद इंडियन ऑयल (IOCL) ने OTP की अनिवार्यता हटाई; अब ऑफलाइन भी मिलेगी गैस।
- ग्राउंड रिपोर्ट: पटना की एजेंसियों पर 7 से 10 दिन का बैकलॉग; घरेलू सप्लाई ‘नॉर्मल’ पर कमर्शियल में किल्लत।
- विकल्प: गैस नहीं तो कोयला और चारकोल सही! बड़े होटलों में पुराने दौर की वापसी, इंडक्शन का भी बढ़ा सहारा।
- शक्ति: विकास आयुक्त का आदेश— कालाबाजारी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा; चप्पे-चप्पे पर पुलिस की नजर।
रसोई की आग बुझाने के लिए सरकार का ‘OTP’ कार्ड!
पटना: बिहार में पिछले एक हफ्ते से रसोई गैस की किल्लत ने आम आदमी की थाली का स्वाद बिगाड़ रखा है। जनता की बढ़ती नाराजगी और सड़कों पर होते विरोध-प्रदर्शनों के बीच सरकार ने एक बड़ा ‘रिलीफ’ दिया है। इंडियन ऑयल ने तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए OTP आधारित डिलीवरी सिस्टम को फिलहाल सस्पेंड कर दिया है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब आपको मोबाइल पर मैसेज आने का इंतजार नहीं करना होगा—बुकिंग अब ऑफलाइन भी हो सकेगी और डिलीवरी भी आसान होगी।
होटल और रेस्टोरेंट में फिर लौटा ‘कोयला-युग’
कमर्शियल गैस सिलेंडर की भारी किल्लत ने छोटे कारोबारियों और बड़े होटलों की कमर तोड़ दी है।
- छोटे दुकानदार: ठेला लगाने वाले और छोटे रेस्टोरेंट मालिक सबसे ज्यादा परेशान हैं।
- विकल्प: अब मजबूरी में इंडक्शन चूल्हा, हीटर, कोयला और चारकोल का इस्तेमाल किया जा रहा है। पटना के बड़े होटलों के किचन में अब गैस की जगह कोयले की धुआं देखी जा रही है।
एजेंसियों पर संग्राम: पुलिस को संभालना पड़ रहा मोर्चा
पटना के शिवपुरी और पटेल नगर जैसे इलाकों में स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। कई दिनों से बुकिंग कराकर बैठे ग्राहकों का सब्र अब जवाब दे रहा है।
”गैस वेंडर सुरक्षा की मांग कर रहे हैं! ग्राहकों का गुस्सा इतना है कि वेंडरों के साथ मारपीट और नोकझोंक आम बात हो गई है।” — एजेंसी संचालक
[VOB इन्फो-ग्राफिक्स: प्रशासन का ‘कमांड’ सेंटर]
विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह के 3 कड़े निर्देश:
- Zero Tolerance: अवैध भंडारण और कालाबाजारी पर तुरंत FIR।
- Surprise Inspection: गैस गोदामों की नियमित और औचक जांच।
- Public Grievance: उपभोक्ताओं की शिकायतों के लिए हर जिले में हेल्पलाइन और कंट्रोल रूम।
VOB का नजरिया: OTP हटाना मरहम है, इलाज नहीं!
सरकार ने OTP हटाकर डिलीवरी की प्रक्रिया को तो सरल कर दिया है, लेकिन असली समस्या ‘सप्लाई की कमी’ है। जब तक 3 गाड़ी की जरूरत पर 1 गाड़ी भेजी जाएगी, तब तक बैकलॉग कम नहीं होगा। प्रशासन को चाहिए कि वह कागजी समीक्षा बैठकों से निकलकर उन गोदामों तक पहुंचे जहां से सिलेंडर ‘गायब’ होकर ब्लैक मार्केट में जा रहे हैं। वरना, चूल्हे की यह आग कहीं चुनावी गलियारों तक न पहुँच जाए।


