पटना में ‘किराए’ पर बैंक खाता! दवा व्यापारी ने ठगों के लिए खोला फर्म का करंट अकाउंट; 6 दिन में 81 लाख का खेल और 16 लाख का कमीशन

HIGHLIGHTS:

  • गिरफ्तारी: कंकड़बाग के दवा व्यापारी अनिल कुमार को पटना साइबर पुलिस ने दबोचा।
  • बड़ा लालच: ₹81 लाख के संदिग्ध ट्रांजैक्शन पर व्यापारी को मिला ₹16.20 लाख का मोटा कमीशन।
  • नेशनल कनेक्शन: दिल्ली और हरियाणा समेत 4 राज्यों की पुलिस को थी इस खाते की तलाश।

केमिस्ट या ‘कमीशन एजेंट’? दवा की आड़ में साइबर ठगी का ‘हब’

पटना: राजधानी पटना में साइबर पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो बिना किसी हथियार के, केवल बैंक खातों के जरिए देश भर में लूट मचा रहा था। इस बार पुलिस के हत्थे चढ़ा है कंकड़बाग का एक नामचीन दवा व्यापारी अनिल कुमार। अनिल ने अपनी व्यापारिक फर्म के नाम पर एक ‘करेंट अकाउंट’ खुलवाया था, लेकिन उसका मकसद दवा का व्यापार नहीं, बल्कि साइबर ठगों की ‘काली कमाई’ को सफेद करना था। उसने अपना यह खाता साइबर अपराधियों को किराए पर दे दिया था, जिसके बदले उसे लाखों का कमीशन मिल रहा था।

6 दिन में 81 लाख: रफ्तार देख पुलिस के भी उड़े होश

​साइबर थाना अध्यक्ष सह डीएसपी नीतिश चंद्र धारिया के मुताबिक, जब केंद्रीय जांच एजेंसियों से मिले इनपुट के आधार पर अनिल के खाते की जांच की गई, तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए:

  • ट्रांजैक्शन: महज 6 दिनों के भीतर इस खाते से ₹81 लाख का संदिग्ध लेनदेन हुआ।
  • कमीशन का खेल: इस अवैध काम के बदले अनिल को ₹16 लाख 20 हजार का कमीशन मिला। यानी करीब 20% का सीधा मुनाफा, वो भी बिना किसी मेहनत के।

4 राज्यों की FIR और एक ‘किराए’ का खाता

​अनिल का यह बैंक खाता केवल पटना पुलिस के लिए ही नहीं, बल्कि देश की कई सुरक्षा एजेंसियों के लिए सिरदर्द बना हुआ था। जांच में पता चला कि इस खाते के खिलाफ दिल्ली और हरियाणा समेत चार अलग-अलग राज्यों में साइबर ठगी की शिकायतें पहले से दर्ज थीं। ठग देशभर के लोगों को चूना लगाकर पैसा इसी खाते में मंगवाते थे और अनिल उसे निकालकर आगे बढ़ा देता था। जब पुलिस ने अनिल से इस भारी-भरकम रकम के बारे में पूछा, तो उसके पास कोई संतोषजनक जवाब नहीं था।

सावधानी: आपका खाता, आपकी जिम्मेदारी!

​पटना पुलिस ने इस गिरफ्तारी के साथ ही शहर के अन्य व्यापारियों और आम नागरिकों के लिए चेतावनी जारी की है:

    1. खाता किराए पर न दें: कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम या नेट बैंकिंग किसी को इस्तेमाल न करने दें।
    2. कानूनी शिकंजा: अगर आपके खाते से ठगी का पैसा निकलता है, तो मुख्य अपराधी के साथ-साथ ‘खाताधारक’ को भी जेल जाना होगा।
    3. नेटवर्क की तलाश: पुलिस अब उन ‘कमीशन एजेंटों’ को चिन्हित कर रही है जो पटना में बैठकर साइबर गैंग को बैंक अकाउंट सप्लाई कर रहे हैं।

VOB का नजरिया: शार्टकट से ‘अमीरी’ या जेल की ‘रोटी’?

पटना के इस दवा व्यापारी की कहानी लालच और मूर्खता का एक घातक मिश्रण है। एक पढ़ा-लिखा कारोबारी अगर यह सोचता है कि वह ₹81 लाख का अवैध लेनदेन करेगा और कानून की नजरों से बच जाएगा, तो यह उसकी बड़ी भूल है। साइबर अपराधी अक्सर व्यापारियों के ‘करेंट अकाउंट’ को निशाना बनाते हैं क्योंकि उनमें बड़े ट्रांजैक्शन पर जल्दी शक नहीं होता। लेकिन डिजिटल फुटप्रिंट कभी पीछा नहीं छोड़ते। अनिल को मिला ₹16 लाख का कमीशन अब उसे सालों तक सलाखों के पीछे रखने के लिए काफी है।

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