पटना में JDU दफ्तर बना ‘जंग का मैदान’! नीतीश के राज्यसभा जाने पर समर्थकों का ‘विद्रोह’, दफ्तर में तोड़फोड़ और शुरू हुआ पोस्टकार्ड वॉर

खबर के मुख्य बिंदु (Highlights):

  • भारी हंगामा: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा नामांकन के बाद भड़के समर्थक; वीरचंद पटेल पथ पर जमकर बवाल।
  • इमोशनल नारेबाजी: “हम जान दे देंगे, पर नीतीश को जाने नहीं देंगे” – कार्यकर्ताओं के नारों से गूँजा पटना।
  • पोस्टर वॉर: जेडीयू कार्यालय के बाहर लगा ‘पुनर्विचार’ पोस्टर; कार्यकर्ताओं ने शुरू किया पोस्टकार्ड अभियान।
  • विपक्ष का वार: राजद और विपक्षी दलों ने इसे बताया जेडीयू को खत्म करने की बीजेपी की ‘गुप्त रणनीति’।

पटना: बिहार की राजनीति में कल का दिन जितना ऐतिहासिक था, आज का दिन उतना ही हंगामेदार। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करने के फैसले ने उनकी ही पार्टी के भीतर एक ‘भावुक और उग्र’ सुनामी खड़ी कर दी है। राजधानी पटना के वीरचंद पटेल पथ स्थित जदयू (JDU) प्रदेश कार्यालय में गुरुवार को जो मंजर दिखा, उसने साफ कर दिया कि पार्टी का जमीनी कार्यकर्ता अपने नेता को बिहार की कुर्सी छोड़ते हुए देखने के लिए तैयार नहीं है।

दफ्तर में तोड़फोड़ और ‘नीतीश सेवक’ की पुकार

​नामांकन की खबर पक्की होते ही दोपहर 12 बजे से ही सैकड़ों कार्यकर्ता मुख्यालय में जमा होने लगे। देखते ही देखते समर्थकों का दुख आक्रोश में बदल गया और कार्यालय परिसर में जमकर हंगामा और तोड़फोड़ हुई। कार्यकर्ताओं का कहना है कि बिहार को नीतीश कुमार की जरूरत है और वे उन्हें दिल्ली नहीं जाने देंगे।

गूँजते रहे ये भावुक नारे:

​”नीतीश कुमार बिहार के हैं, उन्हें कहीं नहीं जाने देंगे!”

“हम जान दे देंगे, लेकिन नीतीश को नहीं जाने देंगे!”

 

पोस्टर पॉलिटिक्स: “नेता करें अपने निर्णय पर पुनर्विचार”

​हंगामे के बीच जेडीयू कार्यालय के बाहर एक बड़ा पोस्टर चर्चा का विषय बन गया है। ‘नीतीश सेवक’ की ओर से लगाए गए इस पोस्टर में भावुक अपील की गई है। पोस्टर पर लिखा है:

  • “नीतीश सेवक कर रहा पुकार, नेता करें अपने निर्णय पर पुनर्विचार…”
  • “लोकतंत्र में जनता के जनादेश और आत्मसम्मान का हनन, अब नहीं होगा सहन…”

​इतना ही नहीं, समर्थकों ने ‘पोस्टकार्ड लेखन अभियान’ भी शुरू किया है, जिसके जरिए हजारों की संख्या में पत्र लिखकर नीतीश कुमार से इस्तीफा वापस लेने की मांग की जाएगी।

सियासी वार-पलटवार: रणनीति या साजिश?

​नीतीश कुमार के इस कदम ने बिहार के सियासी गलियारों में बहस छेड़ दी है:

  1. सत्ता पक्ष: एनडीए के नेता इसे एक ‘मास्टरस्ट्रोक’ और नीतीश कुमार के कद के अनुरूप एक बड़ा और शानदार निर्णय बता रहे हैं।
  2. विपक्ष: विपक्षी खेमे का आरोप है कि यह भाजपा की सोची-समझी साजिश है। विपक्ष का कहना है कि बीजेपी ने नीतीश कुमार को दिल्ली भेजकर जेडीयू को बिहार में ‘निगलने’ और पार्टी को समाप्त करने की बिसात बिछा दी है।

VOB का नजरिया: नीतीश के लिए ‘अग्निपरीक्षा’

​बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार की छवि हमेशा एक ‘अजेय’ नेता की रही है, लेकिन पहली बार उन्हें अपनी ही पार्टी के समर्थकों के ‘अपनत्व वाले विद्रोह’ का सामना करना पड़ रहा है। एक तरफ दिल्ली की ऊंची राजनीति है और दूसरी तरफ दशकों से वफादार कार्यकर्ताओं का यह प्यार। क्या ‘सुशासन बाबू’ अपने समर्थकों की भावनाओं के आगे झुकेंगे या बिहार की कमान किसी और को सौंपकर दिल्ली की ओर कूच करेंगे? आने वाले 24 घंटे जेडीयू के भविष्य के लिए निर्णायक होने वाले हैं।

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