जेडीयू दफ्तर बना ‘अखाड़ा’! नीतीश के राज्यसभा जाने पर भड़के कार्यकर्ता; पकवान फेंके, कुर्सियां तोड़ीं; अपने ही नेताओं पर फूटा गुस्सा

खबर के मुख्य बिंदु (Highlights):

  • रणक्षेत्र: पटना स्थित जेडीयू मुख्यालय में जबरदस्त तोड़फोड़; कार्यकर्ताओं ने फर्नीचर और खाने के काउंटर तहस-नहस किए।
  • आक्रोश: “जब नेता जा रहा है, तो जश्न क्यों?”— नेताओं के लिए सजे पकवानों को सड़कों पर फेंका।
  • निशाने पर दिग्गज: संजय झा, विजय चौधरी और ललन सर्राफ के खिलाफ जमकर नारेबाजी।
  • बगावत: दो फाड़ हुई जेडीयू; एक गुट भाजपा के साथ, दूसरा ‘पिछड़ा राजनीति’ बचाने की जिद पर अड़ा।

पटना: बिहार की सत्ता में होने जा रहे महा-परिवर्तन की आंच अब सड़कों से होती हुई पार्टी के भीतर तक पहुँच गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले ने जेडीयू कार्यकर्ताओं के सब्र का बांध तोड़ दिया है। पटना के वीरचंद पटेल पथ स्थित जेडीयू प्रदेश मुख्यालय में गुरुवार को उस वक्त ‘गृहयुद्ध’ जैसे हालात बन गए, जब गुस्साए कार्यकर्ताओं ने दफ्तर के भीतर जमकर तांडव किया। दफ्तर में सजी कुर्सियां तोड़ दी गईं और नेताओं के लिए मंगवाए गए खाने के बर्तनों को हवा में उछाल दिया गया।

“गले से पानी नहीं उतर रहा और यहाँ दावत हो रही है?”

​हंगामा तब शुरू हुआ जब कार्यकर्ताओं ने दफ्तर के पिछले हिस्से में खाने-पीने के भव्य इंतजाम देखे।

  • भड़का गुस्सा: कार्यकर्ताओं का आरोप था कि जब पार्टी का अस्तित्व खतरे में है और उनके नेता को ‘साजिश’ के तहत पद से हटाया जा रहा है, तब कुछ सीनियर नेता जश्न की तैयारी कर रहे हैं।
  • प्रत्यक्षदर्शी: एक आक्रोशित समर्थक ने चिल्लाते हुए कहा, “जब हमारे साहब (नीतीश कुमार) को बिहार छुड़वाया जा रहा है, तो हमारे गले से पानी नहीं उतर रहा। ये बड़े नेता यहाँ पकवान सजाकर पार्टी कर रहे हैं? ये गद्दारी है!”

संजय झा और विजय चौधरी पर फूटा गुस्सा

​कार्यकर्ताओं के निशाने पर पार्टी के वो चेहरे थे जिन्हें इस ‘सत्ता हस्तांतरण’ का सूत्रधार माना जा रहा है।

  1. सीनियर नेताओं का घेराव: कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि संजय झा, विजय चौधरी और ललन सर्राफ बुधवार भर ‘1, अणे मार्ग’ में मौजूद रहकर भाजपा के ‘गेम प्लान’ को अमली जामा पहना रहे थे।
  2. ललन सिंह पर सवाल: केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह के बारे में भी कार्यकर्ताओं में सुगबुगाहट है कि वे पर्दे के पीछे से इस पूरी पटकथा की मॉनिटरिंग कर रहे हैं।

दो गुटों में बंट गई जेडीयू: ‘सोशल इंजीनियरिंग’ पर खतरा?

​इस हंगामे ने पार्टी के भीतर की गहरी दरार को उजागर कर दिया है:

  • धारा 1: वह गुट जो खुद को भाजपा की राजनीति के करीब पाता है और केंद्र में मलाईदार पदों की उम्मीद में सत्ता परिवर्तन का समर्थन कर रहा है।
  • धारा 2: वह गुट (जमीनी कार्यकर्ता) जो नीतीश कुमार को पिछड़ी जाति की राजनीति का मसीहा मानता है। उन्हें डर है कि भाजपा के हाथों में कमान जाते ही ‘सोशल इंजीनियरिंग’ का ढांचा ढह जाएगा।

भाजपा की ‘होली’ और जेडीयू की ‘मायूसी’

​जहाँ भाजपा खेमे में होली का जश्न और ‘दिल्ली से पटना’ तक जीत का सुर-ताल सुनाई दे रहा है, वहीं जेडीयू दफ्तर में सन्नाटा और सिसकियाँ हैं। कार्यकर्ताओं का हुजूम अब राजभवन और सीएम हाउस के बीच चक्कर काट रहा है, इस उम्मीद में कि शायद कोई चमत्कार नीतीश कुमार को दिल्ली जाने से रोक ले।

VOB का नजरिया: क्या बिखर जाएगी नीतीश की विरासत?

​जेडीयू दफ्तर में हुई यह तोड़फोड़ केवल गुस्से का इजहार नहीं, बल्कि एक ‘पहचान के संकट’ (Identity Crisis) की शुरुआत है। कार्यकर्ता समझ रहे हैं कि नीतीश कुमार के हटने के बाद पार्टी के पास कोई ऐसा ‘चुंबकीय’ चेहरा नहीं है जो सबको जोड़ सके। भाजपा का चक्रव्यूह सफल होता दिख रहा है, लेकिन क्या वह जेडीयू के इन बागी तेवरों को संभाल पाएगी? यह आने वाले 6 महीनों की सबसे बड़ी चुनौती होगी।

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