अमित शाह के साथ दाखिल होगा नामांकन, बिहार में बड़ा राजनीतिक संदेश

पटना: बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए आज से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई है। विधानसभा परिसर में सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक उम्मीदवार नामांकन दाखिल कर रहे हैं। इस बार एनडीए गठबंधन सभी पांचों सीटों पर मजबूत स्थिति में नजर आ रहा है। हालांकि, सबसे ज्यादा चर्चा मुख्यमंत्री के संभावित राज्यसभा नामांकन को लेकर हो रही है।


क्या राज्यसभा जाएंगे नीतीश कुमार?

सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करने की संभावना प्रबल मानी जा रही है। होली के दिन जदयू के वरिष्ठ नेताओं के साथ लंबी बैठक हुई, जिसमें इस मुद्दे पर चर्चा की गई। पार्टी नेताओं का कहना है कि अंतिम निर्णय नीतीश कुमार ही लेंगे।

हालांकि, ऊर्जा मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव और नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार सहित परिवार के कुछ सदस्य इस फैसले के पक्ष में नहीं बताए जा रहे हैं। यदि नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए नामांकन करते हैं, तो उन्हें मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में बिहार को पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री मिल सकता है।


जदयू से दो उपमुख्यमंत्री बनाने की चर्चा

नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की स्थिति में जदयू से दो उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की चर्चा है। इसमें निशांत कुमार का नाम प्रमुख रूप से सामने आ रहा है।

गौरतलब है कि नीतीश कुमार अब तक विधानसभा, विधान परिषद और लोकसभा के सदस्य रह चुके हैं। यदि वे राज्यसभा पहुंचते हैं, तो वे देश के चारों सदनों की सदस्यता का अनुभव रखने वाले चुनिंदा नेताओं में शामिल हो जाएंगे।

जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी ने कहा कि इस संबंध में अंतिम फैसला नीतीश कुमार ही करेंगे।


तीसरी बार मैदान में रामनाथ ठाकुर

जदयू कोटे से भारत रत्न के पुत्र तीसरी बार राज्यसभा के लिए नामांकन कर रहे हैं। वे वर्तमान में केंद्र सरकार में मंत्री भी हैं।

भाजपा कोटे से राष्ट्रीय अध्यक्ष और शिवेश कुमार राम नामांकन दाखिल कर रहे हैं। वहीं राष्ट्रीय लोक मोर्चा की ओर से दोबारा राज्यसभा भेजे जा रहे हैं, क्योंकि उनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है।


अमित शाह का पटना दौरा

भाजपा उम्मीदवार के नामांकन के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री पटना में मौजूद रहेंगे। जदयू के वरिष्ठ नेता भी संभावित उम्मीदवार के नामांकन में शामिल हो सकते हैं।

नामांकन प्रक्रिया को लेकर विधानसभा परिसर में विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई है।


एनडीए की स्थिति मजबूत

पांच सीटों में से चार सीटें एनडीए के खाते में जाती हुई दिख रही हैं। पांचवीं सीट के लिए तीन अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी। विपक्ष यदि एकजुट रहा तो एक सीट जीत सकता है, लेकिन कांग्रेस, एआईएमआईएम और बसपा का रुख अभी स्पष्ट नहीं है।

विधानसभा में विपक्षी दलों के पास कुल 41 वोट हैं, लेकिन एकजुटता की कमी साफ नजर आ रही है।


किसे फायदा, किसे नुकसान?

इस चुनाव में भाजपा को दो सीटों का फायदा मिलता दिख रहा है। जदयू को अपनी दो खाली हो रही सीटें बरकरार रखने की संभावना है, जबकि हरिवंश को इस बार मौका नहीं मिला है।

राजद को दो सीटों का नुकसान हो सकता है। यदि विपक्ष उम्मीदवार उतारता है तो 13 मार्च को मतदान हो सकता है, अन्यथा एनडीए के उम्मीदवार निर्विरोध जीत सकते हैं।


📌 निष्कर्ष:
बिहार की राजनीति में राज्यसभा चुनाव बड़ा राजनीतिक संदेश दे सकता है। खासकर यदि नीतीश कुमार राज्यसभा जाते हैं, तो यह राज्य की सत्ता संरचना में ऐतिहासिक बदलाव साबित हो सकता है।

 

  • Related Posts

    बिहार की राजनीति में बदलाव की चर्चा: क्या खत्म होगा कुर्मी युग और लौटेगा यादव युग?

    Share Add as a preferred…

    Continue reading