बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संभावित राज्यसभा जाने की चर्चा के बीच जदयू कार्यकर्ताओं का विरोध सामने आने लगा है। मधेपुरा में रविवार को पार्टी के कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री से राज्यसभा जाने के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए कहा कि बिहार की जनता ने नीतीश कुमार को उनके नेतृत्व और कामकाज के आधार पर चुना है। ऐसे में उन्हें राज्यसभा भेजने की चर्चा कार्यकर्ताओं और आम लोगों की भावनाओं के खिलाफ है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि नीतीश कुमार को बिहार में रहकर ही राज्य की राजनीति और विकास कार्यों का नेतृत्व करना चाहिए।
कार्यकर्ताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने कार्यकाल में कई ऐसे फैसले लिए, जिनसे समाज के कमजोर वर्गों और खासकर महिलाओं को नई ताकत मिली। पंचायत और नगर निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने के फैसले से बड़ी संख्या में महिलाएं नेतृत्व की भूमिका में आईं और स्थानीय प्रशासन में उनकी भागीदारी बढ़ी।
इसके अलावा बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई साइकिल और पोशाक योजना को भी कार्यकर्ताओं ने ऐतिहासिक पहल बताया। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं के कारण बड़ी संख्या में लड़कियां स्कूलों तक पहुंच सकीं और शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला। शराबबंदी जैसे फैसलों को भी महिलाओं की सुरक्षा और सामाजिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम बताया गया।
प्रदर्शन कर रहे जदयू कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून-व्यवस्था के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। राज्य में विकास और सुशासन की जो पहचान बनी है, उसमें मुख्यमंत्री की अहम भूमिका रही है।
कुछ कार्यकर्ताओं ने यह आरोप भी लगाया कि पार्टी के अंदर के कुछ नेता अपने राजनीतिक हितों को साधने के लिए मुख्यमंत्री के राज्यसभा जाने की चर्चा को हवा दे रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि वे कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भावनाओं का सम्मान करते हुए इस विषय पर गंभीरता से विचार करें और बिहार की सक्रिय राजनीति में अपनी भूमिका जारी रखें।
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने साफ कहा कि नीतीश कुमार का नेतृत्व ही जदयू की सबसे बड़ी ताकत है और बिहार की जनता उन्हें राज्य की राजनीति में सक्रिय देखना चाहती है। इस मुद्दे को लेकर पार्टी के भीतर चल रही चर्चा ने बिहार की सियासत को और गरमा दिया है।


