भागलपुर में ‘बबलू’ ही निकला ‘बबलू’ का हत्यारा! दियारा में सिंचाई के वक्त बिछा दी थी लाश, 24 घंटे में पुलिस ने किया खूनी साजिश का पर्दाफाश

बड़ी खबरें एक नज़र में:

  • खूनी खेल: सिंचाई करने गए किसान को खेत में ही अपराधियों ने गोलियों से भूना।
  • बड़ा खुलासा: जमीन बटाई की रंजिश में मास्टरमाइंड बबलू ने अपने ही नामराशि को रास्ते से हटाया।
  • पुलिसिया प्रहार: 24 घंटे के भीतर 4 अपराधी दबोचे गए, भारी मात्रा में हथियार और कारतूस बरामद।

दियारा में ‘मौत’ का पटवन: सिंचाई के वक्त चली अंधाधुंध गोलियां

भागलपुर: जिले के एकचारी थाना क्षेत्र के दियारा इलाके में सोमवार को हुई बबलू मंडल की हत्या से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी। बबलू मंडल रोज की तरह अपने खेत में पटवन (सिंचाई) करने गए थे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि मौत वहां झाड़ियों के पीछे पहले से ही घात लगाकर बैठी है। अपराधियों ने उन्हें संभलने का मौका तक नहीं दिया और गोलियों की बौछार कर दी। बबलू की मौके पर ही मौत हो गई और हत्यारे दियारा की मिट्टी में गायब हो गए।

​लेकिन भागलपुर पुलिस ने इस चुनौती को स्वीकार किया और महज 24 घंटे के भीतर इस ‘ब्लाइंड मर्डर’ की गुत्थी सुलझाकर अपराधियों की कमर तोड़ दी है।

‘नाम’ एक, इरादे नेक नहीं: जमीन की भूख ने बनाया हत्यारा

​सिटी एसपी शैलेंद्र सिंह ने इस हत्याकांड का रोंगटे खड़े कर देने वाला खुलासा किया है। पूछताछ में जो सच सामने आया, उसने सबको हैरान कर दिया।

  • रंजिश की जड़: हत्या की मुख्य वजह जमीन बटाई (Batai) को लेकर चल रहा पुराना विवाद था।
  • बबलू बनाम बबलू: चौंकाने वाली बात यह है कि इस हत्या का मास्टरमाइंड कोई और नहीं, बल्कि आरोपी बबलू मंडल ही है। उसने अपने ही नाम के शख्स (मृतक बबलू मंडल) को खत्म करने के लिए सुपारी दी और खुद इस पूरी साजिश की कमान संभाली।

खाकी का शिकंजा: ये हैं पुलिस के हत्थे चढ़े ‘शिकारी’

​पुलिस की विशेष टीम ने दियारा के संभावित ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की और हत्या में शामिल चार मुख्य चेहरों को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए अपराधियों में बबलू मंडल (मास्टरमाइंड), मनोज कुमार मंडल, शंभू कुमार और सूरज कुमार शामिल हैं। पुलिस की मानें तो ये सभी पेशेवर तरीके से वार करने की फिराक में थे।

हथियारों का ‘शस्त्रागार’ बरामद: बड़ी गैंगवार टली

​गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने अपराधियों के पास से जो सामान बरामद किया है, वह चौंकाने वाला है। ऐसा लग रहा था कि दियारा में बड़ी जंग की तैयारी थी:

    • दो मास्केट (शक्तिशाली देशी बंदूकें)
    • 19 जिंदा कारतूस
    • 08 खाली खोखा (जो हत्या के वक्त इस्तेमाल हुए)

VOB का नजरिया: ‘मिट्टी’ के लिए इंसानी खून सस्ता क्यों?

भागलपुर के दियारा में जमीन की जंग दशकों पुरानी है, लेकिन 24 घंटे के भीतर सिटी एसपी की टीम का यह एक्शन काबिले तारीफ है। बबलू मंडल की हत्या ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जमीन का एक छोटा सा टुकड़ा मानवीय संवेदनाओं पर भारी पड़ रहा है। हथियारों की इतनी बड़ी खेप बरामद होना यह भी बताता है कि दियारा में अपराधी अभी भी अपनी समानांतर सत्ता चलाने की कोशिश में हैं। पुलिस की इस तत्परता ने अपराधियों को साफ संदेश दिया है— “अब जुर्म करोगे, तो पाताल से भी खोज निकाले जाओगे!”

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