
खबर के मुख्य बिंदु:
- तारीख: 19 मार्च (गुरुवार) से 27 मार्च (शुक्रवार) तक मनेगी चैती दुर्गा पूजा।
- शुभ संकेत: इस बार मां दुर्गा का ‘डोली’ पर होगा आगमन; सुख-समृद्धि का प्रतीक।
- मुहूर्त: कलश स्थापना के लिए सुबह और दोपहर में दो विशेष ‘गोल्डन’ मुहूर्त।
- रामनवमी: 27 मार्च को मां सिद्धिदात्री की पूजा के साथ ही मनेगी रामनवमी।
भागलपुर: बिहार में चुनावी सरगर्मियों और ‘नितीश युग’ के बदलावों के बीच अब फिजाओं में भक्ति का रस घुलने वाला है। बसंती बयार के साथ ही चैत्र नवरात्रि (चैती दुर्गा) का आगाज होने जा रहा है। इस बार 19 मार्च से लेकर 27 मार्च तक पूरा सूबा ‘जय माता दी’ के जयकारों से गुंजायमान रहेगा। भागलपुर के मंदिरों से लेकर घरों तक में मां के नौ स्वरूपों की आराधना की तैयारियां जोरों पर हैं।
डोली पर आगमन: क्या कहता है शास्त्र?
जगन्नाथ मंदिर के प्रसिद्ध पंडित समीर मिश्रा के अनुसार, इस बार मां दुर्गा का आगमन ‘डोली’ पर हो रहा है। देवी भागवत पुराण के अनुसार, जब नवरात्रि गुरुवार या शुक्रवार से शुरू होती है, तो मां डोली पर सवार होकर आती हैं। इसे बेहद शुभ माना जाता है और यह भक्तों के जीवन में खुशहाली और शांति का संकेत है। साल में होने वाली चार नवरात्रियों में चैत्र नवरात्रि का अपना विशेष आध्यात्मिक महत्व है।
कलश स्थापना: नोट कर लें ये दो ‘शुभ मुहूर्त’
कलश स्थापना (घटस्थापना) के लिए पंडितों ने इस बार दो श्रेष्ठ समय बताए हैं। यदि आप भी घर में कलश स्थापित करना चाहते हैं, तो इन समयों का ध्यान रखें:
- प्रथम मुहूर्त (चौघड़िया): सुबह 06:53 बजे से 07:56 बजे तक। (सुबह-सुबह पूजा करने वालों के लिए श्रेष्ठ)
- द्वितीय मुहूर्त (अभिजीत): दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक। (इसे सबसे शक्तिशाली और फलदायी मुहूर्त माना जाता है)
मंदिरों में ‘मिशन मोड’ में तैयारी: मानिकपुर में दिखेगी भव्यता
चैत्र नवरात्रि को लेकर शहर के मंदिरों में रंगाई-पुताई और पंडाल निर्माण का काम शुरू हो चुका है। भागलपुर के प्रसिद्ध मानिकपुर चैती दुर्गा मंदिर में इस बार विशेष आयोजन की तैयारी है।
समिति के आयोजक हरिशंकर सहाय ने बताया कि:
- मंदिर परिसर को सजाने के लिए विशेष लाइटिंग की व्यवस्था की जा रही है।
- प्रतिमा निर्माण के लिए बंगाल के कलाकारों को बुलाया गया है।
- नौ दिनों तक अखंड ज्योति और दुर्गा सप्तशती के पाठ के लिए विद्वान पंडितों की बुकिंग पूरी हो चुकी है।
VOB का नजरिया: आस्था और उत्साह का संगम
चैत्र नवरात्रि केवल उपवास का त्योहार नहीं है, बल्कि यह खुद को ऊर्जावान बनाने और बुराइयों पर अच्छाई की जीत का पर्व है। इस बार 27 मार्च को रामनवमी का संयोग इसे और भी खास बना रहा है। भागलपुर प्रशासन के लिए भी यह समय चुनौतीपूर्ण होगा क्योंकि मंदिरों में उमड़ने वाली भीड़ के लिए सुरक्षा और सफाई के कड़े इंतजाम करने होंगे।


