HIGHLIGHTS:
- बड़ी त्रासदी: गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय (GNSU) के लॉ कॉलेज हॉस्टल में छात्रा ने की खुदकुशी।
- पहचान: प्रियंका (कैमूर निवासी), लॉ 5वें सेमेस्टर की होनहार छात्रा थी।
- मिस्ट्री: 1 महीने पहले हुई थी सगाई; पुलिस के मुताबिक तभी से तनाव में थी प्रियंका।
- एक्शन: कमरे का ताला तोड़ पुलिस ने निकाला शव; फॉरेंसिक टीम कर रही है जांच।
कैंपस में चीख-पुकार: जब सहपाठियों ने खिड़की से देखा खौफनाक मंजर
रोहतास: शिक्षा के मंदिर में आज एक ऐसी घटना घटी जिसने हर किसी को सन्न कर दिया। डेहरी मुफस्सिल थाना क्षेत्र के जमुहार स्थित GNSU लॉ कॉलेज की एक छात्रा ने गुरुवार को अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। प्रियंका, जो वकालत की बारीकियां सीखकर दूसरों को न्याय दिलाने का सपना देख रही थी, आज खुद हार गई। जब दोपहर में उसकी सहेलियां क्लास से लौटीं, तो दरवाजा अंदर से बंद था। काफी देर तक आवाज देने के बाद जब उन्होंने खिड़की से झांका, तो प्रियंका का शव पंखे से लटका मिला।
[प्रोफाइल: कौन थी प्रियंका?]
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विवरण |
जानकारी |
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नाम |
प्रियंका कुमारी |
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कोर्स/सेमेस्टर |
एलएलबी (LLB), 5वां सेमेस्टर |
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निवास |
बेरी पेरियार गांव, चांद (कैमूर) |
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हादसे का स्थान |
GNSU हॉस्टल, जमुहार (रोहतास) |
सगाई और तनाव: क्या शादी का दबाव बना काल?
डेहरी मुफस्सिल थानाध्यक्ष नितेश कुमार के मुताबिक, शुरुआती जांच में एक चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। बताया जा रहा है कि प्रियंका की सगाई करीब एक महीने पहले हुई थी। सगाई के बाद से ही वह काफी चुपचाप और मानसिक तनाव में रहने लगी थी। क्या वह इस सगाई से खुश नहीं थी? या करियर और शादी के बीच का द्वंद्व भारी पड़ गया? पुलिस इन सभी पहलुओं की बारीकी से जांच कर रही है।
जांच का घेरा: सुसाइड नोट और फॉरेंसिक सबूत
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- ताला तोड़कर कार्रवाई: पुलिस ने यूनिवर्सिटी प्रशासन की मौजूदगी में कमरे का ताला तोड़ा और शव को नीचे उतारा।
- सुसाइड नोट: कैंपस में एक सुसाइड नोट मिलने की चर्चा जोरों पर है, हालांकि पुलिस ने अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
- तकनीकी साक्ष्य: फॉरेंसिक टीम और रौशन कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम मोबाइल रिकॉर्ड्स और कमरे से मिले सामानों की जांच कर रही है। परिजनों के पहुँचने के बाद उनके बयान ही असली वजह साफ कर पाएंगे।
VOB का नजरिया: करियर और सपनों पर ‘सगाई’ का बोझ क्यों?
एक होनहार लॉ स्टूडेंट का इस तरह चले जाना समाज और व्यवस्था दोनों पर सवाल है। अक्सर ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाली छात्राओं पर पढ़ाई के दौरान ही शादी या सगाई का दबाव बना दिया जाता है। अगर पुलिस का ‘तनाव’ वाला दावा सही है, तो यह सोचने वाली बात है कि एक मेधावी छात्रा ने अपने भविष्य की जगह मौत को क्यों चुना? युवाओं को समझना होगा कि कोई भी रिश्ता या समझौता जिंदगी से बढ़कर नहीं होता।


