‘वैसलीन’ गैंग का खूनी खेल खत्म! चादर की आड़ में ट्रेन यात्रियों के बैग खाली करते थे शातिर; मास्टर चाबी और सोने के गहनों के साथ 5 गिरफ्तार

खबर के मुख्य बिंदु:

  • बड़ा खुलासा: जीआरपी भागलपुर और आरपीएफ जमालपुर की संयुक्त कार्रवाई में 5 शातिर चोर दबोचे गए।
  • अनोखा तरीका: चेन की आवाज दबाने के लिए ‘वैसलीन’ का इस्तेमाल और मास्टर चाबी से ताला खोलने में माहिर।
  • गिरफ्तारी: सुल्तानगंज स्टेशन पर राजेंद्रनगर-बांका एक्सप्रेस से उतरकर भागते समय पकड़े गए आरोपी।
  • बरामदगी: भारी मात्रा में सोने-चांदी के जेवर, मोबाइल, मास्टर चाबी और कटर बरामद।

भागलपुर: ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों के लिए एक राहत भरी खबर है। जीआरपी और आरपीएफ ने मिलकर एक ऐसे अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है जो बड़े ही ‘शातिर’ और ‘खामोश’ तरीके से यात्रियों का सामान पार कर देता था। यह गिरोह पटना और मुंगेर के अपराधियों का एक गठजोड़ है, जो चलती ट्रेन में ‘वैसलीन’ और ‘चादर’ के जरिए अपनी काली करतूतों को अंजाम देता था। शुक्रवार को पुलिस ने जाल बिछाकर सुल्तानगंज स्टेशन के पास से इस गिरोह के 5 मुख्य सदस्यों को दबोच लिया।

कैसे काम करता था यह ‘वैसलीन गैंग’? (Modus Operandi)

​पकड़े गए आरोपियों ने पूछताछ में जो खुलासे किए हैं, वे किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं हैं:

  • चादर का पर्दा: गिरोह के सदस्य जनरल कोच में सामान रखने वाली ऊपर की सीट पर कब्जा जमा लेते थे। इसके बाद वे चादर फैला देते थे ताकि नीचे बैठे यात्रियों को यह पता न चले कि ऊपर क्या हो रहा है।
  • वैसलीन का जादू: बैग की चेन खोलने से पहले ये शातिर उस पर वैसलीन लगा देते थे। इससे चेन बिना किसी आवाज के सरक जाती थी और गहरी नींद में सो रहे यात्री को भनक तक नहीं लगती थी।
  • ब्लेड और मास्टर चाबी: अगर चेन नहीं खुलती, तो ये मास्टर चाबी का इस्तेमाल करते थे। वहीं, महिलाओं और बच्चों के गले से आभूषण उड़ाने के लिए ये तेज ब्लेड और कैंची का उपयोग करते थे।

पटना और मुंगेर के ये 5 ‘खिलाड़ी’ चढ़े पुलिस के हत्थे

​पुलिस ने जिन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनमें पटना का एक और मुंगेर के चार अपराधी शामिल हैं:

  1. मनोज कुमार सरफी: पटना (गर्दनीबाग चितकोहरा)।
  2. मो. नौशाद: मुंगेर (गुलजार पोखर)।
  3. जसीमुद्दीन उर्फ पप्पू: मुंगेर (दिलवारपुर)।
  4. मो. हैदर अली: मुंगेर (शादीपुर)।
  5. मो. नौशाद (द्वितीय): मुंगेर (मुर्गियाचक)।

बरामदगी की लंबी फेहरिस्त: आभूषणों से लेकर औजारों तक

​आरोपियों के पास से जो सामान मिला है, वह उनकी सक्रियता की कहानी बयां कर रहा है:

  • सोने के गहने: कंगन, मांगटीका, कान का झुमका और अंगूठी।
  • चांदी के जेवर: 200 ग्राम भारी पायल, ब्रेसलेट और चेन।
  • टेक और टूल्स: कई महंगे मोबाइल, मास्टर चाबी, लोहे का कटर, पिलास, स्क्रू ड्राइवर, ब्लेड और नकद रुपये।

सुल्तानगंज में ऐसे बिछाया गया ‘मौत का जाल’

​आरपीएफ सीआईबी जमालपुर को पुख्ता सूचना मिली थी कि यह गिरोह राजेंद्रनगर-बांका एक्सप्रेस से सुल्तानगंज पहुँचने वाला है। इंस्पेक्टर फिरोज अख्तर और सुधांशु कुमार की टीम ने पहले से घेराबंदी कर रखी थी। जैसे ही ये पाँचों स्टेशन के पुराने भवन की तरफ से बाहर भागने लगे, पुलिस ने उन्हें दौड़ाकर पकड़ लिया।

VOB का नजरिया: सतर्कता ही सुरक्षा है!

​इस गिरोह की गिरफ्तारी पुलिस की एक बड़ी कामयाबी है, लेकिन ‘वैसलीन तकनीक’ ने यह साफ कर दिया है कि अपराधी अब और अधिक ‘स्मार्ट’ हो रहे हैं। जनरल कोच में ऊपर की सीट पर चादर तानकर बैठने वालों पर यात्रियों को खुद भी नजर रखनी चाहिए। जीआरपी और आरपीएफ की यह संयुक्त कार्रवाई स्वागत योग्य है, लेकिन गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुँचना अभी बड़ी चुनौती है।

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