औन्टा में CRPF जवानों और ग्रामीणों के बीच भीषण भिड़ंत; पेट्रोल बम चले, घर में घुसकर पिटाई का आरोप; इलाके में तनाव

खबर के मुख्य बिंदु (Highlights):

  • बड़ी झड़प: होली के जश्न के बीच औन्टा गांव में ग्रामीणों और CRPF जवानों के बीच खूनी संघर्ष।
  • वजह: शराब और मादक पदार्थों के नशे में अश्लील हरकत को लेकर शुरू हुआ विवाद।
  • हिंसा: ग्रामीणों का पेट्रोल बम से हमला; जवानों पर घर में घुसकर महिलाओं को पीटने का आरोप।
  • तफ्तीश: CRPF डीआईजी और बाढ़ एसडीपीओ ने 2 घंटे तक गांव में की सघन जांच।

बाढ़ (पटना): रंगों का त्योहार होली औन्टा गांव के लिए ‘रणक्षेत्र’ में तब्दील हो गया। जहां एक ओर देश भाईचारे का संदेश दे रहा था, वहीं दूसरी ओर CRPF के जवानों और स्थानीय ग्रामीणों के बीच ऐसी भिड़ंत हुई कि पूरे इलाके में तनाव फैल गया है। बात इतनी बढ़ गई कि एक तरफ से लाठियां चलीं तो दूसरी तरफ से ‘पेट्रोल बम’ फेंके गए। इस हिंसा में दोनों पक्षों के करीब 10 लोग घायल हुए हैं।

नशे की खुमारी और अश्लील हरकत: कैसे शुरू हुआ विवाद?

​जानकारी के अनुसार, विवाद की शुरुआत तब हुई जब कुछ ग्रामीण शराब और अन्य मादक पदार्थों का सेवन कर अश्लील हरकतें कर रहे थे।

  • कहासुनी: वहां मौजूद CRPF जवानों ने जब इसका विरोध किया, तो बहस शुरू हो गई।
  • खूनी संघर्ष: देखते ही देखते बात मारपीट तक पहुंच गई। ग्रामीणों का आरोप है कि जवानों ने आपा खो दिया और गांव के भीतर घुसकर तांडव मचाया।

पेट्रोल बम बनाम लाठीचार्ज: आमने-सामने आए दोनों पक्ष

​झड़प ने तब और भयानक रूप ले लिया जब दोनों तरफ से भारी हिंसा हुई:

    1. ग्रामीणों का आरोप: ग्रामीणों का कहना है कि CRPF के जवानों ने जबरन घरों के दरवाजे तोड़े, अंदर घुसे और महिलाओं के साथ मारपीट की। घर के सामानों में भी तोड़-फोड़ की गई।
    2. जवानों पर हमला: दूसरी ओर खबर है कि उग्र ग्रामीणों ने CRPF के आवासीय परिसर (Residential Area) को निशाना बनाया और वहां पेट्रोल बम से हमला कर दिया।

​”हम लोग अपने घर में थे, तभी जवान अंदर घुस आए और औरतों को पीटने लगे। उन्होंने घर का सामान भी तोड़ दिया। होली के दिन ऐसा जुल्म कभी नहीं देखा।” — एक पीड़ित ग्रामीण (बाइट)

 

अधिकारियों की दौड़: DIG और SDPO ने संभाला मोर्चा

​मामले की गंभीरता को देखते हुए CRPF डीआईजी रविंद्र भगत और बाढ़ एसडीपीओ आनंद कुमार सिंह भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे।

    • 2 घंटे का मुआयना: अधिकारियों ने करीब दो घंटे तक गांव के एक-एक कोने की जांच की।
    • पूछताछ: डीआईजी और एसडीपीओ ने घायल ग्रामीणों और मौके पर मौजूद चश्मदीदों से अलग-अलग पूछताछ की ताकि सच का पता लगाया जा सके।
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