बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं ने सियासी माहौल गर्म कर दिया है। मुख्यमंत्री आवास के बाहर जमकर विरोध और हंगामा देखने को मिला, जहां जनता और पार्टी कार्यकर्ता अपनी नाराजगी जताने के लिए सड़कों पर उतर आए।
सूत्रों के अनुसार, जदयू कार्यकर्ताओं ने जोरदार नारे लगाते हुए कहा कि “नीतीश कुमार बिहार के हैं, उन्हें कहीं नहीं जाने देंगे।” कुछ कार्यकर्ताओं ने तो यहां तक कहा कि वे इसके लिए अपनी जान देने तक को तैयार हैं।
कार्यकर्ताओं का गुस्सा चरम पर
मुख्यमंत्री आवास के पास हालात उस समय बिगड़ गए जब जदयू के विधान परिषद सदस्य और नीतीश कुमार के करीबी माने जाने वाले संजय गांधी पहुंचे। आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने उनकी गाड़ी घेर ली और कथित तौर पर उस पर हमला किया।
इसी दौरान भाजपा विधायक और मंत्री सुरेंद्र मेहता भी मुख्यमंत्री आवास से गुजर रहे थे, जिनकी गाड़ी को भी निशाना बनाया गया। कार्यकर्ताओं ने वाहन पर हाथ मारे और शीशे तोड़ने की कोशिश की। पुलिस ने किसी तरह स्थिति को काबू में किया और नेताओं को सुरक्षित बाहर निकाला।
राजनीति या भावनाओं की लड़ाई?
राज्यसभा की सियासी बिसात पर चल रही चर्चाओं के बीच जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं का यह गुस्सा यह दिखाता है कि मामला सिर्फ पद परिवर्तन का नहीं, बल्कि भावनाओं और वफादारी की लड़ाई का भी है। अब सभी की निगाहें मुख्यमंत्री और पार्टी नेतृत्व के अगले कदम पर टिकी हैं।
बिहार की राजनीति में आने वाले कुछ घंटे बेहद अहम साबित हो सकते हैं।


