JDU Crisis: मधेपुरा की सड़कों पर उतरा ‘नीतीश का गुस्सा’! कार्यकर्ताओं ने अपनों को ही कहा ‘विभीषण’; राज्यसभा जाने के फैसले को वापस लेने पर अड़े समर्थक

खबर के मुख्य बिंदु:

  • मधेपुरा में उबाल: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले के खिलाफ जेडीयू कार्यकर्ताओं का जोरदार प्रदर्शन।
  • अपनों पर वार: कार्यकर्ताओं ने पार्टी के कुछ शीर्ष नेताओं पर ‘विभीषण’ होने और बीजेपी से मिलीभगत का लगाया आरोप।
  • जनादेश का हवाला: समर्थकों का कहना— “2025 में वोट नीतीश कुमार के चेहरे और काम पर मिला था, गठबंधन पर नहीं।”
  • अपील: मुख्यमंत्री से दिल्ली जाने का फैसला वापस लेने और बिहार की कमान संभाले रखने की मांग।

मधेपुरा: बिहार की राजनीति में आए ‘महा-भूकंप’ की तपिश अब राजधानी पटना से निकलकर कोसी के इलाकों तक पहुँच गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने और मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने की खबरों ने मधेपुरा के जेडीयू कार्यकर्ताओं को सड़कों पर उतरने को मजबूर कर दिया है। शनिवार को जिला मुख्यालय पर जुटे कार्यकर्ताओं ने न केवल नारेबाजी की, बल्कि अपनी ही पार्टी के कुछ शीर्ष नेताओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

“पार्टी के भीतर छिपे हैं विभीषण”: कार्यकर्ताओं का सीधा हमला

​मधेपुरा में विरोध प्रदर्शन कर रहे जेडीयू नेताओं और कार्यकर्ताओं का गुस्सा सातवें आसमान पर था। उनका आरोप है कि मुख्यमंत्री का यह फैसला उनका अपना नहीं, बल्कि उन पर थोपा गया है।

  • साजिश का आरोप: प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पार्टी के भीतर कुछ ऐसे ‘विभीषण’ और ‘बिचौलिए’ सक्रिय हो गए हैं, जो अपने निजी स्वार्थ साधने के लिए नीतीश कुमार को बिहार की सक्रिय राजनीति से दूर करना चाहते हैं।
  • BJP से सांठगांठ: कार्यकर्ताओं ने बिना नाम लिए आरोप लगाया कि पार्टी के कुछ शीर्ष पदाधिकारी बीजेपी के साथ मिलकर नीतीश कुमार को ‘साइडलाइन’ करने की साजिश रच रहे हैं ताकि बिहार में बीजेपी का मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो सके।

“जनादेश नीतीश के लिए था, किसी चेहरे के लिए नहीं”

​प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं ने 2025 के विधानसभा चुनावों की याद दिलाते हुए कहा कि जनता ने एनडीए गठबंधन को नहीं, बल्कि नीतीश कुमार के ‘सुशासन’ और उनके ‘काम’ को देखकर वोट दिया था।

​”बिहार की जनता ने नीतीश कुमार को 5 साल का मैंडेट दिया है। बीच सफर में उन्हें राज्यसभा भेजना समर्थकों और मतदाताओं के साथ बड़ा विश्वासघात है। अगर वे चले गए, तो बिहार का विकास रुक जाएगा।” — स्थानीय जेडीयू कार्यकर्ता

VOB का नजरिया: क्या बिखर जाएगी JDU?

​नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले ने जेडीयू के जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच एक बड़ी ‘असुरक्षा’ की भावना पैदा कर दी है। मधेपुरा का यह प्रदर्शन इसी बेचैनी का नतीजा है। कार्यकर्ताओं को डर है कि नीतीश कुमार के बिना पार्टी का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। हालांकि, नीतीश कुमार ने शुक्रवार को विधायकों से मिलकर आश्वासन दिया है कि वे बिहार पर नजर रखेंगे, लेकिन ‘बिचौलियों’ और ‘विभीषणों’ पर जो आरोप लग रहे हैं, वे पार्टी के भीतर एक बड़ी टूट या विद्रोह की ओर इशारा कर रहे हैं।

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